भारत में टेक्नोलॉजी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले समय में भारत AI और डेटा सेंटर का ग्लोबल हब बनने वाला है। एआई और क्लाउड स्टोरेज की वजह से भारत का डिजिटल इकोनॉमी तेजी से ग्रोथ हो सकता है। सरकार की कई योजनाएं बड़ी टेक कंपनियों को भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए आकर्षित कर रही है। इस समय मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और नोएडा जैसे शहरों में डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इनमें यूजर्स का डेटा लोकली स्टोर किया जाएगा।
क्यों बनाए जा रहे हैं डेटा सेंटर?
सरकार ने 2030 तक भारत में डेटा सेंटर की क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। बड़ी टेक कंपनियां गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत में डेटा सेंटर बनाने के लिए करोड़ों रुपये निवेश करने का ऐलान किया है। खास तौर पर सरकार की पॉलिसी भारतीय यूजर्स का डेटा लोकली स्टोर किए जाने के लिए बाध्य करती है। इसकी वजह से टेक कंपनियों को लोकल डेटा सेंटर स्थापित करना पड़ेगा। ये डेटा सेंटर देश के बड़े शहरों राजधानी दिल्ली के पास नोएडा, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई में बनाए जा रहे हैं।
गूगल का फोकस पूर्वी भारत में है, जिसकी वजह से कंपनी विशाखापत्तनम में अपना डेटा सेंटर हब बना रही है। गूगल अमेरिका से विशाखापत्तनम के बीच सबस्टेंशियल कैपेसिटी वाला सबसी केबल बिछाने का फैसला किया है। इसका फायदा देश में डेटा स्टोर करने से लेकर इसकी निगरानी के लिए जॉब क्रिएशन में भी होगा, जो लोकल इकोनॉमी को बढ़ाने का काम करेगा।
Image Source : Unsplashडेटा सेंटर
टेक कंपनियां कर रही बड़ा निवेश
Google के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, मेटा जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 200 बिलियन डॉलर तक निवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से भारी मात्रा में डेटा की खपत हो रही है। जेनरेटिव एआई बनाने वाली कंपनियों को भी इसके लिए डेटा सेंटर एक्सपेंड करने की जरूरत पड़ गई है। हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस समय दुनिया का 20% डेटा जेनरेट करता है। इस डेटा को लोकली स्टोर करने के लिए डेटा सेंटर की जरूरत है। आने वाले समय में डेटा जेनरेशन और तेजी से बढ़ेगा, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर की जरूरत होगी।
एआई की बढ़ रही डिमांड
भारत के AI मिशन ने भी डेटा सेंटर के एक्सपेंशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हाल में हुए इंडिया एआई समिट में दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियों के CEO भारत आए थे। गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई, एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के सीईओ ने इस दौरान भारत में डेटा स्टोर करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करने की बात कही थी। भारत की कंपनियां भी यहां डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में निवेश करने जा रही हैं। फरवरी 2026 में अडानी ग्रुप ने इसके लिए 100 बिलियन डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है। अडानी ग्रुप 2035 तक एआई रेडी डेटा सेंटर बनाएगा, जो रिन्यूएबल पावर्ड सिस्टम पर बेस्ड होगा।
Image Source : Unsplashडेटा सेंटर
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज भी डेटा सेंटर तैयार करने के लिए 120 बिलियन डॉलर का निवेश करने वाली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज अपना नेक्स्ट जेनरेशन कम्प्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा, जो न सिर्फ भारत को ग्लोबल इंटेलिजेंस से कम्पीट कराएगा, बल्कि इसमें भारत को अग्रणी बनाने का भी काम करेगा। एआई की लोकप्रियता की वजह से डेटा प्रोसेसिंग की डिमांड चार गुना तक बढ़ गई है। ऐसे में और बड़ी मात्रा में डेटा सेंटर बनाने की जरूरत होगी।
यह भी पढ़ें - 9,499 रुपये में लॉन्च हुआ 6000mAh बैटरी वाला 5G फोन, HMD ने चीनी कंपनियों की बढ़ाई टेंशन