Explainer: बारिश में क्यों डूब जाता है 'मिलेनियम सिटी' गुरुग्राम? जानिए किन वजहों से होता है जलभराव
बारिश में गुरुग्राम शहर के डूबने की बड़ी वजह है खराब टाउन प्लानिंग (शहरी योजना) और नाले-ड्रेनेज सिस्टम का ढहना। चौंकाने वाली बात ये है कि मामूली बारिश में भी गुरुग्राम जलभराव से जूझ रहा होता है।

गुरुग्राम: गुरुग्राम NCR का मिलेनियम सिटी कहलाने वाला इलाका है लेकिन हर बार जब बारिश होती है, तो ज़िंदगी थम-सी जाती है। ट्रैफिक जाम, जलभराव और अफरातफरी...ये सब अब आम नज़ारा बन चुका है। हैरानी की बात ये है कि शहर में सालाना सिर्फ़ 600 मिमी बारिश होती है, जबकि कोच्चि जैसे शहरों में 2000 मिमी से ज़्यादा होती है ऐसे में सवाल है कि फिर भी गुरुग्राम क्यों डूब जाता है?”
खऱाब टाउन प्लानिंग
हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ हुई उच्च-स्तरीय बैठक में असली समस्या स्पष्ट होकर सामने आई। बारिश में गुरुग्राम शहर के डूबने की बड़ी वजह है खराब टाउन प्लानिंग (शहरी योजना) और नाले-ड्रेनेज सिस्टम का ढहना। चौंकाने वाली बात ये है कि मामूली बारिश में भी गुरुग्राम जलभराव से जूझ रहा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर का ड्रेनेज फेलियर इंसानों की ही देन है।
नाले मलबे और अतिक्रमण से जाम
यहां के नाले मलबे और अतिक्रमण से जाम हैं। अरावली से आने वाले रन-ऑफ को रोकने वाले बांध नष्ट हो चुके हैं। कभी 60 प्राकृतिक नहरें थीं, जिनमें अब सिर्फ़ 4 बची हैं। 732 वर्ग किलोमीटर शहर में सिर्फ़ 40 किलोमीटर की ड्रेनेज लाइन काम कर रही है। ख़राब सड़क डिज़ाइन हालात और बिगाड़ देती है।”
इस संकट को प्रशासनिक नाकामी ने और बढ़ाया है। कई एजेंसियां काम करती हैं, लेकिन आपस में तालमेल नहीं है। 2016 से 500 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद असर नहीं दिखता। हर साल पम्प और टैंकर लगाए जाते हैं, लेकिन मूल समस्या जस की तस रहती है। तालाब और वेटलैंड नष्ट होने से गुरुग्राम ने पानी सोखने की अपनी प्राकृतिक क्षमता खो दी है, और साइबर सिटी अब हर मानसून में “फ्लड सिटी” बन चुकी है।
पानी भरने की मुख्य वजह
- बादशाहपुर नाले में मलबा, कचरा इस कदर है कि थोड़ी सी बारिश में ये नाला बैक फ्लो करने लगता है जिस वजह से सीवर से पानी बादशाहपुर गांव में आ जाता है और बादशाहपुर तहसील के सामने गांव में, शमशान घाट में कमर तक नाले का पानी जमा हुआ है।
- नालों से बांध का ख़त्म हो जाना: अरावली की पहाड़ियां पूरे गुरुग्राम को अर्धचंद्राकार आकार में घेरती हैं। बारिश में सारा पानी नीचे की ओर इकट्ठा होने लगता है। 19वीं सदी के अंत तक इस पहाड़ी के पानी को रोकने के लिए चकरपुर, घाटा, झारसा और वजराबाद जैसे एक दर्जन से अधिक बांध हुआ करते थे लेकिन वक्त के साथ तेजी से हो रहे शहरीकरण ने लगभग सभी बांधों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
- नाले के साइड में बिल्डर्स ने बिल्डिंग्स खड़ी कर दी है, जैसे जैसे पॉपुलेशन बढ़ी, इमारतें बनीं और बांध तोड़ दिए गए। जब गुरुग्राम बढ़ना शुरू हुआ, ड्रेनेज सिस्टम, मलबा सब नालों से भरता रहा।
- जलाशय ख़त्म हो गए। सड़क की बनावट सही से नहीं बनाई गई। जहां बांध होते थे, नाले पर अस्थाई मिट्टी की सड़क बना दी गई। चारो तरफ इमारतें है और नाले में कचरा होने से पानी जाता नहीं और सीवर फ्लो बैक करता है। यह जलजमाव का बड़ा कारण है।
- नगर निगम गुरुग्राम के संयुक्त आयुक्त प्रीतपाल सिंह ने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम की जो कमियां है उसपर कोशिश की जा रही है जलभराव की स्थिति ठीक हो सके। इस बार जो तस्वीरें आई उसमें पानी ज्यादा देर तक नही रुका। पहली बार इतनी ज्यादा बारिश हुई थी लेकिन पानी निकल गया। सड़कों पर कुछ गाड़िया खराब हो गई थी जिस वजह से लंबा जाम लगा।
- वहीं उन्होंने कहा कि मास्टर ड्रेन को लेकर कोशिश जारी है। सीवरेज पुराने डले हुए हैं और उनकी कैपेसिटी कम है। वहीं आबादी बढ़ गई है। इसका असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में कंक्रीट की वजह से धरती के अंदर पानी जा पाता है। जलाशय, बांध खत्म होने की वजह और समाधान पर उन्होंने कहा कि कोशिश कर रहे हैं कि जो नाले, बांध खत्म कर दिए बिल्डर ने उन्हें फिर से अस्तित्व में लाया जाए।