Explainer: सिर्फ 40 लोगों के साथ कैसे किया रियाद पर कब्जा? किंग अब्दुलअजीज ने ऐसे बनाया था सऊदी अरब
किंग अब्दुलअजीज ने 1902 में सिर्फ 40 लोगों के साथ रियाद पर कब्जा किया और 1932 में सऊदी अरब का राजतंत्र स्थापित किया। अब्दुलअजीज का ख्वाब सऊदी अरब आज दुनिया की प्रमुख शक्ति बन चुका है।

सऊदी अरब को आज दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर मुल्कों में गिना जाता है। इस मुल्क की तकदीर आज से करीब एक सदी पहले अब्दुलअजीज बिन अब्दुर्रहमान अल सऊद नाम के शख्स ने लिखी थी। अब्दुलअजीज बिन अब्दुर्रहमान अल सऊद उर्फ इब्न सऊद ही वह शख्स हैं जिन्होंने सऊदी अरब के जन्म की तरफ पहला कदम बढ़ाते हुए 1902 में सिर्फ 40 साथियों के साथ रियाद पर कब्जा किया था। फिर 30 साल की मेहनत के बाद, 23 सितंबर 1932 को उन्होंने पूरे इलाके को एकजुट कर सऊदी अरब का राजतंत्र घोषित किया। यह सिर्फ एक देश की स्थापना नहीं थी, बल्कि एक नई ताकत का उदय था, जिसने दुनिया की अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म को हमेशा के लिए बदल दिया।
15 जनवरी 1902 को रियाद पहुंचे थे अब्दुलअजीज
सऊद परिवार की असल कहानी 18वीं सदी से शुरू होती है, जब उन्होंने पहली सऊदी रियासत बनाई। लेकिन 1891 में, दुश्मन रशीदी कबीले ने रियाद पर हमला कर सऊदी परिवार को निर्वासित कर दिया। अब्दुलअजीज, जो तब सिर्फ 15 साल के थे, अपने परिवार के साथ कुवैत चले गए। वहां उन्होंने कुवैत के शासक मुबारक अल-सबाह से मदद मांगी। 1901 में, 24 साल की उम्र में अब्दुलअजीज ने कसम खाई कि कुछ भी हो जाए, रियाद को वापस लेकर ही रहेंगे। उनके पास न तो बड़ी फौज थी, न हथियार। बस 50-60 साथियों के साथ ऊंटों पर सवार होकर वह रियाद की तरफ निकल पड़े। रास्ते में कई साथी थककर लौट गए, लेकिन 15 जनवरी 1902 की रात को वह 40 लोगों के साथ रियाद पहुंचने में कामयाब हो गए।
कुछ मिनट की जंग में जीत लिया मस्मक का किला
15 जनवरी 1902 की उस रात ने अरब प्रायद्वीप का इतिहास बदलकर रख दिया। रियाद के मस्मक किले पर उस जमाने में रशीदी गवर्नर अजलान का कब्जा था। अब्दुलअजीज ने किले पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़े। वह और उनके साथी ताड़ के झुके पेड़ों पर चढ़कर किले की दीवार फांद गए। अंदर घुसने के बाद उन्होंने गवर्नर अजलान को नमाज के बाद मार गिराया। इस तरह कुछ मिनट की लड़ाई के बाद ही किला अब्दुलअजीज के कब्जे में था। अजलान को मारने के बाद अब्दुलअजीज ने उसका सिर रियाद के लोगों के सामने फेंक दिया। शहर के लोग सऊद परिवार के पुराने समर्थक थे इसलिए उन्होंने भी खुशी-खुशी उनका साथ दिया। इस छोटी-सी जंग के बाद तीसरी सऊदी रियासत का जन्म हो गया।
जब खेती-बाड़ी छोड़कर जिहाद पर निकले लोग
रियाद तो मिल गया लेकिन पूरे अरब प्रायद्वीप में तमाम कबीले थे। नेज्द, हिजाज, अल-हसा और भी न जाने कितने। इनमें से भी अधिकांश सऊद परिवार के दुश्मन थे। अब्दुलअजीज ने वाहाबी विचारधारा को हथियार बनाया, जो सख्त इस्लाम पर जोर देती थी। उन्होंने इखवान नाम की फौज बनाई। बेदुईन कबीले के लोग खेती-बाड़ी छोड़कर जिहाद पर निकल गए। 1913 में उन्होंने अल-हसा पर कब्जा किया, और 1922 तक नेज्द पर पूरा कंट्रोल कर लिया। सबसे बड़ी जंग 1924-25 में हुई, जब उन्होंने हिजाज पर हमला किया। हिजाज में मक्का-मदीना जैसे पवित्र शहर थे, जहां हाशमी शरीफ हुसैन का राज था। ब्रिटेन ने हुसैन को समर्थन दिया था, लेकिन अब्दुलअजीज की फौज ने उन्हें हरा दिया।
23 सितंबर 1932 को हुआ सऊदी अरब का जन्म
मक्का पर कब्जे के बाद अब्दुलअजीज सुल्तान बने। उन्होंने इसके बाद शादियों से कबीले जोड़े। अब्दुलअजीज ने 22 शादियां कीं और उनके 100 से ज्यादा बच्चे हुए। 1927 में हिजाज और नेग्ड को जोड़ा, लेकिन 1929 में इखवान की बगावत ने चुनौती दी। सबिला की जंग में इखवान को भी कुचल दिया गया। तमाम जंगों के बाद 18 सितंबर 1932 को फरमान जारी हुआ, और 23 सितंबर को प्रिंस फैसल ने मक्का के हमीदिया महल से घोषणा की कि अब यह 'सऊदी अरब का राजतंत्र' है। इस राजतंत्र की राजधानी रियाद बनी, भाषा अरबी थी और संविधान कुरान से चलने वाला था।
सऊदी अरब के जन्म ने कैसे बदल दी दुनिया?
