Explainer: लॉटरी सिस्टम से कैसे चुने जाते हैं BMC के मेयर, अनोखा है चुनाव का नियम और इतिहास
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका में मेयर कौन होगा, इसका चुनाव लॉटरी सिस्टम से होता है। सबसे खास होता है बीएमसी का चुनाव? जानें चुनाव के नियम और इतिहास...

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं को चुनाव संपन्न हो चुके हैं। अब बारी है मेयर यानी महापौर चुनने की तो बता दें कि महाराष्ट्र में महापौरों का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और पात्रता का निर्धारण आरक्षण आधारित लॉटरी प्रणाली द्वारा होता है। राजनीतिक दलों द्वारा अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित करने से पहले, उम्मीदवारों की श्रेणी इस आरक्षण के आधार पर तय की जाती है। महापौर का पद हर ढाई साल में लॉटरी के माध्यम से पुनः आवंटित किया जाता है, जिसमें सामान्य और आरक्षित श्रेणियां शामिल होती हैं।
कैसे होता है महानगरपालिका के मेयर का चुनाव
- कानून के अनुसार, महापौर का पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए लॉटरी द्वारा आरक्षित होना अनिवार्य है।
- आरक्षण श्रेणी घोषित होने के बाद, सत्ताधारी और विपक्षी दल महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल करते हैं।
- यद्यपि एक से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 114 वोटों की आवश्यकता होती है। यह 227 सदस्यीय सदन में पूर्ण बहुमत है
- चुनाव की देखरेख सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य करते हैं, जो पीठासीन अधिकारी भी होते हैं।
- नामांकन के बाद, उम्मीदवार को अपना नामांकन वापस लेने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाता है।
- महापौर का चुनाव खुले तौर पर होता है, जिसमें सभी पार्षद सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं कि वे किसे वोट दे रहे हैं।
इस बार महिलाएं हैं मेयर पद की ज्यादा दावेदार
इस वर्ष मुंबई के महापौर पद के लिए हुए ड्रॉ में यह तय हुआ कि अगली महापौर सामान्य वर्ग की महिला होंगी। पुणे, धुले, नांदेड़-वाघाला और नवी मुंबई सहित आठ अन्य नगर निकायों में भी सामान्य वर्ग की महिला महापौर होंगी। ठाणे में अनुसूचित जाति वर्ग की महापौर होंगी, जबकि जलगांव, चंद्रपुर और अहिल्यानगर में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिला महापौर होंगी। इस वर्ष का लॉटरी ड्रॉ राज्य शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित किया गया था और इसकी अध्यक्षता विभाग की राज्य मंत्री माधुरी मिसल ने की थी। मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों में महापौर पदों के लिए लॉटरी निकाली गई थी।
बीएमसी की मेयर भी महिला होगी
इन महानगरपालिकाओं में शामिल देश की सबसे धनी नगरपालिका बीएमसी का रिजल्ट भी आ गया है लेकिन शहर को मेयर तुरंत नहीं मिलेगा। गुरुवार को हुई लॉटरी के अनुसार, मुंबई की अगली मेयर सामान्य वर्ग की एक महिला होंगी। बीएमसी के मेयर का चुनाव आसान नहीं होता, इसकी एक अनोखी प्रक्रिया होती है जिसके बाद ही मेयर चुना जाता है, और वो है लॉटरी सिस्टम। मेयर पद का चुनाव लॉटरी के माध्यम से जबतक तय नहीं हो जाता और आधिकारिक रूप से चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर सकते, जिससे मुंबई को मेयर मिलने में देरी होती है।
मुंबई के मेयर का चुनाव कैसे होता है?
मुंबई के मेयर का चुनाव सीधे नागरिकों द्वारा नहीं किया जाता है। इसके बजाय, मेयर का चुनाव भारत के सबसे धनी नागरिक निकाय, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाता है।नगरपालिका चुनाव संपन्न होने और सभी वार्डों से पार्षदों के चुने जाने के बाद, वे अपने सदस्यों में से महापौर का चुनाव करने के लिए एक विशेष सत्र में एकत्रित होते हैं। बहुमत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार महापौर बनता है। अगर बीएमसी के गठन के एक महीने के भीतर मेयर का चुनाव नहीं होता है, तो कानून के तहत सीधे सार्वजनिक चुनाव का प्रावधान है। हालांकि, मुंबई में इस प्रावधान का कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है।
आरक्षण का निर्णय लॉटरी द्वारा क्यों किया जाता है?
मेयर पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया लॉटरी से संपन्न होती है जो चुनाव को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए बनाई गई है। लॉटरी का उपयोग करके, अधिकारी इस आरोप से बचते हैं कि राजनीतिक दल या सरकारें अपने हितों के अनुरूप आरक्षण तय कर रही हैं। लॉटरी द्वारा निकाले गए ड्रॉ के माध्यम से रोटेशन यह भी सुनिश्चित करता है कि विभिन्न सामाजिक समूहों को समय-समय पर महापौर की कुर्सी संभालने का मौका मिले, न कि किसी एक वर्ग को बार-बार इसका लाभ मिले।
लॉटरी कैसे आयोजित की जाती है?
शहरी विकास विभाग द्वारा लॉटरी की प्रक्रिया आयोजित करने के लिए अधिसूचना जारी करने से शुरू होती है। पिछले कार्यकालों के आधार पर, अधिकारी पात्र श्रेणियों की एक रोटेशन सूची तैयार करते हैं। इसके बाद एक सार्वजनिक ड्रॉ आयोजित किया जाता है। पर्ची निकलने के बाद, आरक्षण श्रेणी को अंतिम रूप दिया जाता है और औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जाता है।
इस चरण के बाद ही बीएमसी पार्षदों की एक विशेष बैठक बुला सकती है, जिसमें लॉटरी के अनुसार आरक्षित श्रेणी या खुली श्रेणी के सदस्यों में से महापौर का चुनाव किया जाता है। महापौर का चुनाव साधारण बहुमत से होता है, जिसका अर्थ मुंबई में 227 सदस्यीय सदन में 114 से अधिक पार्षदों का समर्थन है।
मुंबई के मेयर के पास कौन-कौन सी शक्तियां हैं?
संविधान और मुंबई नगर निगम अधिनियम के अनुसार, मेयर बृहन्मुंबई नगर निगम के औपचारिक प्रमुख होते हैं। मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा अपने बीच से ढाई वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। उनकी मुख्य भूमिका आम सभा की बैठकों की अध्यक्षता करना, बहसों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और टाई होने की स्थिति में निर्णायक मत का प्रयोग करना है। मेयर को शहर का सर्वोपरि नागरिक माना जाता है और वे बीएमसी की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन प्रशासन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता।
मेयर मुंबई के प्रथम नागरिक के रूप में आधिकारिक समारोहों में मुंबई का प्रतिनिधित्व भी करते हैं और निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं। हालांकि, मेयर नगर निगम विभागों या वित्त पर नियंत्रण नहीं रखते हैं। ये शक्तियां नगर आयुक्त के पास होती हैं, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक आईएएस अधिकारी होते हैं।