PHOTOS: सीपी राधाकृष्‍णन से जुड़ी ये बातें जानते हैं आप? NDA ने उपराष्‍ट्रपत‍ि पद के ल‍िए बनाया है उम्मीदवार

सीपी राधाकृष्णन मूल रूप से तमिलनाडु से आते हैं। उनका जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में 1957 को हुआ। वह इस समय 68 साल के हैं। वह कोयंबतूर से दो बार लोकसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं और बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे हैं। वह तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
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सीपी राधाकृष्णन मूल रूप से तमिलनाडु से आते हैं। उनका जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में 1957 को हुआ। वह इस समय 68 साल के हैं। वह कोयंबतूर से दो बार लोकसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं और बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे हैं। वह तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
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सीपी राधाकृष्‍णन वर्तमान में महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल हैं। इससे पहले वह झारखंड के राज्यपाल रह चुके हैं। उनके पास तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी था। इसके अलावा वह पुडुचेरी के उपराज्यपाल भी रहे हैं।
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तमिलनाडु में अगले कुछ महीनों बाद चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में तमिलनाडु के एक नेता को NDA द्वारा उपराष्‍ट्रपत‍ि पद के ल‍िए उम्मीदवार बनाना ये दर्शाता है कि बीजेपी तमिलनाडु में आगामी चुनावों को लेकर अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है।
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सीपी राधाकृष्‍णन ओबीसी समुदाय से आते हैं और गाउंडर जाति से हैं। गाउंडर में एक उपजाति है जिसका नाम कोंगु वेल्लालर है। राधाकृष्णन इस उपजाति से हैं। ये उपजाति मूलतः खेती किसानी से जुड़ी है। पश्चिमी तमिलनाडु जिसे कोंगु रीजन भी कहा जाता है वहां इस जाति का दबदबा है। अन्नामलई और AIADMK नेता E पलनीस्वामी भी इसी जाति से हैं।
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AIADMK के साथ गठबंधन के लिए EPS के दबाव में आकर जब BJP ने, प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अन्नामलई को बदल दिया तब से ये चर्चा थी कि इस उपजाति के वोट BJP से दूर जा सकते हैं। तमिलनाडु में अगले साल चुनाव हैं। ऐसे में CPR को उपराष्ट्रपति बनाने का कदम एक डेमेज कंट्रोल है।
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सीपी राधाकृष्‍णन पुराने संघी हैं। वह 16 साल की उम्र में ही संघ, जनसंघ से जुड़ गए थे। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और केरल में भाजपा को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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सीपी राधाकृष्णन की स्पोर्ट्स में भी खासी रुचि रही है। वह कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस में चैंपियन रहे हैं और लंबी दूरी के धावक भी थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी शौक है।
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कहा जा रहा है कि संघ से बचपन से जुड़ाव की वजह से वह एक भरोसेमंद चेहरा थे, जिस पर मोदी और शाह की जोड़ी ने अपने भरोसे की मुहर भी लगा दी और तमिलनाडु में होने वाले चुनाव से पहले एक बाजी भी खेल ली।