खोखली और कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आजमाएं ये उपाय

उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे हड्डियों का घनत्व कम कम होता है जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।  हड्डियों के कमजोर होने से लोग ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार होने लगते हैं। इसके अलाव हड्डियों के कमजोर होने के पीछे सबसे बड़ी वजह खराब खान-पान और व्यायाम की कमी भी है।  गठिया से जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में हड्डियां मजबूत बने इसलिए इन कुछ चीज़ों को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें।
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उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे हड्डियों का घनत्व कम कम होता है जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। हड्डियों के कमजोर होने से लोग ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार होने लगते हैं। इसके अलाव हड्डियों के कमजोर होने के पीछे सबसे बड़ी वजह खराब खान-पान और व्यायाम की कमी भी है। गठिया से जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में हड्डियां मजबूत बने इसलिए इन कुछ चीज़ों को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें।
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हड्डियों को मजबूत रखने के लिए अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों, डेयरी प्रोडक्ट्स और दूध को शामिल करें। अंडे, मशरूम जैसे फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ विटामिन डी से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। डॉक्टर से बातचीत कर आप कैल्शियम और विटामिन डी का सप्लीमेंट भी शुरू कर सकते हैं। साथ ही नियमित रूप से कैल्शियम और विटामिन डी का टेस्ट करवाएं।
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नियमित व्यायाम से हड्डियाँ मजबूत बनती हैं। इसलिए रोज़ाना वॉक या एक्सरसाइज़ करें। एक्सरसाइज़ ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना को कम कर सकती हैं, और गठिया के दर्द को कम करने में भी मदद करेंगी। स्ट्रेचिंग और संतुलन व्यायाम बॉडी को फेल्क्सिबल बनाता है। तैराकी और साइकिलिंग भी जोड़ों के दर्द को कम करता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम पाँच दिन 30 मिनट व्यायाम ज़रूर करें।
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ज़्यादा वजन बढ़ने से भी हड्डियां कमजोर होने लगती है। दरअसल, ज़्यादा वजन बढ़ने जोड़ों पर दबाव पड़ता है। मोटापे से जोड़ों में मौजूद कार्टिलेज खराब हो सकता है और गठिया, दर्द और चोट की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए हड्डियों को मजबूत बनने के लिए मोटापा कम करें, साथ ही, बैठते समय सही मुद्रा बनाए रखें और झुकने से बचें जिससे पीठ और गर्दन में दर्द हो सकता है। काम पर लंबे समय तक न बैठें और समय-समय पर स्ट्रेचिंग या वॉक करें।
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धूम्रपान और शराब जैसी आदतें ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड आर्थराइटिस दोनों के जोखिम को बढ़ाती हैं और जोड़ों में दर्द का कारण बनती हैं। धूम्रपान से शरीर में सूजन और कार्टिलेज का नुकसान होगा। धूम्रपान और शराब पीना छोड़ना और अपनी हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना बेहतर है।