1 मई से होने जा रहे हैं ये फाइनेंशियल बदलाव, आपकी जेब से हैं जुड़े

1 मई 2026 से कई अहम वित्तीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा। ये बदलाव सुरक्षा बढ़ाने, पारदर्शिता लाने और सिस्टम को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
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1 मई 2026 से कई अहम वित्तीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा। ये बदलाव सुरक्षा बढ़ाने, पारदर्शिता लाने और सिस्टम को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपने क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत रिवॉर्ड प्वाइंट्स के इस्तेमाल और फीस स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया है, जिससे औसतन के लिए प्वाइंट्स को क्रेडिट में बदलने के तरीके बदल सकते हैं।
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डिजिटल पेमेंट को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत अब सभी ऑनलाइन लेनदेन में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य हो गया है। यानी अब UPI, वॉलेट और कार्ड पेमेंट के लिए OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा।
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बड़ी राशि के लेनदेन पर निगरानी भी सख्त कर दी गई है। नए नियमों के तहत ₹10 लाख से अधिक के नकद लेनदेन या निर्धारित सीमा से ज्यादा के क्रेडिट कार्ड भुगतान पर PAN अनिवार्य कर दिया गया है और इसकी जानकारी सीधे आयकर विभाग को भेजी जाएगी।
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बैंकों ने ATM इस्तेमाल से जुड़े नियम भी कड़े किए हैं। HDFC Bank और Bandhan Bank जैसे बैंकों ने UPI के जरिए कैश निकासी को भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल किया है। तय सीमा (आमतौर पर 5 ट्रांजैक्शन) के बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर ₹23 का शुल्क लगेगा, जबकि कम बैलेंस के कारण फेल ट्रांजैक्शन पर लगभग ₹25 का चार्ज देना होगा।