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Explainer: ग्राहकों को मिलेगा सस्ते लोन्स का तोहफा! RBI इस बार भी क्यों घटा सकता है ब्याज दरें?

जब रेपो रेट घटती है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है। इसका फायदा बैंक ग्राहकों को भी पहुंचाते हैं। वे होम लोन, पर्सनल लोन जैसे कई तरह के लोन्स पर ब्याज दरों को घटा देते हैं।

होम लोन, पर्सनल लोन- India TV Hindi
Image Source : FILE होम लोन, पर्सनल लोन

जल्द ही आपके होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन समेत सभी तरह के लोन्स पर ब्याज दरें घट सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति इस समय रेपो रेट पर फैसले को लेकर बैठक कर रही है। यह बैठक आज से शुरू हो गई है। इकोनॉमिस्ट्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि आरबीआई की यह समिति एक बार फिर रेपो रेट में कटौती का फैसला ले सकती है। इससे पहले की दो बैठको में आरबीआई ने रेट कट किया था। पिछली दो बैठकों में रेपो रेट को 0.50 फीसदी घटा दिया गया। इस बार भी 0.25 फीसदी के रेट कट की उम्मीद है। इस रेट कट से रेपो रेट घटकर 5.75 फीसदी रह जाएगी।

क्या होती है रेपो रेट?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को लोन देता है। जब रेपो रेट घटती है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है। इसका फायदा बैंक ग्राहकों को भी पहुंचाते हैं। वे होम लोन, पर्सनल लोन जैसे कई तरह के लोन्स पर ब्याज दरों को घटा देते हैं। वहीं, जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक भी लोन्स पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। आरबीआई महंगाई और जीडीपी ग्रोथ जैसे कई फैक्टर्स को देखते हुए रेपो रेट में बदलाव करता है। जब महंगाई काफी अधिक बढ़ जाती है, तो उसे कंट्रोल करने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ा देता है। रेपो रेट बढ़ने से लोन महंगा होता है। इससे मार्केट में लिक्विडिटी कम होती है और महंगाई घटती है। वहीं, आरबीआई जीडीपी ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए रेपो रेट में कटौती करता है। रेपो रेट घटने से मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे जीडीपी ग्रोथ में तेजी आती है।

RBI MPC बैठक रेपो रेट बदलाव
9 अप्रैल 2025 6% -0.25%
7 फरवरी 2025 6.25% -0.25%
6 दिसंबर 2024 6.5%    -
9 अक्टूबर 2024 6.5%    -
8 अगस्त 2024 6.5%    -

 

घटती महंगाई और धीमी जीडीपी ग्रोथ

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में यह समिति 6 जून को अपना फैसला सुनाएगी। इस समय रेपो रेट 6 फीसदी है। महंगाई में कमी आने से आरबीआई के पास रेट कर करने की गुंजाइश है। साथ ही बिगड़ती वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थितियों के बीच घरेलू विकास को बढ़ावा देने के लिए आगे मौद्रिक सपोर्ट की उम्मीद बढ़ रही है। आरबीआई का उदार रुख मुख्य रूप से दो व्यापक आर्थिक संकेतकों से प्रेरित है: घटती महंगाई और सायक्लिकल स्लोडाउन के संकेत। खुदरा महंगाई लगातार आरबीआई के 4 फीसदी के मीडियम टर्म टार्गेट से नीचे बनी हुई है। जबकि हालिया अमेरिकी नीतिगत कदमों से व्यापार बाधित होने जैसे बाहरी झटकों के कारण जीडीपी ग्रोथ नरम होती दिख रही है। कई रेटिंग एजेंसियों और वैश्विक संस्थानों ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमानों को घटा दिया है। हालांकि, आरबीआई ने अप्रैल में अपना 6.5 प्रतिशत का ग्रोथ अनुमान बनाए रखा। वहीं, दूसरों ने अनुमानों को संशोधित करके 6 फीसदी से 6.3 फीसदी तक ला दिया है।

क्या है आरबीआई का इरादा?

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने कहा, "एमपीसी ने स्पष्ट रूप से तटस्थ से उदार रुख में सिफ्ट किया है। यह आरबीआई के लिक्विडिटी इंजेक्ट करने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के इरादे को दर्शाता है। अप्रैल की खुदरा महंगाई का 3.2 फीसदी तक कम होना रेट कट के अनुमान को और मजबूत करता है। महंगाई दर जुलाई 2019 के बाद से सबसे कम है और आरबीआई के कंफर्ट जोन में बनी हुई है।" महंगाई के स्थिर रहने की उम्मीद, विकास गति में कमी आने और बाहरी कमजोरियां बनी रहने के साथ एक और रेट कट के लिए माहौल अधिक अनुकूल होता जा रहा है। एक नई एसबीआई रिपोर्ट ने तो जून की आरबीआई एमपीसी बैठक में 0.50 फीसदी के भारी रेट कट का अनुमान लगाया है।

एफडी पर मिलेगा कम ब्याज

रेपो रेट में कटौती के साथ ही जमा पर ब्याज दरें भी घटती हैं। ऐसे में बैंक आने वाले दिनों में एफडी पर ब्याज दरों को घटा सकते हैं। बैंकों ने पहले ही बचत खातों पर ब्याज दरों को 2.70 प्रतिशत की न्यूनतम दर तक कम कर दिया है। साथ ही, फरवरी 2025 से सावधि जमा (एफडी) दरों में 30-70 आधार अंकों (0.70%) तक की कमी की गई है।