ये आदतें आपकी किडनी को करती हैं डैमेज, हो जाएं सावधान

 किडनी हमारे शरीर का बहुत ज़रूरी अंग हैं जो शरीर से वेस्टेज को फ़िल्टर करती है, इलेक्ट्रोलाइट्स को कंट्रोल करती हैं, ब्लड प्रेशर को बनाए रखती हैं, और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग 10% आबादी एक 'साइलेंट किलर' यानी क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ के साथ जी रही है। हालांकि, किडनी खराब होने के ज़्यादातर जाने-पहचाने कारण डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन हैं, लेकिन स्टडीज़ से पता चला है कि कुछ रोज़ाना की आदतें समय के साथ किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं। चलिए जानते हैं वे आदतें कौन सी हैं?
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किडनी हमारे शरीर का बहुत ज़रूरी अंग हैं जो शरीर से वेस्टेज को फ़िल्टर करती है, इलेक्ट्रोलाइट्स को कंट्रोल करती हैं, ब्लड प्रेशर को बनाए रखती हैं, और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग 10% आबादी एक 'साइलेंट किलर' यानी क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ के साथ जी रही है। हालांकि, किडनी खराब होने के ज़्यादातर जाने-पहचाने कारण डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन हैं, लेकिन स्टडीज़ से पता चला है कि कुछ रोज़ाना की आदतें समय के साथ किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं। चलिए जानते हैं वे आदतें कौन सी हैं?
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ज़्यादा नमक वाला खाना: ज़्यादा नमक वाला खाना किडनी पर ज़ोर डालता है और हाइपरटेंशन का कारण बनता है। लोगों को रोज़ाना 5 ग्राम से ज़्यादा नमक नहीं खाना चाहिए।ज़्यादा नमक खाने का असर यह होता है कि शरीर सोडियम को पतला करने के लिए पानी जमा करने लगता है। बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की उन छोटी-छोटी खून की नसों को नुकसान पहुँचा सकता है जो खून को छानने का काम करती हैं। 'जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ नेफ़्रोलॉजी' के अनुसार नमक का ज़्यादा सेवन करने से हाइपरटेंशन के मरीज़ों में किडनी के काम करने की क्षमता तेज़ी से कम हो सकती है।
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दर्द निवारक दवाओं का ज़्यादा इस्तेमाल: आइबुप्रोफ़ेन और डाइक्लोफ़ेनैक जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ़्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) का ज़्यादा इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, ऐसी दवाओं का ज़्यादा इस्तेमाल प्रोस्टाग्लैंडिंस में रुकावट डालकर किडनी तक खून के बहाव को कम कर देता है।
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पानी का कम सेवन: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से ज़हरीले पदार्थ पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं। पानी की कमी से पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। इससे किडनी में मिनरल्स की मात्रा बढ़ सकती है। एक स्टडी के अनुसार, पानी का कम सेवन किडनी में पथरी होने का खतरा बढ़ा सकता है।
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लंबे समय तक नींद की कमी: नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ (NIH) द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया कि "नींद की खराब क्वालिटी या हर रात छह घंटे से कम सोना किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है। स्टडी में पाया गया कि नींद की कमी शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकती है, जो किडनी के ठीक से काम करने के लिए ज़रूरी है।