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EXPLAINER: मलेशिया और भारत का क्या है खास कनेक्शन, कल्चर, फूड, भाषा से भी है गहरा नाता, समझिए कैसे?

India Malaysia Relationship: मलेशिया में बहुत सारे तमिल लोग रहते हैं, वहां आपको बड़े-बड़े मंदिर भी देखने को मिल जाएंगे। दोनों देशों का खाना-पीना भी काफी कुछ मिलता-जुलता है। फिल्में और म्यूजिक भी दोनों देशों के लोगों के बीच में ब्रिज बनता है। आइए जानते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते इतने खास क्यों हैं?

India Malaysia Relations- India TV Hindi
Image Source : PTI भारत और मलेशिया में पुराने और गहरे संबंध हैं।

India Malaysia Relations: भारत और मलेशिया के बीच रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं। भारतीय समुदाय के जो लोग मलेशिया में रहते हैं वे दोनों देशों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। भारत-मलेशिया के लोगों के खान-पान, भाषा, कल्चर और परंपराओं में काफी कुछ मिलता-जुलता है। कुआलालंपुर में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भारतीय मूल की आबादी मलेशिया में ही रहती है। दोनों देशों के लोगों का दिल का रिश्ता है, ये बात रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देती है। मलेशिया में रहने वाले भारतीयों में सबसे ज्यादा तमिलनाडु के लोग हैं। समझिए कि ऐसी कौन सी बातें हैं जो मलेशिया और भारत को करीब लाती हैं।

मलेशिया-भारत के खाने-पीने में है समानता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कुआलालंपुर के संबोधन कहा कि भारत-मलेशिया की साझा परंपराओं और स्वाद में यह सांस्कृतिक संबंध साफ नजर आता है। चाहे वह मालाबार परोट्टा और रोटी चनाई हो, नारियल और मसालों का इस्तेमाल हो या तेह तारिक, ये दोनों जगह अपनापन महसूस कराती है। जान लें कि भारत और मलेशिया के खाने-पीने में कई समानताएं हैं। दोनों देशों में खाना बनाने में मसालों का खूब इस्तेमाल होता है।

रोटी चनाई और मालाबार परोट्टा की कहानी

मलेशिया की फेमस रोटी चनाई, मालाबार परोट्टा का ही बदला हुआ रूप मानी जाती है। Curry, Nasi Lemak और Satay जैसे व्यंजनों में भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई स्वादों का संगम दिखाई देता है। Teh Tarik (एक प्रकार की चाय) मलेशिया में उतनी ही मशहूर है, जितनी भारत में चाय है।

धर्म-संस्कृति ने भी दोनों देशों को जोड़े रखा

मलेशिया में बाटू गुफाएं, बड़ा धार्मिक स्थल है। यहां दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले भगवान मुरुगन का मंदिर है। साउथ इंडिया की तरह मलेशिया में भी बड़े मंदिर और गोपुरम नजर आते हैं। पहनावे की बात करें तो सारोंग (लुंगी) और कपड़ों में बाटिक व सोंगकेट जैसी डिजाइन भारत और मलेशिया दोनों में दिख जाते हैं। यह हमारे पुराने व्यापारिक रिश्तों की याद दिलाता है।

भाषा, फिल्म और म्यूजिक बना ब्रिज

मलेशिया की भाषा भले ही मलय हो, लेकिन तमिल भाषा भी यहां काफी बोली जाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तमिल को खासतौर पर जगह मिलती है। PM मोदी ने अपने संबोधन में ये भी याद दिलाया कि भारतीय फिल्में और गाने भी मलेशिया के लोगों को बहुत पसंद हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को भी तमिल गाने, खासकर एमजीआर के गाने बहुत पसंद हैं।

साझा विरासत को आगे बढ़ाने की पहल

प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया और भारत की साझा विरासत का जिक्र करते कहा कि मलेशिया में तमिल लोग सैकड़ों वर्षों से रह रहे हैं। सेवा कर रहे हैं। इसी कारण से भारत ने मलेशिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया में तिरुवल्लुवर चेयर बनाई है। दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने के लिए अब तिरुवल्लुवर केंद्र भी खोला जाएगा।

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