डायबिटीज से बचे रहने के लिए कराएं ये टेस्ट, पता चल जाएगा इंसुलिन रेजिस्टेंस

इंसुलिन शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है तो इससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय समय पर इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच करवाते रहना चाहिए।
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इंसुलिन शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है तो इससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय समय पर इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच करवाते रहना चाहिए।
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सही समय पर इंसुलिन सेंसिटिविटी का पता चल जाए तो डायबिटीज के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। इसके लिए HOMA-IR, फास्टिंग इंसुलिन और OGTT टेस्ट करवा सकते हैं। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का पता लगाना आसान हो जाता है।
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शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस का पता लगाने के लिए होमियोस्टेटिक मॉडल असेसमेंट फॉर इंसुलिन रेजिस्टेंस (HOMA-IR) टेस्ट कराया जाता है। इसके लिए खाली पेट ब्लड सैंपल देना होगा। इससे फास्टिंग ग्लूकोज और फास्टिंग इंसुलिन के बीच का अंतर निकाला जाता है।
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अगर आपके HOMA-IR टेस्ट के बाद स्कोर 1.9 से कम आया को इसे नॉर्मल माना जाता है। यही स्कोर 1.9 से 2.9 के बीच है तो अर्ली रेजिस्टेंस है। वहीं स्कोर 2.9 से ऊपर है तो इसे गंभीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत माना जाता है।
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डॉक्टर की मानें तो टेस्ट के अलावा भी कुछ लक्षण शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत देते हैं। जैसे अगर पुरुष की कमर 40 इंच और महिला की कमर 35 इंच से ज्यादा है तो इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। किसी की गर्दन के पीछे कालापन है या बगल काली हो रही है। खाते ही नींद आना और पेट भरा होने के बाद भी मीठा खाने की क्रेविंग भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकते हैं।