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Explainer: अंतरिक्ष से वापसी के बाद भी आसान नहीं होगी शुभांशु शुक्ला की राह, इन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर आ गए हैं। हालांकि, अंतरिक्ष से वापसी के बाद भी शुभांशु शुक्ला की राह आसान नहीं होगी। उन्हें कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।

Shubhanshu shukla earth- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV शुभांशु शुक्ला की वापसी।

भारतीय एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सोमवार को अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर आ गए हैं। जानकारी के मुताबिक, शुभांशु शुक्ला के स्पेसक्राफ्ट ने दोपहर करीब 3 बजे प्रशांत महासागर में कैलिफोर्निया के तट पर स्प्लैशडाउन किया। एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 18 दिन गुजारने के बाद शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री वापस लौट चुके हैं। सोमवार को शाम 4 बजकर 35 मिनट पर स्पेस X ड्रैगन अंतरिक्ष यान ISS से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अनडॉक हो गया था। हालांकि, अंतरिक्ष से वापसी के बाद भी शुभांशु शुक्ला फ्री नहीं होंगे। उन्हें कई अन्य जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ प्रक्रियाओं के बारे में।

अंतरिक्ष से वापसी के बाद क्या होगा?

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ड्रैगन ग्रेस कैप्सूल से समुद्र में उतरे। नासा की टीम ने रेस्क्यू शिप से उन्हें रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें कैप्सूल से निकाला गया। अब शुभांशु को नासा के आइसोलेशन सेंटर में ले जाया जाएगा। यहां शुभांशु एक हफ्ते तक आइसोलेशन में रहेंगे। अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के बाद आइसोलेशन जरूरी है। आइसोलेशन में जाने के बाद शुभांशु शुक्ला को और भी कई अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।

शुभांशु को आइसोलेशन में क्यों ले जाया जाएगा?

आपके मन में सवाल उठता है कि जब शुभांशु पृथ्वी पर वापस लौटेंगे तब उन्हें आइसोलेशन सेंटर में क्यों ले जाया जाएगा? तो आइए आपको इसका जवाब भी दे देते हैं। दरअसल, किसी भी एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस से लौटने के बाद आइसोलेशन में रहना जरुरी होता है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि स्पेस में जीरो ग्रैविटी में रहने के दौरान उनके शरीर में कई अंदरूनी बदलाव होते हैं जिसकी वजह से वो जब पृथ्वी पर लौटते हैं तो वो अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो पाते हैं, वो चलना भूल जाते हैं। उनका बॉडी का एम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके अलावा आइसोलेशन सेंटर में इस बात की जांच भी की जाती है कि स्पेस में रहने के दौरान उनके शरीर पर क्या-क्या असर होता है।  आइसोलेशन में मेडिकल, साइंटिफिक, साइकोलॉजिकल टेस्ट होते हैं। अंतरिक्ष में किसी अज्ञात जीवाणु-विषाणु के संक्रमण का खतरा तो नहीं है, इसकी भी जांच की जाती है।

Image Source : India TVशुभांशु को आइसोलेशन में क्यों रखा जाएगा।

आइसोलेशन में कब तक रहेंगे शुभांशु?

स्पेसक्राफ्ट से वापस आने के बाद शुभांशु शुक्ला तुरंत अपने घर नहीं जा सकेंगे। वो अगले कुछ एक हफ्ते तक नासा के आइसोलेशन सेंटर में रहेंगे। अंतरिक्ष में रहने से शरीर में बड़े अंदरूनी बदलाव होते हैं। अंतरिक्ष से लौटे यात्री के लिए धरती के हिसाब से शरीर ढालने के लिए ये आइसोलेशन जरूरी होता है क्योंकि अंतरिक्ष में शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। ग्रेविटी नहीं होने से एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष यान में तैरते रहते हैं। अंतरिक्ष यात्री सोने, चलने-फिरने, उठने-बैठने, खाने-पीने की आदतें, संतुलन खो देना, चीजें गिरा देने जैसी मामूली गलतियां करने लग जाते हैं।

अंतरिक्ष से आने के बाद शुभांशु शुक्ला में कई तरह के बदलाव हो सकते हैं। माइक्रोग्रेविटी की कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो सकता है। अंतरिक्ष में रहने की वजह से मांसपेशियां भी कमज़ोर हो सकती हैं, हड्डियों का घनत्व कम होता है। ब्लड प्रेशर और हार्ट बीट पर भी असर पड़ता है। साथ ही सीधे खड़े होने और चलने-फिरने में समस्या होती है।

Image Source : PTIशुभांशु शुक्ला को क्या समस्याएं आ सकती हैं।

शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में क्या-क्या किया?

शुभांशु शुक्ला ने 18 दिन की अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कई रिकॉर्ड भी बनाए। इस दौरान उन्होंने 76 लाख मील का सफर तय किया। उन्होंने ISS में 433 घंटे बिताए और साथ ही पृथ्वी के 288 चक्कर लगाए। एक्सिओम-4 मिशन के तहत शुभांशु ने इंडियन एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स​​ के 7 और NASA के 5 एक्सपेरिमेंट में हिस्सा लिया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में कई प्रयोग किए। इनमें माइक्रो algae पर एक्सपेरिमेंट शामिल है जिसके रिजल्ट्स भविष्य में बड़े स्पेस मिशन के लिए खाने के सामान, ऑक्सीजन और बायोफ़्यूल का सोर्स बन सकते हैं। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में जो एक्सपेरिमेंट्स किए हैं वो भारत के गगनयान मिशन में काम आएंगे। नासा ने बताया है कि ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट, ISS से 580 पाउंड से अधिक सामान के साथ लौटेगा। इसमें नासा का हार्डवेयर और इस मिशन के दौरान किए गए 60 से अधिक साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स के डेटा शामिल हैं।

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