लोकप्रिय सिटकॉम 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की सफलता का श्रेय न केवल इसके मुख्य किरदारों को जाता है, बल्कि उन साइड किरदारों को भी जाता है जिन्होंने अपनी छोटी मगर प्रभावशाली भूमिकाओं से दर्शकों को खूब गुदगुदाया है। इसी फेहरिस्त में एक नाम शामिल है अभिनेता निलेश भट्ट का। निलेश ने इस शो में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए एक-दो नहीं, बल्कि कई अलग-अलग रूपों में फैंस का मनोरंजन किया है। उनकी सहज एक्टिंग ने उन्हें शो के वफादार दर्शकों के बीच एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया है।
एक कलाकार और 20 से अधिक भूमिकाएं
निलेश भट्ट की 'तारक मेहता...' में यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने इस शो में अब तक 20 से ज्यादा अलग-अलग चरित्र निभाए हैं। दर्शकों ने उन्हें कभी नशे में धुत ड्राइवर के रूप में देखा, तो कभी वे आत्माराम तुकाराम भिड़े के रिश्तेदार के रूप में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने सुंदरलाल के दोस्त, राजू भाई (खाऊ गली वाले), एक कैदी और 'इंसान सिंह' जैसे कई मजेदार रोल प्ले किए। खोटे क्लासेस के एपिसोड्स से लेकर चंदू चिल्लर, चोर, हरियाली होटल के मैनेजर और गुंडे तक, निलेश ने हर किरदार में खुद को बखूबी ढाला।
'बाबू चिपके' ने दिलाई घर-घर में पहचान
निलेश भट्ट के करियर का सबसे यादगार मोड़ तब आया जब उन्हें 'बाबू चिपके' नाम के कारपेंटर का रोल मिला। इस एक किरदार ने उन्हें इतनी लोकप्रियता और शोहरत दिलाई कि लोग उन्हें असली नाम के बजाय 'बाबू चिपके' के नाम से ही पुकारने लगे। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद साझा किया था कि इस रोल के हिट होने के बाद शो के मेकर्स भी उन्हें अक्सर इसी भूमिका के लिए बुलाने लगे थे। यह किरदार आज भी फैंस के बीच काफी चर्चित है।
सिनेमा और टेलीविजन का लंबा अनुभव
सिर्फ 'तारक मेहता...' ही नहीं, निलेश भट्ट ने बड़े पर्दे पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने अक्षय कुमार की 'ओह माय गॉड' और अभिषेक बच्चन की 'ऑल इज वेल' जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया है। उन्होंने गोविंदा के साथ फिल्म 'रन भोला रन' भी साइन की थी, हालांकि वह फिल्म किन्हीं कारणों से रिलीज नहीं हो पाई। इसके अलावा, उन्होंने 'क्राइम पेट्रोल' और 'सावधान इंडिया' जैसे गंभीर क्राइम शोज में भी अपनी अदाकारी का हुनर दिखाया है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले निलेश भट्ट का जीवन काफी अलग था। उन्होंने शुरुआत में अपनी आजीविका चलाने के लिए एक कपड़े की दुकान खोली थी। लेकिन अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें गुजराती थिएटर की ओर खींच लिया। उन्होंने थिएटर में न केवल अभिनय किया बल्कि बैकस्टेज वर्कर के तौर पर भी कड़ी मेहनत की। उनकी किस्मत तब बदली जब 'तारक मेहता...' के लेखक जितेंद्र परमार ने उन्हें एक नाटक में गुंडे का रोल दिलाया। दिलचस्प बात यह है कि उस नाटक में शो के मुख्य अभिनेता दिलीप जोशी लीड रोल में थे। वहीं से उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उनके लिए टेलीविजन के दरवाजे खुल गए।
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