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Hindi News मनोरंजन ओटीटी 2018 में आई साइकोलॉजिकल थ्रिलर, शुरू से लेकर अंत तक उलझा रहेगा दिमाग, क्लाइमैक्स देख लगेगा 440 बोल्ट का झटका

2018 में आई साइकोलॉजिकल थ्रिलर, शुरू से लेकर अंत तक उलझा रहेगा दिमाग, क्लाइमैक्स देख लगेगा 440 बोल्ट का झटका

सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों का एक बड़ा दर्शक वर्ग है और भारत में भी इस तरह की फिल्में खूब पसंद की जाती हैं। अगर आप भी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों के फैन हैं, तो आपको एक ऐसी फिल्म के बारे में बताते हैं, जिसमें सस्पेंस और थ्रिल कूट-कूटकर भरा है।

ratsasan- India TV Hindi Image Source : SCREEN GRAB YOUTUBE SAREGAMA TAMIL 7 साल पहले आई थी ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर

सस्पेंस और रोमांच से भरी फिल्मों के दर्शक पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं और यही वजह है कि इस तरह की फिल्में भी अब काफी बन रही हैं। ओटीटी पर कई सस्पेंस-थ्रिलर फिल्में हैं, जिनकी कहानी इतनी शानदार है कि देखते ही दिल-दिमाग बस इसी में अटका रह जाता है। अगर आप भी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों के फैन हैं तो आज हम आपको एक ऐसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर के बारे में बताते हैं, जिसका एक-एक सीन सस्पेंस और रोमांच से लबरेज है और क्लाइमैक्स तो इतना धांसू और अनएक्सपेक्टेड है कि इसे देखकर 440 बोल्ट का झटका लगता है। हम बात कर रहे हैं 2018 में रिलीज हुई तमिल फिल्म 'रत्सासन' की। 

2018 में रिलीज हुई थी फिल्म

ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर साल 2018 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी स्कूल की लड़कियों की हत्याओं और इसकी जांच पर आधारित है, जिसकी कड़ी एक डरावनी गुड़िया है। रत्सासन की सफलता देखने के बाद इसके कई रीमेक बने, लेकिन 7 साल बाद भी मूल फिल्म का कोई जोड़ नहीं है और इस बात की पुष्टि इसकी IMDb रेटिंग भी करती है। इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर को आईएमडीबी पर 8.3 रेटिंग मिली है और अगर आप ये फिल्म देखना चाहते हैं तो ये ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर उपलब्ध है।

रत्सासन की कास्ट

इस फिल्म में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे पॉपुलर एक्टर्स में से एक विष्णु विशाल लीड रोल में हैं। विष्णु विशाल इन दिनों अपनी नई फिल्म 'आर्यन' को लेकर सुर्खियों में हैं, लेकिन उन्हें असली सफलता और पहचान रत्सासन ने ही दिलाई थी। उनके साथ इस फिल्म में अमाला पॉल, अम्मू अभिरामी, घिबरन और काली वेंकट जैसे कलाकार भी अहम भूमिका में दिखाई दिए थे।

क्या है रत्सासन की कहानी

विष्णु विशाल स्टारर इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर की कहानी दो बुजुर्गों के साथ शुरू होती है, जिन्हें एक 15 साल की लड़की की लाश मिलती है, जिसका नाम संयुक्ता है। इसी बीच एंट्री होती है मनोरोगियों पर फिल्म बनाने वाले महत्वाकांक्षी फिल्म मेकर अरुण की जो अपने परिवार के दवाब के चलते पुलिस में सब इंस्पेक्टर बन जाता है। अरुण अपनी बहन कोकिला, डॉस और भांजी अम्मू के साथ रहने लगता है। इसी बीच कहानी में अमुधा नाम की लड़की की एंट्री होती है, जो गायब हो जाती है। अरुण इस मामले की जांच करता है और संयुक्ता केस से इसकी कड़ी जुड़ती है। कहानी में आगे जाकर एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिलता है, जो बेहद डरावना और दिल को दहला देने वाला है।

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