नई दिल्ली: देश का औद्योगिक उत्पादन फरवरी 2015 में साल-दर-साल आधार पर पांच फीसदी बढ़ा, जो नौ महीने का उच्चस्तर है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापी जाने वाली औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जनवरी 2015 में 2.6 फीसदी थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक, अप्रैल-फरवरी 2014-15 की पूरी अवधि के लिए आईआईपी वृद्धि दर 2.8 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह नकारात्मक 0.1 फीसदी थी।
शुक्रवार को जारी आंकड़े के मुताबिक, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु का उत्पादन 3.4 फीसदी कम रहा।
इस दौरान उपभोक्ता वस्तु और आधारभूत वस्तु का उत्पादन क्रमश: 5.2 फीसदी और पांच फीसदी बढ़ा।
फरवरी में बिजली उत्पादन 5.9 फीसदी बढ़ा, विनिर्माण उत्पादन 5.2 फीसदी बढ़ा और खनन उत्पादन 2.5 फीसदी बढ़ा।
अप्रैल-फरवरी अवधि में विनिर्माण उत्पादन 2.2 फीसदी, खनन उत्पादन 1.5 फीसदी और बिजली उत्पादन 9.1 फीसदी बढ़ा।
पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष आलोक बी. श्रीराम ने कहा, "दर में वृद्धि उत्सावर्धक है और यह संकेत करती है कि कारोबारी माहौल बेहतर हो रहा है। हाल के महीनों में पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में तेजी से संकेत मिलता है कि निवेश का पहिया सकारात्मक दिशा में घूम रहा है।"
भारतीय उद्योग परिसंघ के मुताबिक, आंकड़ा बाजार के अनुमान से बेहतर है और इससे संकेत मिलता है कि औद्योगिक तेजी मजबूती से जड़ जमा रही है और निवेश में तेजी आएगी।
परिसंघ के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में तेजी से पता चलता है कि निवेश में तेजी आ रही है।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने उम्मीद जताई कि कारोबार के बेहतर हो रहे माहौल और विस्तार से रोजगार बढ़ेगा।
फिक्की के महासचिव ए. दीदार सिंह ने कहा, "हाल में बजटीय घोषणा के बाद विनिर्माण क्षेत्र में और तेजी की उम्मीद है।"
सिंह ने हालांकि कहा कि इस तेजी को बरकरार रखने के लिए ब्याज दर में कटौती भी की जानी चाहिए। साथ ही और नियामकीय सुधार किए जाने चाहिए।
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष राणा कपूर ने कहा, "बिजली और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र में तेजी लाने के लिए लगातार कोशिश करने की जरूरत है। सरकार को इन क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान करने की जरूरत है। इससे और औद्योगिक तेजी आएगी।"
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