सऊदी अरब के जन्म ने दुनिया और अरब प्रायद्वीप को काफी हद तक बदलकर रख दिया। इसे कुछ यूं समझा जा सकता है:
आर्थिक प्रभाव- तेल की खोज (1938): धुरमा में विशाल तेल भंडार की खोज ने सऊदी अरब को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बहुत बड़ी बढ़त दे दी। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है।
- वैश्विक तेल उत्पादन: सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बना, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
- 1970 का तेल संकट: तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और सऊदी अरब को आर्थिक शक्ति प्रदान की। इसकी वजह से मध्य पूर्व वैश्विक आर्थिक केंद्र बनकर उभरा।
- आर्थिक समृद्धि: तेल राजस्व ने सऊदी अरब को दुनिया के सबसे अमीर क्षेत्रों में से एक बनाया, जिससे बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ा।
- अमेरिका के साथ गठजोड़ (1945): अब्दुलअजीज और राष्ट्रपति रूजवेल्ट की मुलाकात के बाद तेल के बदले सुरक्षा और आधुनिक हथियारों का सौदा तय हुआ। इससे सऊदी अरब को सैन्य ताकत और अमेरिकी समर्थन मिला।
- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध में तटस्थ रहने के बाद, 1945 में जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर सऊदी अरब संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य बना, जिसने इसे वैश्विक मंच पर मान्यता दिलाई।
- मध्य पूर्व में सुपरपावर: तेल और सामरिक गठजोड़ों ने सऊदी अरब को मध्य पूर्व में एक प्रभावशाली शक्ति बनाया।
- मक्का-मदीना पर नियंत्रण: इस्लाम के पवित्र स्थलों मक्का और मदीना पर नियंत्रण ने सऊदी अरब को मुस्लिम दुनिया का धार्मिक नेता बनाया।
- हज यात्रा: सालाना करोड़ों मुस्लिमों की हज यात्रा ने सऊदी अरब को वैश्विक मुस्लिम समुदाय के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान का केंद्र बनाया।
- वैश्विक प्रभाव: हज और धार्मिक नेतृत्व ने सऊदी अरब को मुस्लिम देशों में सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभाव बढ़ाने में मदद की।
इस तरह देखा जाए तो आज के सऊदी अरब के पीछे तेल की खोज, सामरिक गठजोड़, और धार्मिक नेतृत्व का बहुत बड़ा हाथ है। इसने न केवल अरब प्रायद्वीप को आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार, और धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में भी गहरा प्रभाव डाला।
सऊदी पर आज भी अब्दुलअजीज के खानदान का राज
आज भी सऊदी अरब पर अब्दुलअजीज के खानदान का ही राज है और इस समय उनके सबसे छोटे बेटे सलमान के हाथों में इस मुल्क की बागडोर है। सऊदी अरब आज 'विजन 2030' पर काम कर रहा है और तेजी से गैर-तेल अर्थव्यवस्था बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। ऐसा नहीं है कि सऊदी के करीब एक सदी के इस सफर में सब कुछ चमकदार ही रहा है लेकिन यह भी हकीकत है कि यह मुल्क लगातार अपनी ताकत और अपना असर बढ़ाता गया है। अब्दुलअजीज का यह ख्वाब आज 3.5 करोड़ लोगों का देश है, जो GDP में दुनिया के टॉप-20 में है। अब देखना यह है कि आने वाली सदी में अब्दुलअजीज का यह ख्वाब क्या करवट लेता है।