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Explainer: सांप अपनी त्वचा क्यों बदलते हैं? वे बिना खाए महीनों कैसे जिंदा रहते हैं?

कई लोगों के मन में सवाल आता होगा कि आखिर सांप अपनी त्वचा क्यों बदलते हैं? बता दें कि त्वचा का बदलना या केंचुल उतारना सांपों की जिंदगी का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। आज हम सांपों से जुड़ी कुछ अहम बातों पर चर्चा करेंगे।

आम आदमी के लिए सांपों...- India TV Hindi
Image Source : PEXELS REPRESENTATIONAL आम आदमी के लिए सांपों की दुनिया बेहद रहस्यमयी होती है।

World Snake Day: सांप प्रकृति के सबसे रहस्यमयी और आकर्षक जीवों में से एक हैं। पूरी दुनिया में तमाम लोककथाएं सांपों के इर्द-गिर्द रची गई हैं। सांपों को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल भी रहते हैं। क्या आपने कभी सोचा कि सांप अपनी त्वचा या केंचुली क्यों उतारते हैं? या फिर बिना खाए महीनों तक कैसे जिंदा रहते हैं? आज 'World Snake Day' के मौके पर हम आपको सांपों से जुड़ी कई ऐसी जानकारियां देने जा रहे हैं जिनके बारे में आपने कभी शायद ही सोचा होगा।

सांप अपनी त्वचा क्यों बदलते हैं?

सांपों का त्वचा बदलना, जिसे केंचुली उतारना या अंग्रेजी में 'Molting' कहते हैं, उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है। यह प्रक्रिया उनके लिए जरूरी है। दरअसल, जैसे-जैसे सांप बड़ा होता है, उसकी पुरानी त्वचा छोटी पड़ने लगती है, क्योंकि यह ज्यादा खिंच नहीं सकती। इसलिए सांप पुरानी त्वचा को उतार देता है और उसे नई त्वचा मिल जाती है। इसके अलावा त्वचा में खरोंच, घाव या परजीवियों की वजह से होने वाले नुकसान से छुटकारा पाने के लिए भी सांप केंचुली उतारते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें माहौल के हिसाब से ढलने में भी मदद करती है, जैसे ठंडे इलाकों में मोटी त्वचा और गर्म जगहों पर हल्की त्वचा।

Image Source : Pexels Representationalकेंचुली उतारना सांपों के जीवन का अहम हिस्सा है।

बता दें कि त्वचा बदलने से पहले सांप की नजर धुंधली हो जाती हैं, क्योंकि आंखों को ढकने वाली पारदर्शी झिल्ली भी उतरने वाली होती है। फिर सांप पत्थरों या पेड़ों पर रगड़कर धीरे-धीरे अपनी त्वचा उतारता है। छोटे सांप हर 1-2 महीने में, जबकि बड़े सांप साल में 2-4 बार त्वचा बदलते हैं।

बिना खाए महीनों कैसे जिंदा रहते हैं?

आपको बता दें कि सांपों की कई प्रजातियां 6 महीने, और कभी-कभी इससे भी ज्यादा बिना खाना खाए जिंदा रह सकते हैं। इसका राज उनकी शारीरिक बनावट और कम मेटाबॉलिज्म में छिपा है। सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं, यानी उनका शरीर बाहर के तापमान पर निर्भर करता है। इससे उनकी ऊर्जा की खपत बहुत कम होती है। सांप अपने शरीर में चर्बी जमा करते हैं, खासकर पूंछ और पेट में, जो भूखे रहने पर धीरे-धीरे ऊर्जा देती है। साथ ही, सांप जरूरत पड़ने पर अपनी गतिविधियां कम कर देते हैं और एक जगह शांत बैठे रहते हैं। ठंड के मौसम में कुछ सांप हाइबरनेशन में चले जाते हैं, जिसमें वे बिल्कुल खाना नहीं खाते।

कई मौकों पर सांप एक बार में बड़ा शिकार खा लेते हैं जिसे पचाने में उन्हें हफ्तों लग जाते हैं। यह भोजन उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा देता है। कुछ सांप, जैसे रैटलस्नेक, खास परिस्थितियों में 8-12 महीने तक भी भूखे रह सकते हैं, लेकिन यह उनकी सेहत पर असर डाल सकता है।

Image Source : Pexels Representationalकिंग कोबरा दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से है।

शिकार करने के अनोखे तरीके अपनाते हैं सांप

सांपों में और भी कई अनोखी बातें होती हैं जो उन्हें खास बनाती हैं। सांपों की आंखों पर पलकें नहीं होतीं, उनकी आंखें एक पारदर्शी झिल्ली से ढकी होती हैं, जो त्वचा बदलने के साथ उतर जाती है। यही वजह है कि ऐसा लगता है कि सांप कभी पलक नहीं झपकते। सांप अपनी जीभ से सूंघते हैं, जो हवा में मौजूद गंध के कणों को पकड़कर जैकबसन ऑर्गन की मदद से शिकार या खतरे का पता लगाती है। उनका जबड़ा इतना लचीला होता है कि वे अपने से कई गुना बड़े शिकार को निगल सकते हैं।

कुछ सांप जैसे कोबरा और वाइपर जहर से शिकार को मारते हैं, जबकि अजगर और बोआ शिकार का दम घोंटकर उसे मौत की नींद सुलाते हैं। पिट वाइपर जैसे कुछ सांप अपने चेहरे के गड्ढों से गर्मी का पता लगाकर अंधेरे में शिकार ढूंढ लेते हैं। दुनिया में सांपों की करीब 3,000 प्रजातियां हैं, जिनमें से सिर्फ 20-25% जहरीली होती हैं। भारत में कोबरा, क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्‍केल्ड वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियां पाई जाती हैं।

Image Source : Pexels Representationalअजगर अपने शिकार की जान उसका दम घोंटकर लेता है।

दुनिया के लगभग हर कोने में पाए जाते हैं सांप

सांप दुनिया के लगभग हर कोने में पाए जाते हैं, सिवाय अंटार्कटिका, न्यूज़ीलैंड और कुछ छोटे-मोटे द्वीपों के। भारत में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां रहती है जिनमें से किंग कोबरा, रसेल वाइपर और इंडियन पायथन प्रमुख हैं। भारत में 4 सबसे खतरनाक जहरीले सांप कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर हैं। सांपों की कई प्रजातियां अवैध शिकार और जंगल कटाई की वजह से खतरे में हैं। सांप दूध नहीं पीते, वे मांसाहारी होते हैं और दूध पीने से उनकी तबीयत बिगड़ जाती है। सबसे खास बात, सांप तभी हमला करते हैं जब उन्हें खतरा महसूस हो।