Fact Check: क्या जावेद अख्तर ने हिजाब विवाद पर नीतीश कुमार का समर्थन किया, वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि जावेद अख्तर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया कदम का समर्थन किया है।

Fact Check: आज के सोशल मिडिया दौर में सूचनाओं का प्रवाह जितना तेज हुआ है, भ्रामक जानकारियों का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है। अब सोशल मडिया पर किसी भी बात को गलत दावे के साथ पेश करना बहुत ही आसान है, जो समाज के लिए अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक भी साबित हो सकता है। इन्हीं भ्रामक दावों की सच्चाई आप तक पहुंचाने के लिए India TV फैक्ट चेक लेकर आता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया कदम का समर्थन किया है।
क्या हो रहा है वायरल?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर को हिजाब और चेहरा ढकने की परंपरा पर टिप्पणी करते देखा जा सकता है। इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि जावेद अख्तर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचे जाने की घटना का समर्थन किया है।
वायरल वीडियो में दावा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और एक्स पर 17 दिसंबर 2025 के आस-पास एक वीडियो क्लिप शेयर की गई। यूजर ने कैप्शन में लिखा, "नीतीश कुमार ने जो किया सही किया, चेहरा ढकने की क्या ज़रूरत- जावेद अख़्तर।" इस पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जावेद अख्तर ने नीतीश कुमार के हालिया विवादित कदम को सही ठहराया है।
जांच और सच्चाई
India TV ने जब इस दावे की पड़ताल की, तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ी घटना 15 दिसंबर 2025 को पटना में एक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान हुई थी। वहीं, जावेद अख्तर का वायरल वीडियो 29 नवंबर 2025 का है यानी यह घटना होने से करीब दो सप्ताह पहले का है।
गूगल रिवर्स इमेज सर्च और की-फ्रेम विश्लेषण के जरिए पता चला कि यह क्लिप 'SOA Literary Festival' के एक सत्र की है। 29 नवंबर को यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस मूल वीडियो में जावेद अख्तर एक महिला के सवाल का जवाब दे रहे थे। वीडियो में जावेद अख्तर ने किसी नेता या विशेष घटना का जिक्र नहीं किया था। उन्होंने सामाजिक दृष्टिकोण से शालीन कपड़ों और चेहरा ढकने की अनिवार्यता पर सामान्य वैचारिक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, "महिला के चेहरे में ऐसा क्या है जो आपत्तिजनक माना जाए? यह एक तरह का सामाजिक दबाव है।"
जांच में यह भी सामने आया कि जावेद अख्तर ने 18 दिसंबर को अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन करने के बजाय, इस मामले में मुख्यमंत्री द्वारा माफी मांगे जाने का जिक्र किया था।