भारतीय सिनेमा में 1950 से 1990 तक एक ऐसा नाम था, जिसने नायिकाओं की परिभाषा ही बदल दी थी। दिलकश अदाएं, शानदार अभिनय और बेमिसाल खूबसूरती, इन सबके मेल से बनी थीं माला सिन्हा। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर चार दशकों तक राज किया। 'प्यासा', 'धूल का फूल', 'परवरिश', 'फिर सुबह होगी', 'नया ज़माना', 'बादशाह', जैसी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी क्लासिक माना जाता है। धर्मेंद्र, मनोज कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों के साथ उनकी जोड़ी खूब सराही गई। लेकिन हर सितारे की किस्मत हमेशा चमकती नहीं रहती। एक वक्त ऐसा भी आया, जब माला सिन्हा का नाम एक बड़े विवाद में फंस गया। एक ऐसा मोड़ जिसने उनकी छवि, करियर और निजी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
सफलता की ऊंचाईयों से फर्श पर आईं माला सिन्हा
1992 में पद्मश्री से सम्मानित एक्ट्रेस की जिंदगी में बुलंदी पर पहुंचने के बाद एक ऐसा मोड़ आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद एक्ट्रेस की खूब थू-थू हुई। माला सिन्हा की पर्सनल लाइफ भी उतनी ही दिलचस्प रही जितनी उनकी फिल्मों की कहानियां। उन्होंने नेपाली अभिनेता चिदंबर प्रसाद लोहानी से शादी की, वह भी तीन बार, पहले कोर्ट मैरिज, फिर चर्च में ईसाई रीति से और अंत में हिंदू परंपरा के अनुसार। हर चरण की शादी के पीछे सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाएं थीं, जिन्हें उन्होंने सम्मानपूर्वक निभाया। उनकी बेटी प्रतिभा सिन्हा भी फिल्मों में आईं, लेकिन वह अपनी मां जैसी सफलता हासिल नहीं कर पाईं। धीरे-धीरे माला सिन्हा ने इंडस्ट्री से दूरी बना ली। वह इवेंट्स में नहीं दिखती थीं, सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब हो गई थीं।
इनकम टैक्स रेड और एक सनसनीखेज खुलासा
1964 में माला सिन्हा के घर पर इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा, लेकिन जो मिला उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। बाथरूम की दीवारों के पीछे से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं, जिनकी कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई और उस दौर में यह रकम असाधारण मानी जाती थी। यह मामला कोर्ट तक पहुंचा और वहां जो बयान सामने आया, उसने पूरे मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार माला सिन्हा ने दावा किया कि यह सारा पैसा उन्होंने जिस्मफरोशी से कमाया है। इस बयान ने न सिर्फ अदालत को चौंका दिया, बल्कि देश भर में हलचल मचा दी।
पर्दे के पीछे की सच्चाई?
बाद में एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह के तहत उन्होंने यह कबूलनामा किया था, ताकि किसी कठोर सजा से बचा जा सके। उनके वकीलों ने यह राय दी थी कि इस बयान से वे खुद को टैक्स चोरी या अवैध संपत्ति के आरोपों से बचा सकती हैं, लेकिन यह रणनीति उल्टी पड़ गई। इस बयान के बाद इंडस्ट्री में उनकी छवि पूरी तरह धूमिल हुई। निर्माता-निर्देशकों ने उनसे किनारा कर लिया, फिल्मों के दरवाजे बंद हो गए और उन्हें बायकॉट कर दिया गया। एक दौर की सबसे बड़ी स्टार, जो कभी परदे की शान हुआ करती थीं, अब गुमनामी की धुंध में खो गई थीं।
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