गुरुग्रामः हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने सोमवार को पीड़ित बनकर आम आदमी की तरह साइबर क्राइम थाने पहुंच गए। सादे कपड़े में डीजीपी ओपी सिंह निजी कार से साइबर थाने पहुंचे तो गेट पर मौजूद सिपाही ने उन्हें पहचान नहीं पाया और पूछा आप क्या करने आए हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि मुझे डिजिटल अरेस्ट का मुकदमा दर्ज करवाना है। इसके बाद गेट पर मौजूद सिपाही ने डीजीपी से कहा कि आप सेकेंड फ्लोर पर 24 नंबर कमरे में चले जाइए।
डीजीपी को देखते ही पहचान गए पुलिसकर्मी
ऑफिशियल बयान के मुताबिक, ड्यूटी पर मौजूद संतरी ने प्रोटोकॉल का पालन किया और शिकायत का प्रोसेस समझाने के बाद डीजीपी को जांच अधिकारी के पास भेज दिया। जब डीजीपी सादी वर्दी में अंदर गए तो वहां से एक वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जैसे ही ओपी सिंह 24 नंबर कमरे में पहुंचते हैं। वहां करीब 4-5 आदमी लोग थे। इनमें कुछ शिकायतकर्ता भी मौजूद था। कमरे में एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी था। ओपी सिंह कमरे में घुसते ही पूछते हैं, ‘हां भाई, ड्यूटी अफसर कौन है यहां? डीजीपी को देखते ही लाल स्वेटर पहना हुआ व्यक्ति सावधान की मुद्रा में तनकर खड़ा हो गया। पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। सब सतर्क हो गए। जैसे सामने वाले पुलिसकर्मी अपने डीजीपी को पहचान गए..।
इसके बाद डीजीपी हंसते हुए बोले- पहचान गए मुझे...सामने वाले व्यक्ति ने हां में जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को बैठने को कहते हैं। थोड़ी देर में सीपी, डीसीपी, एसीपी, एसएचओ, डीए एक-एक कर पहुंचें।
डीजीपी ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार की तारीफ की
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्शन करने के बाद हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि मैं एक प्राइवेट कार में आया था और नीचे खड़े एम्प्लॉई ने मुझे पहचाना नहीं। लेकिन उसने अच्छे से बात की, पूछा कि मैं वहां क्यों आया हूं। मैंने कहा, मुझे डिजिटल अरेस्ट केस फाइल करना है। मेरा एक्सपीरियंस है कि अगर कोई आपको फ्रॉड करने की कोशिश करता है, खासकर साइबर क्राइम में तो मुझे लगता है कि अगर आप साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जाते हैं, तो आप देखेंगे कि वहां क्या होता है। यह बहुत अच्छा पुलिस स्टेशन है, यहां बहुत अच्छे लोग हैं। अगर कोई आपको साइबर क्राइम फ्रॉड की धमकी देने की कोशिश करता है तो आप 1930 पर कॉल कर सकते हैं।
साइबर ठगी की शिकार होने पर क्या करें
डीजीपी ने कहा कि फ्रीज़ हुए छोटे अमाउंट वाले मामले में बग़ैर FIR के आईओ लोक अदालत से कंप्लेनेंट को पैसे वापस दिलाएगा। हेडबॉयज़ एवं गर्ल्स का स्पाइकमैके के सहयोग से एक नेटवर्क बनाया जाएगा जो इवेंट के माध्यम से साइबरक्राइम एवं ड्रग के बारे में इन Gen Alpha के उत्साही बच्चों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेगा। एक फीडबैक आया कि लोक अदालत में चालान का रिकॉर्ड महीनों-महीनों नहीं पहुँचता। मैंने सीपी, गुरुग्राम को कहा कि इसका निदान करें। मैंने आईजी, साइबर को कहा कि हर सप्ताह कम से कम एक साइबर थाना विजिट करें। साइबरक्राइम के शिकार के किसी तीन समस्या को पहचान कर उसका निदान करें।