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Hindi News Explainers Explainer: बांग्लादेश में शैडो कैबिनेट बनाने की चर्चा, क्या होता है यह और कैसे करता है काम? जानें सबकुछ

Explainer: बांग्लादेश में शैडो कैबिनेट बनाने की चर्चा, क्या होता है यह और कैसे करता है काम? जानें सबकुछ

बांग्लादेश की राजनीति में शैडो कैबिनेट को लेकर मौजूदा वक्त में काफी चर्चा हो रही है। हालिया आम चुनावों और बीएनपी नेता तारिक रहमान की जीत के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। आइए जानते हैं क्या होता है शैडो कैबिनेट, कैसे करता है काम?

Tarique Rahman- India TV Hindi Image Source : AP तारिक रहमान

Explainer: बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के तारिक रहमान की ताजपोशी के साथ ही शैडो कैबिनेट की चर्चा भी काफी तेज है। हाल में संपन्न आम चुनावों में तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर बंपर जनादेश हासिल किया है। वहीं जमात-ए-इस्लामी ने  68 सीटें हासिल की हैं। 1991 से यहां आम चुनावों में लगातार महिलाएं हीं सत्ता के केंद्र में रही हैं। पहली बार कोई पुरुष प्रधानमंत्री का पद संभाल रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों की अनिश्चितता के बाद हुए आम चुनावों के बाद अब बांग्लादेश में शैडो कैबिनेट की चर्चा तेज हो गई है। हम इस लेख में जानने की कोशिश करेंगे कि शैडो कैबिनेट क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

शैडो कैबिनेट क्या है?

शैडो कैबिनेट की बात सबसे पहले इंग्लैंड में उठी थी। ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर पार्लियामेंट्री सिस्टम में इसकी चर्चा शुरू हुई। फिर इसे लागू किया गया। दरअसल, वहां की राजनीति में हर बार चुनाव के बाद सरकार बनाने वाली पार्टी और विपक्ष दोनों ही मिलकर अपनी टीम बनाते हैं। इस टीम को शैडो कैबिनेट कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो जैसे सरकार में अलग-अलग विभागों में मंत्री होते हैं ठीक उसी तरह से विपक्ष भी अपने लोगों को उन विभागों के लिए नियुक्त करता है। ये लोग संबंधित विभागों के कामकाज पर नजर रखते हैं। सदन में सवाल उठाते हैं और जहां जरूरी हो वहां सुझा भी देते हैं।

मान लीजिए अगर सरकार का किसी विभाग का कोई मंत्री कुछ नई नीति लाता है तो शैडो कैबिनेट में संबंधित विभाग का जिम्मेदार शख्स यह बताता है कि वह नीति ठीक है या नहीं। शैडो कैबिनेट में केवल विरोध तक ही सीमित नहीं रहा जाता है बल्कि अगर सरकार की नीतियों में खामियां पाई जाती हैं तो वह सुझाव भी देते हैं। कुल मिलाकर कहें तो शैडो कैबिनेट के रूप में विपक्ष जनता के सामने गवर्मेंट इन वेटिंग का विकल्प भी पेश करता है।

शैडो कैबिनेट कैसे काम करता है?

  1. हर शैडो मंत्री अपने आवंटित विभाग की बारीकियों पर नजर रखता है। यदि असली रक्षा मंत्री कोई फैसला लेता है, तो 'शैडो रक्षा मंत्री' उस फैसले की कमियों और खूबियों का विश्लेषण करता है।
  2. संसद की कार्यवाही के दौरान, शैडो मंत्री अपने संबंधित विभाग के सरकारी मंत्री से तीखे सवाल पूछते हैं और उन्हें जवाबदेह ठहराते हैं।
  3. शैडो मंत्री इनका काम सिर्फ आलोचना करना नहीं है। शैडो कैबिनेट देश को यह बताती है कि अगर हम सत्ता में होते, तो इस समस्या का समाधान इस तरह करते। यह जनता के सामने एक वैकल्पिक योजना पेश करता है।
  4. दरअसल इसे भविष्य की तैयारी के तौर पर भी देखा जाता है। अगर भविष्य में सरकार गिर जाती है या अगला चुनाव विपक्ष जीत जाता है, तो ये शैडो मंत्री पहले से ही अपने विभागों के कामकाज से वाकिफ होते हैं और तुरंत कार्यभार संभालने के लिए तैयार रहते हैं।

बांग्लादेश में शैडो कैबिनेट की कितनी गुंजाइश?

तारिक रहमान की अगुवाई वाली नई सरकार पर अंकुश लगाने और उसे जवाबदेह ठहराने के लिए विपक्षा दल (जमात-ए-इस्लामी और अन्य छोटे दल) इस मॉडल को अपनाने की बात कर रहे हैं। इन नेताओं का मानना है कि राजनीति में 'इनोवेशन' की जरूरत है ताकि सरकार के हर विभाग की नीतियों की एक्सपर्ट लेवल पर आलोचना की जा सके।

वर्तमान में बांग्लादेशी संसद में हर मंत्रालय के लिए एक 'स्टैंडिंग कमेटी'होती है। ये समितियां एक तरह से शैडो का ही काम करती हैं, लेकिन शैडो कैबिनेट इससे एक कदम आगे है जहाँ विपक्षी नेता सीधे विभागीय मंत्रियों को चुनौती देते हैं।

बांग्लादेश में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरा अविश्वास रहा है। 'शैडो कैबिनेट' के सफल होने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच न्यूनतम संवाद और सहयोग जरूरी होता है, जो वहां अक्सर कम दिखता है। भारत की तरह ही बांग्लादेश में भी 'शैडो कैबिनेट' को कोई आधिकारिक या संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। यह पूरी तरह से विपक्षी दल की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।