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Explainer: पीएम मोदी ने 1 साल तक सोने की खरीदारी बंद करने के लिए क्यों कहा, इससे कीमतों पर क्या पड़ेगा असर

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल का युद्ध अपने तीसरे महीने में है और निकट भविष्य में इसके समाधान के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।

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Image Source : INDIA TV पीएम मोदी की 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से सोने की खरीद और विदेश यात्रा को 1 साल के लिए बंद करने की अपील की। पीएम मोदी ने मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव की स्थिति के बीच देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से ये अपील की। प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील का सबसे बड़ा उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अलावा, उन्होंने पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल को भी कम करने की अपील की, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट की वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।

पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार करने की अपील

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "अब समय आ गया है कि हम पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करें। हमें सिर्फ उतना ही इस्तेमाल करने की कोशिश करनी चाहिए, जितना जरूरी हो, ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके और युद्ध संकट के बुरे असर को कम किया जा सके।" उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब कच्चा तेल और सोना आयात करने में भारत को बड़ी मात्रा में अपनी विदेशी मुद्रा को खर्च करना पड़ रहा है। अगर सोना और तेल का इस्तेमाल कम होता है तो इन चीजों का आयात भी घट जाएगा, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बहुत ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ेगा।

तेजी से गिर रहा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 1 मई को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले, 27 फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में ये रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था। इसके बाद, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता चला गया और RBI को डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।

Image Source : india tvForex Reserves

भारत की कुल जरूरत का 80-85 प्रतिशत कच्चा तेल होता है आयात

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल का युद्ध अपने तीसरे महीने में है और निकट भविष्य में इसके समाधान के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। ये युद्ध वैश्विक तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह बना, जो भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। खासकर, जब भारत अपनी 80-85% जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। आरबीआई के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी से आर्थिक विकास दर 0.15 प्रतिशत कम हो जाती है और महंगाई 0.30 प्रतिशत बढ़ जाती है।

Image Source : india tvCrude Oil Price Impact

कुल खपत का 90 प्रतिशत सोना आयात करता है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक हैं। हम अपनी घरेलू मांग का 90% से ज्यादा हिस्सा पूरा करने के लिए आमतौर पर हर साल 700-800 टन सोना आयात करते हैं। सोने का ये भारी आयात हमारे आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है, खासकर अब बढ़ती कीमतों के कारण आयात की लागत भी काफी ज्यादा बढ़ रही है। 2025-26 में, सोने का आयात 24% बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जो 2024-25 में 58 अरब डॉलर, 2023-24 में 45.54 बिलियन डॉलर था और 2022-23 में 35 बिलियन डॉलर था। सोने के आयात में बढ़ोतरी ने देश के व्यापार घाटे को 2025-26 के दौरान 333.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दिया।

Image Source : india tvGold Import

भारत के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 775 बिलियन डॉलर की वस्तुओं का आयात किया। इसमें 134.7 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल, 72 बिलियन डॉलर का सोना, 19.5 बिलियन डॉलर का खाद्य तेल और 14.5 बिलियन डॉलर का उर्वरक शामिल है। कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक के आयात में होने वाला खर्च, देश के कुल आयात का लगभग 32-33 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें लगभग 10 प्रतिशत सिर्फ सोने का खर्च है।

Image Source : india tvImport

महंगे कच्चे तेल के बीच रुपये पर बुरा असर डाल रहा है सोने का आयात

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में से एक है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने का भारी आयात देश के व्यापार घाटे और रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालता है। उन्होंने कहा कि मोदी के संदेश को "मुख्य रूप से भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता और आयात प्रबंधन के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।"

सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट

इस बीच, सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई। आज सोने का भाव 0.25% गिरकर 1,52,150 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। हालांकि, सोने की कीमतें मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से तय हो रही हैं और इसमें घरेलू कारणों का कोई खास प्रभाव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच अभी तक सोने की कीमतें उल्टी दिशा में जाती हुई नजर आई हैं और इसमें लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई है। आमतौर पर युद्ध जैसे हालातों में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। दरअसल, निवेशकों को डर है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं और केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर सकती हैं। यही वजह है कि युद्ध के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट आ रही है।

सोने की मांग में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं

मांग के रुझानों के मामले में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। भारत में सोने का आकर्षण अभी भी बचत, निवेश और सांस्कृतिक खरीदारी के तरीकों से गहराई से जुड़ा हुआ है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में, सोने के आभूषणों की गैर-जरूरी खरीदारी धीमी हो सकती है और बुलियन तथा आभूषणों से जुड़े व्यवसायों में सतर्कता का माहौल बन सकता है।"

Image Source : india tvGold Price Outlook

सोने की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद असर सोने की खरीदारी में गिरावट आती भी है तो इससे कीमतों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। दरअसल, आमतौर पर सोने की कीमतें विदेशी कारणों से प्रभावित होती हैं, जैसे- अमेरिकी डॉलर की कीमतें, बढ़ती बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेडरल की घोषणाओं और कच्चे तेल का भाव। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल सोने की कीमतें मौजूदा स्तर से लगभग 12-15 प्रतिशत तक ऊपर जा सकती हैं।