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नजीब की तलाश में पुलिस ने जेएनयू परिसर का चप्पा-चप्पा छान मारा

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के लापता छात्र नजीब की तलाश में सोमवार को करीब 1,000 पुलिसकर्मियों ने विश्वविद्यालय परिसर का चप्पा-चप्पा छान मारा, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। नजीब पिछले दो

JNU Najeeb- India TV Hindi
Image Source : PTI JNU Najeeb

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के लापता छात्र नजीब की तलाश में सोमवार को करीब 1,000 पुलिसकर्मियों ने विश्वविद्यालय परिसर का चप्पा-चप्पा छान मारा, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। नजीब पिछले दो महीने से लापता है। अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली पुलिस की अन्य शाखाओं की मदद से अपराध शाखा मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर की तलाश फिर शुरू करेगी।

बीते 15 अक्टूबर को नजीब के लापता होने के बाद यह व्यापक तलाशी अभियान अपनी तरह का पहला है, जिसमें सभी 18 छात्रावासों, ढाबों, प्रशासनिक खंड तथा अकादमी केंद्रों के साथ ही नालों तक की छान मारी गई।

तलाशी अभियान सुबह सात बजे के आसपास शुरू हुआ और लगभग 10 घंटे के बाद जब अंधेरा होना शुरू हो गया, तब बंद हुआ।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि तलाशी अभियान में 20 खोजी कुत्तों को लगाया गया, जिसने परिसर में स्थित जंगल के 60 फीसदी इलाकों की छान मारी।

पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) रवींद्र यादव ने कहा, "इस बात की पुख्ता संभावना है कि नजीब की हत्या कर उसे परिसर में कहीं गाड़ दिया गया होगा या उसके शरीर को क्षत-विक्षत कर ठिकाने लगा दिया गया होगा।"

नजीब के परिवार ने आरोप लगाया है कि तलाशी में काफी देर हुई।

नजीब के एक चचेरे भाई मुजीब ने आईएएनएस से कहा, "पुलिस अधिकारी किसी से पूछताछ नहीं कर रहे, बस केवल तलाशी कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "हम उन्हें पहले दिन से ही परिसर की तलाशी लेने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। मुझे ऐसा लगता है कि जेएनयू प्रशासन ने भी पुलिस पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का दबाव नहीं बनाया।"

मुजीब ने कहा, "कुल मिलाकर यह अभियान बेकार है, क्योंकि डॉग हैंडलर (खोजी कुत्तों को संभालने वाले) ने मुझसे खुद कहा है कि अगर कोई सुराग होगा भी तो वह अब तक नष्ट हो गया होगा।"

इस बीच जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने परिसर में तलाश को मूर्खतापूर्ण तथा पुलिस के तरीके को बेतुका करार देते हुए निंदा की।

जेएनयूएसयू के अध्यक्ष मोहित पांडे ने कहा, "नजीब की गुमशुदगी के 65 दिनों बाद यह हालत है।"

उन्होंने कहा, "पुलिस ने पहले केंद्र सरकार की कठपुतली की तरह काम किया। अब न्यायालय के समक्ष अपना चेहरा बचाने के लिए वे इस तरह का बेतुका अभियान चला रहे हैं।"

पुलिस उपायुक्त जी.रामगोपाल नाईक के नेतृत्व में तलाशी दल को 11 क्षेत्रों में बांटा गया था।

यादव ने कहा, "तलाशी अभियान दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चलाया जा रहा है।"

उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ने पर पुलिस संदिग्धों की पॉलीग्राफी जांच भी करवा सकती है।"

पुलिस का यह भी कहना है कि परिसर के बाहर नजीब के साथ दुर्घटना की बात को भी खारिज नहीं किया जा सकता और इसलिए अस्पतालों तथा शवगृहों के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।

छात्र के लापता होने के बाद उसका अब तक कोई सुराग नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।

15 अक्टूबर की रात लापता होने से पहले नजीब की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के साथ नोकझोंक हुई थी। एबीवीपी ने हालांकि नजीब की गुमशुदगी में किसी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है।

पुलिस ने नजीब का सुराग देने वाले को इनाम की राशि पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को नजीब का पता लगाने के लिए पूरे विश्वविद्यालय का चप्पा-चप्पा छान मारने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि पुलिस जामिया मिलिया विश्वविद्यालय की भी तलाशी लेने के लिए स्वतंत्र है, जहां कथित तौर पर एक ऑटो रिक्शा चालक ने नजीब को छोड़ा था।

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