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Explainer: क्या 'ताबूत' की चेतावनी के बीच अमेरिका ईरान पर ज़मीनी हमला करेगा? समझिए डोनाल्ड ट्रंप का असली गेम प्लान

ईरान युद्ध के एक महीने पूरे हो चुके हैं लेकिन यह किस रूप में ढलेगा कह पाना मुश्किल है। अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है जबकि ईरान अमेरिकी सैनिकों को ताबूत में वापस भेजने की धमकी दे रहा है।

US Iran war- India TV Hindi
Image Source : AP हमले की तस्वीर

खाड़ी के पूरे इलाके में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका के ईरान की बात नहीं बन पा रही है। इस बीच अमेरिका पश्चिम एशिया में और सैनिक भेजता जा रहा है। यह युद्ध पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है। अभी तक इस बात कोई साफ संकेत नहीं है कि यह संघर्ष किस दिशा में जा रहा है। अमेरिका ने जहां खाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है वहीं ईरान अमेरिकी सैनिकों को ताबूत में वापस भेजने की धमकी दे रहा है। क्या कोई समाधान नज़दीक है, या पश्चिम एशिया क्षेत्र में और हमले होंगे और ज़्यादा जान-माल का नुकसान होगा?

खाड़ी में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की परेशान बढ़ा दी है। स्ट्रेट होर्मुज़ ॉके बंद होने से, भारत सहित वे देश जो ईरान द्वारा नियंत्रित इस संकरे रास्ते से गुज़रने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं, अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

यह युद्ध किस दिशा में जा रहा है?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ईरान पर संभावित ज़मीनी हमले के लिए मध्य पूर्व में 10,000 सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस रिपोर्ट के बाद, ईरान ने अपने राष्ट्रीय अंग्रेज़ी दैनिक, तेहरान टाइम्स के ज़रिए अमेरिका को चेतावनी जारी की। अखबार के पहले पन्ने पर अमेरिकी सैनिकों की एक तस्वीर छपी थी, जिसमें वे एक जहाज़ पर चढ़ रहे थे, और उसके नीचे यह कैप्शन लिखा था: "नर्क में आपका स्वागत है। जो अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर कदम रखेंगे, वे सिर्फ़ ताबूतों में ही वापस जाएंगे।"

क्या अमेरिका सच में ईरान पर ज़मीनी हमला कर रहा है?

ब्लूमबर्ग के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पेरिस में G7 बैठक के समापन के बाद पत्रकारों से कहा कि युद्ध को खत्म होने में महीनों नहीं, बल्कि हफ़्ते लगेंगे। ईरान में ज़मीनी हमले के लिए अमेरिकी सैनिकों को भेजने की रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ज़मीन पर सैनिक भेजे बिना भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सैनिकों की मौजूदगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई विकल्प देती है।

Image Source : APउड़ान भरता फाइटर जेट

रूबियो ने पत्रकारों से कहा, "राष्ट्रपति को कई तरह की आपात स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा, जिनके बारे में मैं मीडिया में चर्चा नहीं करूंगा।" ब्लूमबर्ग ने रूबियो के हवाले से कहा, "हम ज़मीनी सैनिकों के बिना भी अपने सभी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। लेकिन हम हमेशा राष्ट्रपति को ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प और ज़्यादा से ज़्यादा अवसर देने के लिए तैयार रहेंगे, ताकि ज़रूरत पड़ने पर वे आपात स्थितियों के हिसाब से फ़ैसले ले सकें।"

मध्य पूर्व में 3,500 मरीन सैनिक पहुंचे

शनिवार, 29 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने X पर बताया कि 3,500 मरीन सैनिक और सेलर मध्य पूर्व में पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि US रक्षा विभाग इस इलाके में कुल 5,000 सैनिक दो बैच में भेजने पर विचार कर रहा है। पहला बैच शनिवार को पहुंच गया, जबकि दूसरे बैच के आने में ज़्यादा समय लगने की उम्मीद है।

इस बीच, ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ़ ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान इस महीने भर से चल रही जंग को खत्म करने के लिए 'इसी हफ़्ते' वॉशिंगटन से बातचीत करेगा। मियामी में एक बिज़नेस फ़ोरम में विटकॉफ़ ने कहा, "हमें लगता है कि इस हफ़्ते बैठकें होंगी; हमें पक्का उम्मीद है।" उन्होंने आगे कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि तेहरान US की 15-सूत्रीय शांति योजना पर जवाब देगा। "इससे सारी समस्याएं हल हो सकती हैं।"

ट्रंप ने ईरान के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने पर राज़ी होने या फिर अपने पावर इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हमले झेलने की समय सीमा दस दिन बढ़ाकर 6 अप्रैल तक कर दी थी। तब तक अमेरिका ज़्यादा सैनिक तैनात करके ईरान पर दबाव बढ़ाता दिख रहा है, और उससे शांति योजना पर जवाब देने की अपील कर रहा है।

ज़मीनी हमले के लिए US द्वारा सैनिक भेजने पर ईरान का क्या जवाब है?

पिछले एक हफ़्ते में ट्रंप ने कई बयान दिए हैं जिनमें उन्होंने कहा है कि वह जंग को खत्म करने के लिए ईरान के एक ताक़तवर नेता के साथ लगातार संपर्क में हैं, लेकिन तेहरान ने बार-बार ऐसे दावों से इनकार किया है। ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के अनुसार रविवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने US और इज़रायल पर कूटनीति की आड़ में 'ज़मीनी हमले' की साज़िश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

Image Source : APतेहरान में हमले के बाद की तस्वीर

ग़ालिबफ़ ने अमेरिका के दोहरे रवैये की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां एक तरफ़ वे शांति की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वे इस इलाके में और ज़्यादा सैनिक भेज रहे हैं। ANI के अनुसार, उन्होंने ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' से कहा, "दुश्मन बातचीत की बात करता है, लेकिन ज़मीनी हमले की साज़िश रचता है। US 15-सूत्रीय सूची के ज़रिए वह हासिल करना चाहता है जो वह जंग में नहीं जीत सका। हमारी सेनाएं तैयार हैं, और हम कभी भी अपमानित नहीं होंगे।"

ट्रंप कब कौन सा फैसला लेंगे मौजूदा हालात में कह पाना मुश्किल है। क्योंकि ईरान युद्ध में वह पूरी तरह से घिर चुके हैं। वापस लौटने का कोई रास्ता भी सूझ नहीं रहा है। अब खाड़ी में अतिरिक्त फोर्स भेजकर ईरान पर प्रेशर डालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ईरान जल्दी से समझौते के लिए राजी हो जाए और उन्हें इस युद्ध से वापस लौटने की राह मिल सके। लेकिन ईरान आखिरी दम तक लड़ने की अपनी इच्छा जता चुका है। ऐसे में फिलहाल कुछ भी कह पाना मुश्किल है कि यह युद्ध किस रूप में ढल सकता है।