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Explainer: पेट्रोल-डीजल खरीदने में कितना खर्च करते हैं भारतीय? पाकिस्तान, नेपाल के हालात बेहद खराब

एक औसत भारतीय पेट्रोल-डीजल खरीदने में अपनी मासिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर देते हैं।

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Image Source : INDIA TV पेट्रोल-डीजल पर कितना खर्च करते हैं भारतीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में विदेशी मुद्रा बचाने की मुहिम के तहत तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अभी हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक सभा में देशवासियों से 1 साल तक सोने की खरीदारी रोकने, पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल घटाने, विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसी कई अपील की थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील के बाद से सरकार अब तक कई अहम बदलाव कर चुकी है। सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा कर दिया गया है। यहां हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि एक औसत भारतीय अपनी मासिक कमाई का कितना हिस्सा सिर्फ पेट्रोल और डीजल पर खर्च कर देता है।

पेट्रोल-डीजल खरीदने में सैलरी का कितना हिस्सा खर्च करते हैं भारतीय

''Gasoline Affordability'' नाम की एक रिपोर्ट में दुनिया के अलग-अलग देशों की तुलना की गई है। ये रिपोर्ट globalpetrolprices.com द्वारा हाल ही में जारी की गई थी। इस रिपोर्ट में ये बताने की कोशिश की गई कि एक औसत व्यक्ति पेट्रोल-डीजल पर एक महीने में अपनी सैलरी का कितना हिस्सा खर्च करता है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में विश्व बैंक के प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों की मदद ली है। इसके अलावा, इसमें जीडीपी आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया गया है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज का मानना है कि एक औसत व्यक्ति हर महीने औसतन 40 लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत करता है। इस हिसाब से, एक औसत भारतीय हर महीने अपनी मंथली सैलरी का लगभग 8-10 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल-डीजल खरीदने में खर्च कर देता है।

पाकिस्तान, नेपाल के हालात बेहद खराब

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों में आम लोगों की स्थिति काफी खराब है। इन देशों में एक औसत व्यक्ति पेट्रोल और डीजल के लिए हर महीने अपनी सैलरी का 47 प्रतिशत से लेकर 52 प्रतिशत तक हिस्सा खर्च कर देते हैं। यानी, इन देशों में एक आदमी जितना कमा रहा है, उसका आधा हिस्सा सिर्फ पेट्रोल-डीजल खरीदने में खर्च हो जाता है। जबकि, कतर और कुवैत जैसे देशों में एक औसत व्यक्ति 40 लीटर पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए अपनी मंथली सैलरी का सिर्फ 1-2 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च करते हैं।

सप्लाई चेन बाधित होने से 7वें आसमान पर कच्चे तेल की कीमतें

मिडिल-ईस्ट में तनाव की वजह से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना 1000-1200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इस नुकसान को कम करने के लिए कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी कर दी। बताते चलें कि देश में बीते 4 सालों में पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल और डीजल के अलावा, गैस कंपनियों ने सीएनजी के दाम भी बढ़ा दिए हैं।

सरकार ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए किए उपाय

पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतें शुक्रवार, 15 मई को लागू की गई थीं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होने के साथ ही, सरकार ने शुक्रवार को ही पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Profit Tax) लगा दिया, जबकि डीजल पर टैक्स घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया। टैक्स की नई दरें 16 मई से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर शून्य रहेगा। इसके अलावा, घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।