नई दिल्ली: सेवलाइफ फाउंडेशन और वोडाफोन इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को नई दिल्ली में थीम 'सेफ्टी इन मोबिलिटी' के तहत भारत की पहली रिपोर्ट जारी की। अध्ययन के अनुसार 94 फीसदी लोग मानते हैं कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल खतरनाक है, किंतु इनमें से 47 फीसदी इस बात को स्वीकार भी करते हैं कि वे गाड़ी चलाते समय फोन सुनते हैं। रिपोर्ट 'डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग इन इंडिया : अ स्टडी ऑन मोबाइल फोन युजेज, पैटर्न एंड बिहेवियर' का अनावरण वोडाफोन इंडिया के रेग्यूलेटरी एवं सीएसआर निदेशक पी. बालाजी तथा सेवलाइफ फाउंडेशन के ऑपरेशंस निदेशक साजी चेरियन के द्वारा किया गया। साथ ही इस अवसर पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव अभय डेमले ने वोडाफोन सेवलाइफ फाउंडेशन 'रोड सेफ' मोबाइल एप्लीकेशन लांच किया।
भारत में किया गया अपनी तरह का यह पहला सर्वेक्षण अंतर्राष्ट्रीय शोध एजेंसी कंटार पब्लिक के द्वारा किया गया, जिसमें 8 शहरों के 1749 वाहन चालक शामिल थे। इन वाहन चालकों में दोपहिया, तिपहिया और चार-पहिया वाहन चालक सहित ट्रक/बस के चालक भी शामिल थे।
अध्ययन किए गए 34 फीसदी चालकों ने बताया, "वे वाहन चलाने के दौरान फोन पर बात करते समय अचानक ब्रेक लगाते हैं, जबकि 20 फीसदी चालकों ने बताया कि वे वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के कारण सड़क दुर्घटना का शिकार होने से बचे हैं।" सर्वेक्षण के परिणाम दर्शाते हैं कि 96 फीसदी यात्री अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं अगर वाहन चालक गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता है।
इस मौके पर अभय डेमले ने कहा, "भारत सरकार सड़क दुर्घटनाओं एवं मौतों की संख्या को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकसभा द्वारा मोटर वाहन संशोधन विधेयक पारित किया गया है। मानसून सत्र में विधेयक पर विचार किए जाने की संभावना है।"
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