टेक कंपनियों से डिजिटल सर्विस टैक्स वसूलने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार कहा है कि डिजिटल सर्विस टैक्स अल्फाबेट और मेटा जैसी बड़ी अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को गलत तरीके से निशाना बनाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ को लेकर दी गई एक नई धमकी ने एक बार फिर दुनियाभर में हलचल बढ़ा दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने शु्क्रवार को उन देशों के लिए चेतावनी जारी की, जो अमेरिकी टेक कंपनियों से डिजिटल सर्विस टैक्स वसूलते हैं। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाएगा, अमेरिका उस देश से आने वाली वस्तुओं पर सीधे-सीधे 100% का भारी-भरकम टैरिफ वसूलेगा। इतना ही नहीं, ट्रंप ने साथ ही ऐसे देशों के साथ मौजूदा ट्रेड एग्रीमेंट भी रद्द करने की धमकी दे डाली।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर किए गए पोस्ट में दी धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, "जो भी देश डिजिटल सर्विस टैक्स, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामान पर तुरंत 100% टैरिफ लगाया जाएगा। ये टैरिफ उस देश के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट से ऊपर होगा, चाहे वे लागू किए गए हों, उन पर साइन किए गए हों या नहीं।"
डिजिटल सर्विस टैक्स का कड़ा विरोधी रहा है ट्रंप प्रशासन
बताते चलें कि ट्रंप प्रशासन डिजिटल सर्विस टैक्स का कड़ा विरोधी रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार कहा है कि ये टैक्स अल्फाबेट (गूगल की पैरेंट कंपनी) और मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी) जैसी बड़ी अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को गलत तरीके से निशाना बनाता है।
क्या होता है डिजिटल सर्विस टैक्स
डिजिटल सर्विस टैक्स मुख्यतः मल्टी-नेशनल टेक कंपनियों से वसूला जाता है। इस सिस्टम के तहत, देश बाहरी टेक कंपनियों द्वारा अपने देश में कमाए जाने वाले रेवेन्यू पर टैक्स वसूला जाता है। ये टेक कंपनियां, दूसरे देशों में अपनी ऑनलाइन सेवाओं से मोटा पैसा कमाती हैं।
भारत पर क्या होगा ट्रंप की धमकी का असर
भारत पहले ही अपने 'इक्वलाइजेशन लेवी' (जिसे आमतौर पर "गूगल टैक्स" कहा जाता है) के दोनों हिस्सों को हटा चुका है। ये टैक्स मुख्य रूप से विदेशी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर लागू होता था, जिनमें अमेरिका में स्थित कंपनियां भी शामिल थीं। "गूगल टैक्स" भारत का इक्वलाइजेशन लेवी है, जिसे 2016 में ऑनलाइन विज्ञापन सेवाएं देने वाली गैर-निवासी डिजिटल कंपनियों को किए जाने वाले पेमेंट पर लागू किया गया था। ये लेवी 6% तय की गई थी और उन विदेशी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर लागू होती थी जो भारतीय व्यवसायों से विज्ञापन से कमाई करती थीं, भले ही भारत में उनकी कोई फिजिकल मौजूदगी न हो।
अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने के लिए भारत ने हटा दिया था डिजिटल सर्विस टैक्स
पिछले साल, फाइनेंस बिल, 2025 में बदलाव करके विदेशी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा दी जाने वाली डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर लगने वाली लेवी को 1 अप्रैल, 2025 से खत्म कर दिया गया था। इसे हटाने के समय सरकारी अधिकारियों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि टैक्स हटाने का फैसला आंशिक रूप से अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने के लिए लिया गया था। भारत पहले ही फाइनेंस एक्ट, 2024 के जरिए गैर-निवासी ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर लगने वाली 2% इक्वलाइजेशन लेवी को हटा चुका था।
यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के सिर आई नई टेंशन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ये घोषणा यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों द्वारा पिछले साल अमेरिका के साथ बातचीत के बाद हुए ट्रेड एग्रीमेंट को मंजूरी देने के एक दिन बाद आई है। ये एग्रीमेंट यूरोपीय आयात पर टैरिफ को 15% तक सीमित करता है। हालांकि, डिजिटल सर्विस टैक्स को इस एग्रीमेंट में शामिल नहीं किया गया था और ये अमेरिका और EU के बीच असहमति का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। चूंकि दुनिया की ज्यादातर बड़ी टेक कंपनियां अमेरिका में हैं, इसलिए ट्रंप का मानना है कि डिजिटल सर्विस टैक्स अमेरिकी एक्सपोर्ट के लिए रुकावटें पैदा करते हैं।
टेक कंपनियों के रेवेन्यू पर 3% का टैक्स लगाता है फ्रांस
इस महीने की शुरुआत में, उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर फ्रांस ने अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपना डिजिटल सर्विस टैक्स वापस नहीं लिया, तो वे फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 100% टैरिफ लगा देंगे। गौरतलब है कि फ्रांस ने 2019 में टेक कंपनियों द्वारा देश के अंदर कमाए गए रेवेन्यू पर 3% टैक्स लगाया था। इन कंपनियों में फेसबुक, अमेजन, एप्पल और गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट जैसी कई दिग्गज अमेरिकी कंपनियां भी शामिल हैं।
ट्रंप की धमकी पर आई यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया
ट्रंप की हालिया चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए, EU ने शुक्रवार को कहा कि वो "अपने अधिकारों और रेगुलेटरी आजादी की रक्षा के लिए तेजी से और मजबूती से जवाब देगा"। समाचार एजेंसी AFP ने यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता के हवाले से ये जानकारी दी थी। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस ने कई सालों से फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, स्पेन और कई अन्य यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि अगर वे डिजिटल सर्विस टैक्स लगाते हैं, तो उन्हें जवाबी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
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