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Hindi News मनोरंजन बॉलीवुड पहले IIT, फिर 21 की उम्र में बन बैठे IAS, लेकिन गाने की चाहत में छोड़ी नौकरी और बन गए सुरों के सरताज

पहले IIT, फिर 21 की उम्र में बन बैठे IAS, लेकिन गाने की चाहत में छोड़ी नौकरी और बन गए सुरों के सरताज

JEE में AIR 6, पहले ही अटेंप्ट में UPSC परीक्षा क्रैक कर 21 की उम्र में IAS बनना कोई आम बात नहीं है। देश की दो सबसे कठिन परीक्षाओं में अगर कोई शानदार प्रदर्शन करे तो कहा जाता है कि उसकी किस्मत के ताले खुल गए हैं। ठीक ऐसा ही हुआ था कशिश मित्तर के साथ, लेकिन उन्होंने सब छोड़ने का फैसला क्यों किया? जानें।

kashish mittal- India TV Hindi Image Source : KASHISH MITTAL INSTAGRAM कशिश मित्तल।

भारत में UPSC परीक्षा को जीवन की सबसे बड़ी जीत माना जाता है। इसके लिए सालों की मेहनत और लगन की जरूरत पड़ती है। UPSC क्रैक करने वाले शख्स को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और जैसे ही छात्र इस परीक्षा को पास करता है उसके मन में बस एक ही ख्याल होता है कि अब तो करियर सेट है, लेकिन ये सब हासिल करने के बाद अगर कोई एक झटके में सब छोड़ दे तो हैरानी होती है। ठीक ऐसा ही एक वाकया हम आपके लिए लाए हैं। कशिश मित्तल की कहानी उस दुर्लभ समर्पण की मिसाल है, जहां सफलता की ऊंचाइयों को छूने के बाद भी किसी ने अपने दिल की आवाज को चुना और बिना किसी पछतावे के उस राह पर आगे बढ़ चला, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा।

दिल्ली की गलियों से सुरों की गलियों तक

कशिश मित्तल ने न सिर्फ UPSC परीक्षा पास की, बल्कि उससे हासिल हुई नौकरी को एक झटके में छोड़ आगे बढ़ने का भी मन बना लिए। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बीटेक, जेईई में ऑल इंडिया 6वीं रैंक और फिर 21 साल की उम्र में IAS अधिकारी बनना ये किसी के भी लिए सपनों से भरा जीवन होता। मित्तल ने इस सपने को जिया, निभाया भी, लेकिन वो सपना उनका नहीं था। उनका सपना कहीं और था तानपुरे की गूंज में, रियाज की तन्हाई में, राग यमन की महक में।

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बचपन से थी सिंगर बनने की चाहत

1989 में जालंधर में जन्मे कशिश मित्तल के घर में अनुशासन भी था और सुर भी। उनके पिता एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी थे और मां संगीता मित्तल ने उन्हें संगीत की ओर प्रेरित किया। सिर्फ आठ साल की उम्र में उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा शुरू की और ग्यारह की उम्र तक हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति देने लगे थे। कशिश कहते हैं, 'मेरी संगीत यात्रा तो आईएएस बनने की कल्पना से बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। आईआईटी और सिविल सेवा की तैयारी के दौरान भी संगीत मेरे भीतर था, चुपचाप, लेकिन मजबूत।' उनकी गायकी आगरा घराने की परंपरा में रची-बसी है, जिसे उन्होंने उस्ताद पंडित यशपाल से गुरु-शिष्य परंपरा में सीखा। आज वे ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के ए ग्रेड कलाकार हैं और ICCR द्वारा स्थापित कलाकार के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।

इन पदों पर किया काम

चंडीगढ़ के अतिरिक्त उपायुक्त, तवांग (अरुणाचल प्रदेश) के डीसी और नीति आयोग में शीर्ष पद, इन पदों पर कशिश ने काम किया। ऐसा कोई भी कहेगा कि मित्तल ने अपने पेशे में शिखर छू लिया था, लेकिन उनके भीतर का संगीतकार अब और समझौता नहीं करना चाहता था। 2019 में जब उनका तबादला अरुणाचल प्रदेश हुआ, उन्होंने आखिरकार नौ साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया। उनके मन में न कोई अफसोस था और न कोई शंका। आईएएस से रिटायरमेंट लेने के बाद, मित्तल ने तकनीकी क्षेत्र में कदम रखा और माइक्रोसॉफ्ट में प्रिंसिपल रिसर्च प्रोग्राम मैनेजर के रूप में पांच सालों तक नवाचार की दिशा में काम किया। दिशा एआई की स्थापना के साथ मार्च 2025 में उन्होंने एक नया अध्याय शुरू किया। यह स्टार्टअप उनकी तकनीकी समझ को सामाजिक प्रभाव और AI के साथ जोड़ता है।

वायरल हुआ था वीडियो

आज मित्तल सोशल मीडिया पर भी उतने ही सहज हैं जितने मंच पर। हाल ही में नुसरत फतेह अली खान का कालजयी गीत ‘उनके अंदाज-ए-करम’ उन्होंने जब दोस्तों के बीच बैठकर सहजता से गाया तो वह वीडियो वायरल हो गया, 2 मिलियन से अधिक व्यूज और हजारों दिलों को छूती टिप्पणियां इस पोस्ट पर देखने को मिलीं। इसके कैप्शन में लिखा था, 'वो भी अपने न हुए, दिल भी गया हाथों से।' कला और संस्कृति में उनके योगदान को कई सम्मानों से नवाजा गया है, पंजाब राज्य पुरस्कार, नाद श्री सम्मान, IIT दिल्ली का सरस्वती सम्मान और राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्तियां जैसे NTSE और CCRT फेलोशिप।

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