Explainer: चीन ने विश्व पटल पर आज अपनी खास पहचान बना ली है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में अपनी खास टीम लेकर बीजिंग पहुंचे थे और शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। ट्रंप गए और फिर रूस के राष्ट्रपति पुतिन शी जिनपिंग से मिलने पहुंचे। दुनिया के ताकतवर नेताओं का यूं चीन जाना और शी जिनपिंग से मुलाकात करना, कई मायनों में अहम है। अमेरिका की दादागिरी चीन के सामने चलती नहीं और रूस से चीन का पुराना नाता रहा है और दोनों की दोस्ती व्यापारिक रिश्तों में बार बार प्रगाढ़ता बढ़ाती है। पुतिन की शी जिनपिंग से मुलाकात की बात करें तो इसका औसत हर साल एक बार का होता है। अमेरिका से चीन के रिश्ते अलग हैं।
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ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात, क्या रहा खास
अब बात करें, हालिया मुलाकातों की तो ट्रंप अपने खास लोगों को साथ लेकर चीन पहुंचे थे। चीन पहुंचने पर उनका स्वागत उपराष्ट्रपति ने किया था। ट्रंप के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया और सम्मान के साथ वे शी जिनपिंग से मिले। दोनों नेताओं की इस मुलाकात पर हर किसी की नजर टिकी थी, क्योंकि इस बार के जिनपिंग के साथ हुई बैठक से ट्रंप को कई उम्मीदें थीं। लेकिन, चीन ने अमेरिका के मंसूबों पर एक तरह से पानी फेर दिया। चीन ने पहले ही कह दिया था कि वो ताइवाान को लेकर किसी तरह की बात नहीं करना चाहता। शी जिनपिंग की इस जिद से ट्रंप को करारा झटका लगा।
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जिनपिंग को आंख नहीं दिखा सकते ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने जब चीन पर टैरिफ लगाने की बात की तो चीन ने इसका भी जवाब दिया और ट्रंप की टैरिफ भी हवा हो गई। अमेरिका को चीन से मुख्य रूप से अरबों डॉलर के उपभोक्ता उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और औद्योगिक कल पुर्जे मिलते हैं। यह दोनों देशों के बीच दुनिया का सबसे बड़ा और जटिल व्यापारिक संबंध है। चीन दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है जिसका रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन और प्रसंस्करण पर दबदबा है। ये रेयर अर्थ मिनरल्स स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं। यही वजह है कि अमेरिका की किसी भी प्रतिबंध का चीन पर कोई असर नहीं होता।
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ट्रंप को चाहिए जिनपिंग का साथ
अमेरिका ने ईरान पर हमला तो कर दिया लेकिन अब वह इस युद्ध से बाहर निकलना चाहता है। इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता देख ट्रंप ने चीन से गुहार लगाई कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए मना ले। चीन ने हामी तो भर दी, लेकिन अब तक होर्मुज बंद है। हालांकि चीन के जहाज होर्मुज पार कर रहे हैं, अमेरिका के लिए रास्ते बंद हैं।
रूस और चीन की दोस्ती है खास
अब बात रूस की कर लें तो रूस और चीन की दोस्ती और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध जगजाहिर हैं। पुतिन का इस बार का चीन का दौरा कई मायनों में अहम रहा। ट्रंप के बाद चीन पहुंचे पुतिन के लिए भी रेड कार्पेट बिछाया गया लेकिन पुतिन को रिसीव करने के लिए शी जिनपिंग ने अपने खास शख्स को भेजा। पुतिन का भी खूब स्वागत सत्कार किया गया। दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए, जिसमें से अहम रहा साइबेरिया-2 डील, जो रूस और चीन के बीच प्रस्तावित एक विशाल प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना है, जो रूस की गैस को यूरोप के बजाय चीन और एशियाई बाजारों में भेजने की एक रणनीतिक पहल है। हालांकि ये डील अभी फाइनल नहीं हुई है।
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सुपर पावर बनने की राह पर चला चीन
शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान पुतिन ने उन्हें एक कविता सुनाई जो दोनों देशों की प्रगाढ़ दोस्ती को दर्शाती है। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने प्रेस को संबोधित किया। चीन से साफ शब्दों में कहा कि अब किसी की दादागिरी नहीं चलेगी। अमेरिका का बिना नाम लिए ही जिनपिंग ने ट्रंप को धो डाला। इस तरह से पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाने वाले पुतिन अब ऑन डिमांड हैं और पुतिन के साथ गलबहियां कर उन्होंने एक नई लकीर खींच दी है, जिससे लगता है कि अगला सुपर पावर बनने की राह पर चीन चल चुका है।