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Explainer: क्या सच में तबाह हो गई ईरान की आर्मी? जानें, ट्रंप के दावों से कितनी अलग है खुफिया रिपोर्ट

ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अमेरिका की नई खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है बल्कि उसकी अधिकांश मिसाइल क्षमता, ठिकाने और लॉन्च सिस्टम अब भी सक्रिय हैं।

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Image Source : INDIA TV अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

न्यूयॉर्क: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया लड़ाई को लेकर एक नई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं जिसमें वह कह रहे थे कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान की सैन्य ताकत लगभग पूरी तरह खत्म हो गई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की आंतरिक रिपोर्ट इन दावों से अलग तस्वीर पेश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी काफी हद तक सुरक्षित है और उसके ज्यादातर मिसाइल ठिकाने फिर से सक्रिय हो चुके हैं।

क्या कह रही है अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट?

अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने रणनीतिक महत्व वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास मौजूद अपने 33 मिसाइल ठिकानों में से 30 पर दोबारा ऑपरेशन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की करीब 90 प्रतिशत अंडरग्राउंड मिसाइल फैसिलिटी अब 'पूरी तरह या आंशिक रूप से ऑपरेशनल' मानी जा रही हैं। इसका मतलब है कि ईरान अब भी मिसाइल लॉन्च करने और अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने की क्षमता रखता है।

ट्रंप प्रशासन लगातार क्या दावा कर रहा था?

ट्रंप प्रशासन लगातार यह कहता रहा कि अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान की सैन्य ताकत बुरी तरह टूट चुकी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ट्रंप दोनों ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि ईरान की सेना 'पूरी तरह कुचल दी गई' है। यह सैन्य अभियान 28 फरवरी को शुरू किया गया था, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया। इस अभियान में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया था।

Image Source : India TVअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की सैन्य क्षमता तबाह हो चुकी है।

ईरान के पास अब कितनी ताकत बची है?

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के बाद भी ईरान के पास उसकी लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर क्षमता बची हुई है। इसके अलावा, उसके पास युद्ध से पहले मौजूद मिसाइल भंडार का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अब भी सुरक्षित है। इसमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दोनों शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 33 में से 3 मिसाइल ठिकाने ही पूरी तरह निष्क्रिय हैं। बाकी सभी ठिकानों तक ईरान ने फिर से पहुंच बना ली है। इससे ईरान जरूरत पड़ने पर मोबाइल लॉन्चर तैनात कर सकता है या सीधे मौजूदा ठिकानों से मिसाइल दाग सकता है।

अमेरिका को यह जानकारी कैसे मिली?

अमेरिकी सैन्य खुफिया एजेंसियों ने सैटेलाइट तस्वीरों और निगरानी डेटा के आधार पर यह आकलन तैयार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपने ज्यादातर भूमिगत मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइटों तक दोबारा पहुंच बना ली है। बता दें कि पिछले हफ्ते 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि ईरान ने अपने लगभग 75 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और करीब 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार को सुरक्षित रखा है और युद्ध शुरू होने से पहले निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुकी कई मिसाइलों को पूरा भी कर लिया है।

Image Source : India TVईरान की अधिकांश मिसाइल क्षमता, ठिकाने और लॉन्च सिस्टम अब भी सक्रिय हैं।

अमेरिका को सता रही है किस बात की चिंता?

रिपोर्ट में सामने आई एक अहम जानकारी के मुताबिक, ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका ने बड़ी मात्रा में अपने आधुनिक हथियार इस्तेमाल किए। अमेरिका ने युद्ध के दौरान 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1300 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें और लगभग 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हथियारों के भंडार को दोबारा भरने में अमेरिका को कई साल लग सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ रही है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और युद्धविराम अभी भी काफी नाजुक माना जा रहा है।

ईरान के साथ जंग में आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के दावों पर नए सवाल खड़े कर सकती है। अगर ईरान की सैन्य ताकत वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में बची हुई है, तो पश्चिम एशिया में तनाव आगे भी बना रह सकता है। साथ ही, ईरान की मिसाइल क्षमता का बरकरार रहना अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है। माना जा रहा है कि लड़ाई लंबे समय तक जारी रहने पर अमेरिका को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।