Border 2 Review: कमजोर कहानी, सूखी देशभक्ति से सराबोर बॉर्डर-2, सनी देओल की एक्टिंग ने फूंकी जान, कुछ भी नहीं है नया

बॉर्डर 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। लेकिन फिल्म के डायरेक्शन ने दर्शकों को निराश किया है। हालांकि सनी देओल की एक्टिंग ने इसमें जान फूंकी है।

Photo: IMAGE SOURCE-IMDB बॉर्डर 2 रिव्यू
मूवी रिव्यू:: Border 2 Review
Critics Rating: 2 / 5
पर्दे पर: 23 Jan 2026
कलाकार: सनी देओल
डायरेक्टर: Anurag Singh
शैली: War Action Drama
संगीत: Anu Malik

इस साल की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म बॉर्डर 2 का इंतजार खत्म हो गया है और एक बार फिर सनी देओल की आवाज पर्दे पर गूंज रही है। 28 साल पुरानी बॉर्डर का सीक्वल फिल्म बॉर्डर 2 के मेकर्स ने निराश किया है। कमजोर कहानी और सूखी देशभक्ति से फिल्म सराबोर है। लेकिन सनी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से इसमें जान फूंकी है। 3 घंटे और 17 मिनट की ये फिल्म कहानी के पक्ष पर आपको निराश करती है लेकिन वॉर और फाइट सीन्स इसमें जान फूंकते हैं। साथ ही मोना सिंह, वरुण धवन के साथ परमवीर चीमा अपनी मासूमियत से कहानी में भाव जगाते हैं। 

अपने ट्रैक से भटक जाती है कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है निर्मलजीत सिंह सिखों (दिलजीत दोसांझ), मेजर होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन) और लेफ्टिनेंट कमांडर जोसेफ नरोन्हा (अहान शेट्टी) की दोस्ती से। ये तीनों साल 1969 में नेशनल वॉर अकेडमी में ट्रेनिंग लेते हैं और यहां के हीरो हैं लेफ्टिनेंट फतेह सिंह केलार (सनी देओल)। यहां तीनों की दोस्ती होती है और कहानी उनकी निजी जिंदगी में चली जाती है। जहां तीनों की शादी, परिवार बच्चे और उनके इर्द-गिर्द की भावनाओं पर केंद्रित होती है। कैसे एक मां की ममता को दबाकर भारत मां के दामन की सुरक्षा के लिए सरहद पर जाने की अनुमति देती है। पत्नी अपने सुहाग पर भारत मां की सरहदों की रक्षा के लिए गर्व करती है। फिल्म का पहला हाफ पारिवारिक भावनाओं को दिखाता है और देश के सैनिकों और उनके परिवार के लोगों के त्याग को दिखाता है। पहला काफी भावुक करता है और आपको बॉर्डर की तरह ही इमोशनल कर देता है। लेकिन फिल्म जब अपने सेकेंड हाफ में आती है तो इसमें पाकिस्तान के साथ जंग की तरफ मुड़ती है। पाकिस्तान के सैनिक नापाक इरादे लिए भारत की सीमाओं पर आक्रमण की योजना बनाते हैं। लेकिन भारत पर कब्जा करना इतना आसान नहीं है। दिलजीत दोसांझ ने एयरफोर्स की कमान संभाली है और हवा में दुश्मन को धूल चटाते हैं। वरुण धवन बॉर्डर पर सैनिकों का नेतृत्व करते हैं और पाकिस्तानी सैनिकों की तबाही सुनिश्चित करते हैं। वहीं अहान शेट्टी ने नेवी ऑफिसर के रोल में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। सनी देओल की चिर परिचित दहाड़ सुनाई देती है लेकिन बॉर्डर फिल्म के चार्म के सामने फीका लगता है। 

