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Hindi News मनोरंजन टीवी कंप्यूटर से भी तेज दिमाग वाले चाचा, चुटकी बजाकर करते हर मुश्किल का निपटारा, बच्चे-बुजुर्ग सब देखते थे तगड़ी रेटिंग वाला सस्पेंस-कॉमेडी शो

कंप्यूटर से भी तेज दिमाग वाले चाचा, चुटकी बजाकर करते हर मुश्किल का निपटारा, बच्चे-बुजुर्ग सब देखते थे तगड़ी रेटिंग वाला सस्पेंस-कॉमेडी शो

टीवी पर एक शानदार शो आया करता था, जिसमें कहानी एक तेज दिमाग वाले चाचा और उसके लंबे-चौड़े जोड़ीदार के इर्द-गिर्द घूमती थी। इस कहानी को बच्चे और बुजुर्ग दोनों ही देखना पसंद करते थे।

chacha chaudhary - India TV Hindi Image Source : STILL FROM CHACHA CHAUDHARY शो से लिया गया एक सीन।

90s के बच्चों की दुनिया सिर्फ गिल्ली-डंडा और होमवर्क तक सीमित नहीं थी। जैसे ही घड़ी टीवी टाइम का इशारा करती, पूरा घर रिमोट के आसपास जमा हो जाता। उस दौर में कार्टून तो हिट थे ही, लेकिन कुछ लाइव-एक्शन चिल्ड्रन शोज ने भी बच्चों के दिलों पर खास जगह बना ली थी। इन्हीं में से एक था ‘चाचा चौधरी’, एक ऐसा शो जिसने एंटरटेनमेंट के साथ दिमाग चलाने की कला भी सिखाई। 2000 के दशक की शुरुआत में आया यह शो बच्चों के लिए बिल्कुल अलग अनुभव लेकर आया। यहां सुपरपावर नहीं, बल्कि तेज दिमाग असली ताकत था। कम किरदार, सीधी कहानी और हर एपिसोड में नई समस्या, सस्पेंस और कॉमेडी के साथ उसका सॉल्यूशन, यही इसकी खासियत थी।

कॉमिक्स से टीवी तक का सफर

कॉमिक्स के पन्नों से निकलकर यह किरदार पहली बार छोटे पर्दे पर इतने जीवंत अंदाज में नजर आया कि बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई इसका फैन बन गया। इस आइकॉनिक किरदार को जन्म दिया मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा ने। उन्होंने ‘चाचा चौधरी’ और साबू को पहले कॉमिक्स में उतारा, जहां ये किरदार घर-घर में लोकप्रिय हो गए। 13 मई 2002 को चाचा चौधरी का प्रसारण सहारा वन पर शुरू हुआ। करीब एक साल तक यह शो बच्चों के बीच जबरदस्त हिट रहा और 2003 तक टीवी पर छाया रहा।

दमदार कलाकार, यादगार किरदार

इस शो में चाचा चौधरी का रोल निभाया था शानदार अभिनेता रघुबीर यादव ने, जिन्होंने अपने सहज अभिनय से इस किरदार को जीवंत बना दिया। साबू के किरदार में प्रवीण कुमार नजर आए। इसके अलावा माधुरी संजीव, जाहिदा परवीन और कवि कुमार आजाद जैसे कलाकारों ने भी शो को मजबूत बनाया।

क्या था शो का असली जादू?

यह एक मल्टी-कैमरा लाइव-एक्शन ड्रामा था, जिसके दो सीजन और कुल 415 एपिसोड आए। हर कहानी में एक नई समस्या होती, जिसे चाचा चौधरी अपनी तेज बुद्धि से सुलझाते। वहीं, जब जरूरत पड़ती तो साबू अपनी ताकत से विलेन को सबक सिखाता। इस शो ने बच्चों को यह सिखाया कि हर मुश्किल का हल ताकत से नहीं, बल्कि समझदारी से निकाला जा सकता है। इस टीवी शो को IMDb पर 7.8 की रेटिंग मिली है। आज भले ही टीवी पर सैकड़ों नए शोज आ गए हों, लेकिन ‘चाचा चौधरी’ का नाम सुनते ही 90s और 2000s के बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि बचपन की खूबसूरत याद है।

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