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Hindi News मनोरंजन ओटीटी 2 घंटे 5 मिनट की इस मिस्ट्री थ्रिलर के आगे ‘दृश्यम’ का सस्पेंस भी फीका, पलक झपकाने की नहीं मिलेगी मोहलत, IMDb पर है तगड़ी 8 रेटिंग

2 घंटे 5 मिनट की इस मिस्ट्री थ्रिलर के आगे ‘दृश्यम’ का सस्पेंस भी फीका, पलक झपकाने की नहीं मिलेगी मोहलत, IMDb पर है तगड़ी 8 रेटिंग

बीते साल के आखिरी दिन ओटीटी पर एक धमाकेदार फिल्म रिलीज हुई। सस्पेंस और थ्रिलर से भरी ये फिल्म 'दृश्यम' को भी पीछे छोड़ देती है। ये कहानी आखिर तक बांधे रखती हैं और इसे IMDb पर 8 रेटिंग भी मिली है, जो साबित करती है कि ये फिल्म शानदार है।

Eko- India TV Hindi Image Source : STILL FROM FILM इको का सीन।

नए साल के आसपास जब OTT प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों और वेब सीरीज की बाढ़ आई हुई थी तब दर्शकों को लगा था कि शायद सब कुछ अनुमानित ही होगा, बड़े बजट, बड़े सितारे और तेज-तर्रार एक्शन, लेकिन इसी भीड़ में मलयालम सिनेमा से आई एक शांत, रहस्यमयी फिल्म ने चुपचाप सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ‘इको’ 31 दिसंबर 2025 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई, आज एक सरप्राइज हिट के तौर पर उभर चुकी है। सिर्फ 5 करोड़ रुपये के छोटे से बजट में बनी इस मिस्ट्री थ्रिलर ने अब तक करीब 46 करोड़ रुपये की कमाई कर ली थी। इतना ही नहीं फिल्म का नेटफ्लिक्स पर दबदबा कायम है और टॉप 10 लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है और IMDb पर इसे शानदार 8 रेटिंग मिली है। यह सफलता इस बात का सबूत है कि दमदार कहानी और माहौल, बड़े सितारों से कहीं ज्यादा असरदार हो सकते हैं।

इको की कहानी और टीम

‘इको’ का निर्देशन दिंजिथ अय्याथन ने किया है, जबकि इसकी कहानी और सिनेमैटोग्राफी की ज़िम्मेदारी बाहुल रमेश ने संभाली है। फिल्म को MRK जयराम और विपिन अग्निहोत्री ने आराध्या स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है, यह इस प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। फिल्म में संदीप प्रदीप, विनीत, नारायण, बिनु पप्पू और बियाना मोमिन अहम भूमिकाओं में नज़र आते हैं। खास बात यह है कि ‘इको’, बाहुल रमेश की चर्चित एनिमल ट्रिलॉजी का तीसरा और आखिरी चैप्टर है। इससे पहले इस ट्रिलॉजी में किष्किंधा कांडम (2024) और केरल क्राइम फाइल्स 2 (2025) आ चुकी हैं, जिन्हें भी दर्शकों और क्रिटिक्स से खूब सराहना मिली थी।

कहानी का माहौल

फिल्म की कहानी केरल के कटुकुन्नू इलाके की धुंध में लिपटी पहाड़ियों में बसती है। यहां एक बूढ़ी महिला मलाथी चेट्टाथी (बियाना मोमिन) अपने केयरटेकर पियस (संदीप प्रदीप) के साथ रहती है। उनके साथ कई खतरनाक कुत्ते भी हैं, जो इस कहानी के माहौल को और भयावह बना देते हैं। मलाथी का पति कुरियाचन (सौरभ सचदेवा), जो कभी एक कुख्यात डॉग ब्रीडर था, सालों से लापता है। उसकी तलाश पुलिस, माओवादी और उसके पुराने दुश्मन सभी कर रहे हैं। जैसे-जैसे अजनबी मेहमान उस झोपड़ी में दस्तक देने लगते हैं, वैसे-वैसे अतीत के दबे हुए राज़ सामने आने लगते हैं। कहानी धीरे-धीरे परतें खोलती है और हर मोड़ पर चौंकाने वाले ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं।

क्यों है ‘इको’ खास

जहां धुरंधर, छावा और कांतारा चैप्टर 1 जैसी फिल्में बड़े पैमाने पर एक्शन और ड्रामा पर निर्भर करती हैं, वहीं ‘इको’ बिल्कुल उल्टा रास्ता अपनाती है। यह फिल्म शोर नहीं मचाती, बल्कि मनोवैज्ञानिक तनाव, सन्नाटे और रहस्य के सहारे डर पैदा करती है। इसकी धीमी रफ्तार, सटीक लेखन और घना माहौल दर्शकों को अंदर तक खींच लेता है। 

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