क्या हैं कहानी की कमजोरियां

फिल्म की कहानी और डॉयलॉग रिपीट होने लगते हैं और एक सीन तो ऐसा भी है जो बिल्कुल गले से नहीं उतरता। जब पाकिस्तान भारतीय सेना में घुसकर अपना कब्जा ठोक देता है और भारतीय सैनिकों को मार गिराते हैं। तब सनी देओल पाकिस्तानी सेना को अपनी सरजमीं से उखाड़ फेंकने की योजना बनाते हैं। एक बटालियन तैयार की जाती है और सनी देओल इसे लीड करते हुए हमले की प्लानिंग करते हैं। जब भारतीय सैनिक पाकिस्तानी सेना के कैंप में घुसकर मारते हैं और जोरदार लड़ाई के बाद आखिरकार दुश्मन सेना का कमांडर सनी देओल के हाथ लग जाता है। तभी वो बोलता है कि तुम्हें भी वैसे ही मारेंगे जैसे तुम्हारे बेटे को मारा है। इस सीन के चंद मिनटों बाद ही सनी देओल अपने घर जाते हैं और बेटे की चिट्ठी आती है जो खुद भी एक सैनिक है और सरजमीन की सुरक्षा के लिए सीमा पर डंटा है। इस चिट्ठी को सनी अपनी पत्नी को पढ़कर सुनाते हैं और उसके चंद मिनट बाद ही बेटे की शहादत की खबर आ जाती है। ये कहानी का ट्रैक और उसकी भारी कमजोरी बताता है। 

सनी देओल की एक्टिंग ने फूंकी जान

वहीं कहानी की एक्टिंग की बात करें तो सनी देओल ने अपनी एक्टिंग से जान फूंकी है। वरुण धवन ने अपने फैन्स को एक बार फिर से निराश किया है। वे कई रेसिंग सीन्स में बिल्कुल वैसे ही भागते नजर आते हैं जैसे उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर की स्कूल रेस पूरी की थी। अहान शेट्टी कहीं हद तक अपने किरदार को साधे नजर आते हैं। दिलजीत दोसांझ भी एक कमाल के एक्टर हैं लेकिन इस फिल्म में कोई खास असर नहीं छोड़ पाए हैं। परमवीर चीमा ने अपनी एक्टिंग से कई सीन्स में जान फूंकी है और एक युद्ध के समय का सीन ऐसा है जो लोगों को भावुक कर देता है। फिल्म में मोना सिंह ने भी कमाल का किरदार निभाय है और बेटे की शहादत पर उनकी एक्टिंग दर्शकों की आंखें नम कर देती है। सोनम बाजवा का किरदार काफी छोटा रहा है लेकिन उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। 

केवल 1 गाना ही छोड़ पाया असर

फिल्म का म्यूजिक भी कहानी पर कोई खास असर नहीं डालता है। केवल एक गाना है जो पहले से ही सुपरहिट रहा है। संदेशे आते हैं ऐसा लगता है जैसे पहली फिल्म की तर्ज पर ही इसे जबरन ठूंसा गया है। इसके अलावा कोई भी गाना दर्शकों के जहन में नहीं बैठता और न ही कहानी के साथ कहीं गहरा असर छोड़ पाता है। इसके साथ ही फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसका डायरेक्शन है। 

फिल्म की चंद अच्छी बातें

3 घंटे और 17 मिनट लंबी फिल्म बॉर्डर 2 के लिए दर्शकों को करीब 4 घंटे सिनेमाघरों में गुजारने पड़ते हैं जिनमें करीब 35 मिनट के विज्ञापन भी शामिल हैं। फिल्म के पहले हाफ में जब दिलजीत दोसांझ, वरुण धवन और अहान शेट्टी की दोस्ती और ट्रेंनिंग के दिनों की कहानी दिखती है तो काफी भावनात्मक लगती है और दर्शकों को बांध देती है। साथ ही फिल्म का सेकेंड हाफ अपने वॉर के समय के कुछ ऐसे दृश्य दिखाता है जो जोश भर देता है और सूखी देशभक्ति को भी जगाता है।