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Explainer: नए इनकम टैक्स बिल में क्लियर हुए प्रमुख कानून, प्रॉपर्टी मालिकों के लिए कैसे अहम है नया अपडेट

नए इनकम टैक्स बिल, 2025 के संशोधित संस्करण के क्लॉज 22 में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली इनकम पर टैक्सेशन से संबंधित दो प्रमुख कानूनों को स्पष्ट किया गया है।

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Image Source : INDIA TV प्रॉपर्टी मालिकों के लिए क्या जरूरी अपडेट है

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में नया इनकम टैक्स बिल, 2025 पेश किया, जो लोकसभा में पास भी हो गया है। ये बिल, इस साल 13 फरवरी को पेश किए गए नए इनकम टैक्स बिल, 2025 का संशोधित संस्करण है। इस संशोधित बिल में बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी द्वारा की गई ज्यादातर सिफारिशों को शामिल किया गया है। इनकम टैक्स बिल, 2025 सभी जगहों से पास होने के बाद एक्ट यानी कानून बन जाएगा और मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह ले लेगा।

संशोधित बिल में स्पष्ट हुए प्रमुख कानून

नए इनकम टैक्स बिल, 2025 के संशोधित संस्करण के क्लॉज 22 में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली इनकम पर टैक्सेशन से संबंधित दो प्रमुख कानूनों को स्पष्ट किया गया है। पहला स्पष्टीकरण हाउसिंग प्रॉपर्टी के एनुअल वैल्यू से 30% के स्टैंडर्ड डिडक्शन के संबंध में है। दूसरा स्पष्टीकरण घर के निर्माण के लिए लिए गए होम लोन पर प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज पर टैक्स डिडक्शन की उपलब्धता के बारे में है।

विधेयक के पिछले संस्करण में, प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज पर टैक्स डिडक्शन और स्टैंडर्ड डिडक्शन को अच्छी तरह से स्पष्ट नहीं किया गया था। इसलिए, लोकसभा सेलेक्ट कमेटी ने कहा था, ''क्लॉज 22 पर विचार-विमर्श के बाद, कमेटी ने प्रॉपर्टी मालिकों के लिए निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिडक्शन की कैलकुलेशन को स्पष्ट करने की जरूरत को पहचाना। कमेटी ने दो प्रमुख संशोधनों की सिफारिश की थी।''

सिफारिश 1

क्लॉज 22(1)(a) में स्पष्ट रूप से ये उल्लेख किया जाए कि स्टैंडर्ड 30% डिडक्शन का कैलकुलेशन म्यूनिसिपल टैक्स में कटौती के बाद एनुअल वैल्यू पर की जाती है।

सिफारिश 2

क्लॉज 22(2) में ये सुनिश्चित किया जाए कि प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज के लिए टैक्स कटौती, खुद के कब्जे वाली प्रॉपर्टी के अलावा किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए भी उपलब्ध हो और इसे मौजूदा एक्ट के अनुरूप बनाया जाए। इसके अलावा, कमेटी बिल में प्रस्तावित क्लॉज 22 के बाकी प्रावधानों को स्वीकार करती है।”

बिल के नए संस्करण में क्या प्रावधान हैं

क्लॉज 22 (1) "इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी" टाइटल के अंतर्गत इनकम की कैलकुलेशन नीचे दिए गए डिडक्शन्स के बाद की जाएगी-

  • सेक्शन 21 के तहत निर्धारित एनुअल वैल्यू का 30%
  • जहां प्रॉपर्टी उधार ली गई पूंजी से अर्जित, निर्मित, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण की गई हो, वहां ऐसी पूंजी पर देय ब्याज की राशि
  • जहां क्लॉज (बी) में निर्दिष्ट पूंजी उस टैक्स ईयर से पहले की किसी अवधि के दौरान उधार ली गई हो, जिसमें संपत्ति अर्जित या निर्मित की गई हो, वहां उस पहले की अवधि के लिए देय ब्याज की राशि, उस टैक्स ईयर के लिए पांच समान किश्तों में और उसके तुरंत बाद के चार टैक्स ईयर में से प्रत्येक के लिए देय होगी।

प्रॉपर्टी मालिकों के लिए क्या जरूरी अपडेट है

सीए (डॉ.) सुरेश सुराणा ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि अगर आप एक प्रॉपर्टी मालिक हैं जिसने किसी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट से होम लोन लेकर हाउसिंग प्रॉपर्टी खरीदी है तो आप लोन के मूलधन और ब्याज दोनों पर कुछ टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। सेलेक्ट कमेटी द्वारा प्रस्तावित संशोधन उस स्थिति से संबंधित हैं जहां आपने लोन पर खरीदा हुआ अपना मकान किराए पर (लेट-आउट) दे दिया है।

किराये से प्राप्त इनकम पर देना होगा टैक्स

टैक्स2विन के को-फाउंडर, चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक सोनी बताते हैं कि लेट-आउट हाउस प्रॉपर्टी वो होती है जो किसी अन्य पक्ष को किराए पर या लीज पर दी जाती है। ऐसी प्रॉपर्टी से प्राप्त किराये की इनकम, "हाउस प्रॉपर्टी से इनकम" टाइटल के अंतर्गत टैक्सेबल होती है। व्यक्ति भुगतान किए गए नगर निगम टैक्स, मानक कटौती (नेट एनुअल वैल्यू का 30%) और होम लोन पर ब्याज पर टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं।"

फरवरी में पेश किए गए बिल में नहीं थी स्पष्टता

हालांकि, फरवरी में पेश इनकम टैक्स बिल, 2025 के मूल मसौदे में, क्लॉज 22(1)(a) एनुअल वैल्यू से 30% की कटौती की अनुमति देता था, लेकिन ये स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया था कि यह कटौती नगरपालिका करों की कटौती से पहले या बाद में लागू की जाएगी। इस स्पष्टता की कमी ने मौजूदा प्रथा से संभावित अंतर को लेकर चिंताएं पैदा कीं और ऐसी व्याख्याएं हो सकती थीं जिनके अनुसार 30% की कटौती सकल वार्षिक मूल्य पर लागू की जाएगी।