'सुदर्शन चक्र' को 'सुपर शील्ड' बनाएगी इजरायल की 'आयरन डोम' तकनीक! जानें भारत के लिए क्यों हो सकता है गेमचेंजर
Mission Sudarshan Chakra: भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम 2035 तक देश के अहम ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है। इजरायल के आयरन डोम तकनीक के संभावित ट्रांसफर से यह और मजबूत हो सकता है।
Mission Sudarshan Chakra: भारत ‘सुदर्शन चक्र’ के नाम से अपना बेहद मजबूत स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम बना रहा है। माना जा रहा है कि यह 2035 तक देश के बड़े शहरों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, सामरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को मिसाइल और ड्रोन हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करने में सक्षम हो जाएगा। भारत के इस महत्वाकांक्षी मिशन को अब नई रफ्तार मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के इजरायल दौरे पर हैं जिसमें दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौते होने की उम्मीद है। खबरें आ रही हैं कि इजरायल ने भारत को अपनी विश्व प्रसिद्ध आयरन डोम जैसी मिसाइल डिफेंस तकनीक ट्रांसफर करने का बड़ा ऑफर दिया है।
‘सुपर शील्ड’ बन जाएगा भारत का सुदर्शन चक्र
अगर इजरायल भारत को आयरन डोम जैसी तकनीक ट्रांसफर करता है तो 'सुदर्शन चक्र' इजरायली टेक्नोलॉजी और भारतीय इंजीनियरिंग को मिलाकर ‘सुपर शील्ड’ बन जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की थी। भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा था कि अगले 10 साल में यानी 2035 तक देश के हर अहम ठिकाने को अभेद्य सुरक्षा कवच मिलेगा। उनका कहना था कि यह सिर्फ हमले रोकने का नहीं, बल्कि दुश्मन को कई गुना ज्यादा मजबूती से जवाब देने वाला सिस्टम होगा।
आयरन डोम तकनीक की भारत को जरूरत क्यों है?
भारत के लिए आयरन डोम की तकनीक खास तौर पर जरूरी है क्योंकि पाकिस्तान के ड्रोन और रॉकेट हमलों तथा चीन की स्वॉर्म ड्रोन रणनीति को काउंटर करने में यह बहुत कारगर साबित होगा। आइए, आपको बताते हैं कि आयरन डोम में क्या खास है:
- इजरायल का आयरन डोम दुनिया का सबसे सफल मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जिसकी सफलता दर 90 फीसदी तक है।
- यह रॉकेट, मोर्टार, छोटी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन को हवा में ही मार गिराता है।
- आयरन डोम खतरे का रियल-टाइम विश्लेषण करता है।
- यह खाली इलाके में जाने वाले रॉकेट को खुद-ब-खुद इग्नोर कर देता है जिससे फालतू का खर्च बचता है।
- एक लॉन्चर में 20 तमीर इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं।
- गाजा और लेबनान सीमा पर हजारों रॉकेट मारकर अपने आपको साबित कर चुका है।
इजरायली तकनीक से सुदर्शन चक्र कैसे बनेगा सुपरचार्ज्ड?
सुदर्शन चक्र को आप एक तीन घेरों वाली सुरक्षा ढाल की तरह ले सकते हैं। इसमें अगर पहला घेरा चूक जाए, तो दूसरा और यदि दूसरा भी चूक जाए तो तीसरा अपना काम कर देगा।
- निचली लेयर (Low Altitude Layer): निचली लेयर कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों जैसे ड्रोन, छोटे रॉकेट और मोर्टार शेल से सुरक्षा प्रदान करती है। यह प्रणाली आयरन डोम जैसी क्षमता पर आधारित है, जिसमें अत्याधुनिक रडार, सेंसर और AI आधारित ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं। इसमें खतरे को लॉन्च होते ही पहचानकर कुछ ही सेकंड में इंटरसेप्ट किया जाता है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों, शहरों और सैन्य ठिकानों की त्वरित और प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
- मिडिल लेयर (Medium Range Layer): सुदर्शन चक्र का मिडिल लेयर क्रूज मिसाइल, फाइटर जेट और मध्यम दूरी के हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें बराक-8 MR-SAM और LR-SAM के उन्नत संस्करण शामिल हैं। यह पूरी तरह नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम पर आधारित है, जिसमें साइबर डिफेंस और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की सुविधा होती है। इसमें अलग-अलग रडार, सैटेलाइट और कमांड सेंटर आपस में जुड़े रहते हैं, जिससे एक सिस्टम पर हमला होने पर भी बाकी सक्रिय रहते हैं और इलेक्ट्रॉनिक या साइबर हमलों से सुरक्षा बनी रहती है।
- टॉप लेयर (High Altitude/Strategic Layer): टॉप लेयर लंबी दूरी और परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान करती है। यह ऐरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम और डेविड्स स्लिंग जैसी उन्नत इंटरसेप्टर तकनीकों से अपनी ताकत हासिल करती है। इसकी खासियत यह है कि दुश्मन की मिसाइल को अंतरिक्ष या वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में ही नष्ट कर दिया जाता है। यह लेयर देश की रणनीतिक परिसंपत्तियों और परमाणु सुरक्षा के लिए अंतिम और सबसे मजबूत रक्षा कवच के रूप में काम करती है।
इस तरह देखा जाए तो 'सुदर्शन चक्र' की निचली लेयर छोटे और तात्कालिक खतरों से निपटने के लिए, मिडिल लेयर हवाई हमलों और क्रूज़ मिसाइलों से निपटने के लिए और टॉप लेयर बैलिस्टिक और रणनीतिक मिसाइलों से निपटने में काम आएगी। ये तीनों लेयर मिलकर भारत को 360-डिग्री मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। इजरायली तकनीक, AI और नेटवर्क इंटेलिजेंस इसे दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम्स में शामिल कर सकती है।
PM मोदी का इजरायल दौरा क्यों है इतना अहम?
माना जा रहा है कि पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान कई अहम समझौतों को अंतिम रूप दिया जा सकता है और हथियार सौदों पर भी दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं। AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और उन्नत रडार सिस्टम के संयुक्त विकास से दोनों देशों की सामरिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत होगी, और साथ ही Heron MK-2 ड्रोन की नई खरीद पर निर्णय संभव है। बता दें कि 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली हथियार बराक-8, स्पाइक, हेरोन आदि बेहद प्रभावी साबित हुए थे। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद फरोख्त होती रही है और इसलिए पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें हैं।
'हेक्सागन' गठबंधन को लेकर बौखलाया है पाकिस्तान
बता दें कि 'सुदर्शन चक्र' की चर्चा के बीच इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 'कट्टरपंथी धुरी' यानी कि शिया और सुन्नी कट्टर ताकतों का मुकाबला करने के लिए ‘हेक्सागन’ नाम के एक नए गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। इसमें उन्होंने भारत, कुछ अरब देशों, अफ्रीकी देशों, ग्रीस, साइप्रस और एशिया के कुछ अन्य देशों को शामिल करने की बात कही है। नेतन्याहू के इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाया हुआ है। वह इसे 'एंटी-मुस्लिम उम्मा ब्लॉक' करार दे रहा है। दरअसल, पाकिस्तान को ये डर सता रहा है कि अगर बाकी देशों के साथ-साथ भारत और इजरायल इस गठबंधन के जरिए आपस में और मजबूती से मिल गए तो उसके नापाक मंसूबों पर पानी फिर जाएगा।
