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Hindi News Explainers Explainer: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की चोट से खस्ता हाल हो जाएगा पाकिस्तान, यहां समझें वजह

Explainer: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की चोट से खस्ता हाल हो जाएगा पाकिस्तान, यहां समझें वजह

सीजफायर होने के बावजूद सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने से पाकिस्तान पर इसका असर देखने को मिलेगा। उसकी इकोनॉमी सीधे-सीधे प्रभावित होगी।

दिसंबर 2024 के आखिर तक पाकिस्तान पर विदेशी ऋणदाताओं का 131 बिलियन डॉलर से अधिक बकाया था।- India TV Hindi Image Source : INDIA TV दिसंबर 2024 के आखिर तक पाकिस्तान पर विदेशी ऋणदाताओं का 131 बिलियन डॉलर से अधिक बकाया था।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के साथ आर्थिक और  रणनीतिक उपायों का ऐलान किया है। इसका मकसद पहले से कैश की किल्लत झेल रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंचाना है। दोनों देशों के बीच सीजफायर होने के बावजूद सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने से लेकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध तक, ये सभी उपाय अभी भी लागू हैं। सिंधु जल संधि के निलंबित होने से पाकिस्तान पर काफी प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यह समझौता सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों से पानी के डिस्ट्रीब्यूशन और उपयोग को कंट्रोल करता है, जो पाकिस्तान की पानी की जरूरतों और कृषि उत्पादन के लिए मददगार हैं।

सिंधु जल को रोकने से लगेगा भारी झटका

खबर के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को स्थापित सिंधु जल संधि एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय जल-साझाकरण समझौता है। विश्व बैंक ने नौ सालों की बातचीत के जरिये इस समझौते को सुगम बनाया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। भारत सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी 1.6 करोड़ (16 मिलियन) हेक्टेयर कृषि भूमि के 80% और अपने कुल जल उपयोग के 93% के लिए सिंधु प्रणाली पर निर्भर है। यह 23.7 करोड़ लोगों का भरण-पोषण करता है और गेहूं, चावल और कपास जैसी फसलों के माध्यम से अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक चौथाई भाग चलाता है।

Image Source : INDIA TVसिंधु नदी 23.7 करोड़ पाकिस्तानियों का भरण-पोषण करती है।

मंगला और तरबेला बांधों में सिर्फ 10% लाइव स्टोरेज क्षमता (14.4 एमएएफ) के साथ, पानी के प्रवाह में कोई भी व्यवधान विनाशकारी कृषि नुकसान, खाद्यान्न की कमी, प्रमुख शहरों में पानी की राशनिंग और रोलिंग ब्लैकआउट की समस्या खड़ी कर सकता है, जो कपड़ा और उर्वरकों सहित उद्योगों को पंगु बना देगा। ये झटके पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था में व्यापक राजकोषीय और विदेशी मुद्रा संकट को जन्म दे सकते हैं।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यापार प्रतिबंध जारी

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 2 मई को एक नोटिफिकेशन में, जिसमें एफटीपी 2023 में एक नया प्रावधान पेश किया गया है, पाकिस्तान से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। निर्देश में अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से पाकिस्तान से आने वाले या निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात या पारगमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 'अप्रत्यक्ष' आयात बंद होने से पाकिस्तान पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष व्यापार सीमित है, लेकिन तीसरे देशों के माध्यम से व्यापार की मात्रा काफी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूखे मेवे और रसायनों सहित 500 मिलियन डॉलर मूल्य का सामान दूसरे देशों के माध्यम से भारत में आ रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अप्रत्यक्ष निर्यात पर प्रतिबंध सहित भारत द्वारा लगाया गया यह व्यापक प्रतिबंध सीमा शुल्क अधिकारियों को पाकिस्तान के निर्यात को भारत में प्रवेश करने से रोकने में सक्षम करेगा।

Image Source : INDIA TVपाकिस्तान कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर है।

भारी कर्ज तले पहले से दबा है पाकिस्तान

CEIC के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2024 के आखिर तक पाकिस्तान पर विदेशी ऋणदाताओं का 131 बिलियन डॉलर से अधिक बकाया था। संकट से निपटने के लिए इसने पिछले दो वित्तीय वर्षों, FY2023 और FY2024 में से प्रत्येक में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 3 अरब डॉलर से अधिक उधार लिया है। पाकिस्तान का वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ तीन महीने के आयात बिलों को कवर करने के लिए पर्याप्त है।