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अफगानिस्तान के सामने पाक का सरेंडर! जानें उस शख्स के बारे में जिसने शरीफ और मुनीर की नाक में किया दम

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सरगना नूर वली महसूद पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। यह ऐसा खतरा है जो पाकिस्तान में सत्ता की जड़ों को हिला रहा है। चलिए ऐसे में आपको महसूद के बारे में बताते हैं।

Pakistan Taliban Clash- India TV Hindi
Image Source : AP Pakistan Taliban Clash

Pakistan Taliban Clash: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में भीषण झड़पें हुई हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच झड़पें तब शुरू हुई थीं जब अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तानी एयर फोर्स ने हवाई हमले किए थे। इन हमलों के बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सरगना नूर वली महसूद मारा गिराया है। पाकिस्तान के दावों की तब हवा निकल गई थी जब महसूद ने वीडियो जारी कर कहा थे कि वो पूरी तरह सेफ है। अब ऐसे में सवाल यह है कि आखिर नूर वली महसूद कौन है जिसे मारने के लिए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में बमबारी की थी। तो चलिए हम आपको नूर वली महसूद के बारे में बताते हैं जिसने पाकिस्तान की नाक में दम कर लिया है।

महसूद बना पाकिस्तान का सिरदर्द

नूर वली महसूद एक ऐसा शख्स है जिसने पाकिस्तान की सरकार, सेना और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है। महसूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मौजूदा मुखिया है। अफगानिस्तान की धरती से संचालित यह आतंकी संगठन आज पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। 

नूर वली महसूद कौन है?

नूर वली महसूद का पूरा नाम मुफ्ती नूर वली महसूद है। वह पाकिस्तान के दक्षिण वजीरिस्तान क्षेत्र के महसूद जनजाति से ताल्लुक रखता है, जो लंबे समय से पाकिस्तान के कबायली इलाकों में प्रभावशाली रही है। उसका जन्म लगभग 1978 के आसपास हुआ था। नूर वली ने धार्मिक शिक्षा हासिल की और बाद में एक मौलवी के रूप में उभरा। समय के साथ उसका रुझान कट्टरपंथ की ओर बढ़ा, और उसने अफगान तालिबान से प्रेरणा लेते हुए हथियार उठा लिए। धीरे-धीरे वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ऊंचे पदों तक पहुंच गया।

Image Source : apPakistan Taliban Clash

TTP में नूर वली का उदय

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की स्थापना 2007 में बेतुल्लाह महसूद ने की थी। उसके मारे जाने के बाद हकीमुल्लाह महसूद ने कमान संभाली और फिर 2018 में अमेरिकी ड्रोन हमले में हकीमुल्लाह के उत्तराधिकारी मौलाना फजलुल्लाह की मौत के बाद नूर वली महसूद को नया सरगना चुना गया। उस समय तक संगठन कमजोर पड़ चुका था, लेकिन नूर वली ने TTP को नई रणनीति और संगठनात्मक ढांचे से पुनर्जीवित किया। उसने स्थानीय कबायली इलाकों में अपने नेटवर्क को फिर से मजबूत किया और पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े हमलों की योजना बनाई।

TTP की नूर वली की रणनीति

नूर वली महसूद के नेतृत्व में TTP ने पहले की तरह अंधाधुंध हिंसा करने के बजाय टारगेट कर हमलों की नीति अपनाई। उसने खास तौर पर पाकिस्तान की सेना, पुलिस और गुप्तचर एजेंसियों को निशाना बनाया। नूर वली ने कबायली शासन की पुरानी परंपराओं को उभारते हुए लोगों के बीच यह प्रचार फैलाया कि पाकिस्तान सरकार ने पश्तून इलाकों के अधिकारों को छीन लिया है। नूर का यह कदम सफल रहा और उसने भारी संख्या में युवाओं को अपने पक्ष में कर लिया। नूर ने यह भी कहा कि उसका संगठन पाकिस्तान में 'इस्लामी कानून' लागू करने के लिए लड़ रहा है। यह वही झूठा नारा था जो पहले अफगान तालिबान ने इस्तेमाल किया था।

अफगानिस्तान में ठिकाने और पाकिस्तान की मुश्किलें

2021 में जब अमेरिकी सेनाएं अफगानिस्तान से लौटीं और तालिबान ने सत्ता संभाली, तो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को भी नई ताकत मिली। अफगानिस्तान के कंधार, कुनार और नंगरहार जैसे इलाकों में नूर वली महसूद के लड़ाकों को सुरक्षित ठिकाने मिलने लगे। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से कई बार शिकायत करते हुए कहा कि TTP उसके देश में हमले कर रही है, लेकिन काबुल की सरकार ने हर बार जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। नतीजा यह हुआ कि 2022 से 2025 के बीच पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पुलिस थानों, सेना के काफिलों और सीमा चौकियों पर लगातार हमले हुए है।

हार बार पाकिस्तान की सेना को मिली हार

नूर वली महसूद की अगुवाई में TTP अब एक संगठित गुरिल्ला फोर्स बन चुकी है। उसने कई छोटे-छोटे आतंकी गुटों को अपने झंडे के नीचे मिला लिया है। पाकिस्तान की सेना लगातार TTP के ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले करती रही है, लेकिन नूर वली हर बार बच निकलता है। उसकी पकड़ और प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि TTP के कमांडर उसे 'अमीर-ए-मुजाहिदीन' कहकर संबोधित करते हैं।

नूर वली महसूद पर लगे प्रतिबंध

अमेरिका ने 2019 में नूर वली महसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया और उसके सिर पर इनाम रखा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी उसे अल-कायदा से जुड़ा आतंकी बताया है। इसके बावजूद वह खुलेआम वीडियो जारी करता है, पाकिस्तान सरकार और सेना को चुनौती देता है और अफगान सीमा से अपने लड़ाकों को भेजकर हमले करवाता है।

Image Source : apPakistan Taliban Clash

पाकिस्तान नूर वली महसूद से क्यों डरता है?

  • कबायली इलाकों में गहरी जड़ें: महसूद जनजाति के कारण उसे स्थानीय समर्थन मिलता है।
  • अफगान तालिबान से करीबी: उसे अफगानिस्तान में सुरक्षा और संसाधन दोनों मिलते हैं।
  • नई तकनीक और मीडिया का उपयोग: सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रचार से युवाओं को आकर्षित करता है।
  • सेना और पुलिस पर केंद्रित हमले: वह सरकारी प्रतिष्ठानों को सीधे निशाना बनाता है, जिससे राज्य की छवि कमजोर होती है।

पाकिस्तान के गले की फांस बना आतंकवाद

पाकिस्तान कभी इन आतंकवादियों को अपने घर की जागीर मानता था। लेकिन, अब वही TTP उसके खिलाफ खड़ी है। सेना की नीतियां और दोहरे मानदंड अब उसके गले की फांस बन चुके हैं। नूर वली महसूद ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान ने जिसे पाल-पोसकर तैयार किया गया आतंकवाद का वही जिन्न अब बोतल से बाहर आ चुका है। नूर वली महसूद आज पाकिस्तान के लिए वैसा ही खतरा है, जैसा कभी ओसामा बिन लादेन अमेरिका के लिए था। महसूद ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गहरी चोट पहुंचाई है।

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