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Hindi News मनोरंजन बॉलीवुड 'शोले' पर भारी पड़ी थी ये फिल्म, देखने नंगे पांव थिएटर जाते थे दर्शक, स्क्रीन पर करते थे सिक्के-नोट की बारिश

'शोले' पर भारी पड़ी थी ये फिल्म, देखने नंगे पांव थिएटर जाते थे दर्शक, स्क्रीन पर करते थे सिक्के-नोट की बारिश

1975 में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन स्टारर ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जिसने ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिन्हें अब तक कोई नहीं तोड़ पाया है। इस साल जो भी फिल्में रिलीज हुईं, शोले के आगे धूल चाटती दिखीं। लेकिन, इसी बीच रिलीज हुई एक फिल्म ने इस क्लासिक कल्ट को जबरदस्त टक्कर दी थी।

Jai Santoshi maa- India TV Hindi Image Source : INSTAGRAM शोले पर भारी पड़ी थी 50 साल पहले आई ये फिल्म

1975 में रिलीज हुई 'शोले' हिंदी सिनेमा की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, हेमा मालिनी और जया बच्चन जैसे कलाकार नजर आए थे। ये फिल्म 1975 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से थी। इस दौरान जो भी फिल्में रिलीज हुईं, शोले के आगे कोई नहीं टिक पाई। लेकिन, इस बीच वो फिल्म रिलीज हुई, जिसने शोले को बॉक्स ऑफिस और सिनेमाघरों में जबरदस्त टक्कर दी। करीब 50 साल पहले रिलीज हुई ये फिल्म काफी कम बजट में बनी थी, लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर छप्परफाड़ कमाई की थी। हम यहां जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसका नाम है 'जय संतोषी मां'।

1975 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म 

इन दिनों मां दुर्गा को समर्पित नवरात्र का पर्व चल रहा है। इस मौके पर हम आपको संतोषी मां पर बनी इस फिल्म के बारे में बताते हैं। वैसे तो फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी कई फिल्में बनी हैं, जिनमें मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों का बखान किा गया है, लेकिन 1975 में रिलीज हुई 'जय संतोषी मां' को लेकर दर्शकों में ऐसा क्रेज देखने को मिला कि आज भी इसके चर्चे होते हैं। इस फिल्म में मां संतोषी और उनके भक्त के बीच के खूबसूरत और चमत्कारी रिश्तों को दिखाया गया है।

सिनेमाघरों में उमड़ी दर्शकों की भीड़

15 अगस्त 1975 को जैसे ही जय संतोषी मां रिलीज हुई, सिनेमाघर जगमग हो उठे। माता की गाथा देखने के लिए लोग परिवार सहित सिनेमाघर पहुंचे। इस फिल्म की उन दिनों इतनी चर्चा हुई कि इसके आगे शोले भी फीकी पड़ती नजर आने लगी। इस फिल्म को हिट कराने में इसके गानों का भी बहुत बड़ा हाथ था। 'मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की' बजते ही लोग भक्ति में डूब जाते थे। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था और इसका म्यूजिक सी. अर्जुन ने दिया था।

थिएटर में चप्पल उतारकर जाते थे लोग

माता की लीला और महिमा से सजी इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ थिएटर्स के बाहर इकट्ठी होती थी और लोग थिएटर में प्रवेश करने से पहले अपने चप्पल-जूते भी उतार देते थे। फिल्म शुरू होती थी तो हाथों में फूल और सिक्के-नोट लेकर बैठे रहते और जब फिल्म पूरी हो जाती तो हाथ में लिए फूल और सिक्के स्क्रीन की तरफ उछाल देते, मानो कोई कथा सुनने बैठे हों। अपनी कहानी के दम पर ये फिल्म साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई थी।

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