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कौन हैं चीन का तेल निकालने वाले मेजर शैतान सिंह भाटी की तीन पोतियां? दादा के दिखाए रास्ते पर चलकर करती हैं ये काम

'120 बहादुर' की रिलीज को सिर्फ एक दिन बाकी है और इसके साथ ही शैतान सिंह भाटी की कहानी बड़े पर्दे पर छाने के लिए तैयार है। इस फिल्म की चर्चा के बीच ही शैतान सिंह भाटी का परिवार भी चर्चा में आ गया है। चलिए आपको बताते हैं उनकी पोतियां क्या कर रही हैं।

Farhan akhtar- India TV Hindi
Image Source : EXCELMOVIES/INSTAGRAM शैतान सिंह के परिवार के साथ फरहान अख्तर।

चीन के दो हजार सैनिकों और भारी हथियारों के सामने सिर्फ 120 भारतीय जवान डटे हुए थे, मां भारती की अस्मिता की रक्षा के लिए सीना तानकर, आखिरी दम तक लड़ने को तैयार। दोनों ओर से लगातार गोलियां चल रही थीं। उसी बीच मेजर शैतान सिंह दुश्मन पर जवाबी हमला करने के साथ-साथ अपने जवानों का मनोबल भी बढ़ा रहे थे। तभी एक गोली उनके हाथ में लगी। साथियों ने उन्हें पीछे हटने की सलाह दी, लेकिन मेजर के लिए यह कोई विकल्प नहीं था। हाथ घायल हो चुका था, लेकिन साहस पूरी तरह अडिग। उन्होंने मशीन गन के ट्रिगर को रस्सी की मदद से अपने पैर से बांधा और शरीर में सांस रहने तक दुश्मनों पर गोलियां बरसाते रहे। उनके इसी अदम्य साहस और पराक्रम के लिए देश ने उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया। आज, हम उसी परमवीर मेजर शैतान सिंह की तीन पोतियों के बारे में जानेंगे, जो दादा की तरह ही देश की सेवा में तत्पर हैं।

बेटा बना परिवार की कड़ी 

बिना पिता के पले-बढ़े नरपत सिंह ने मेजर शैतान सिंह को कहानियों के जरिए जाना- सैनिकों, गांववालों, इतिहासकारों और अपने बड़ों की जुबानी। उन्होंने इन कहानियों को संजोकर आगे बढ़ाया, और अपने बच्चों को यह सिखाया कि विरासत को बोझ नहीं, सम्मान की तरह जीया जाता है। नरपत सिंह अतीत और वर्तमान के बीच एक सेतु बन गए, वह धागा, जिसने परिवार को उस कहानी से जोड़े रखा जिसे वे दिल से याद करते हैं। तीनों पोतियां अपने-अपने अंदाज में मिली हुई हिम्मत को जीती हैं, अलग रास्ते, मगर एक ही जड़।

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किरण सिंह: ग्रामीण नेतृत्व की मजबूत आवाज

सबसे बड़ी पोती, किरण सिंह, नेतृत्व को अपना मार्ग बनाती हैं। अपने गांव की सरपंच के रूप में वह सशक्त ग्रामीण शासन की मिसाल हैं। उनके काम का केंद्र महिलाओं की भलाई, विकास योजनाएं और सामुदायिक ढांचे को मजबूत करना है। उनका नेतृत्व अपने दादाजी की तरह ही है स्थिर, सीधा और जिम्मेदारी को साझेदारी में निभाने वाला।

रश्मि सिंह: फाउट्री बैग्स के जरिए महिलाओं को नयी उड़ान

जहां किरण नेतृत्व करती हैं, वहीं रश्मि निर्माण करती हैं। बचपन से उन्होंने गाँव की महिलाओं को अवसरों के लिए जूझते देखा, यही अनुभूति उनके जीवन का आधार बनी। उनका ब्रांड फाउट्री बैग्स अपनी हाथ से बनी पोटलियों और एक्सेसरीज़ के लिए जाना जाता है, और गांव की कारीगर महिलाओं को रोज़गार देता है। हर डिजाइन परंपरा और आधुनिकता का संगम है; हर बिक्री किसी एक महिला की स्वतंत्रता की तरफ एक कदम। वह कहती हैं, 'मेरे लिए मजबूती का मतलब है रोज़ उठकर हिम्मत दिखाना। दादाजी देश के लिए लड़े- मैं उन महिलाओं के लिए लड़ती हूँ जो आगे बढ़ने का हक रखती हैं।' उनकी लड़ाई युद्ध के मैदान में नहीं, लेकिन उसकी भावना उतनी ही साहसी है।

रिथु सिंह: यादों की रचनात्मक संरक्षक

सबसे छोटी पोती, रिथु सिंह, विरासत को रचनात्मकता के जरिए सहेजती हैं। कभी उन्होंने K Country Villa नाम का एक बुटीक होमस्टे चलाया जो अपनी गर्मजोशी और खूबसूरत बारीकियों के लिए जाना जाता था। आज वह भारतीय कारीगरी पर आधारित एक इंटीरियर डिजाइन प्रैक्टिस चलाती हैं।

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