नई दिल्ली: कहा जाता है कि कही कोई आशा हो और उस काम को किया जाए तो वह जरुर पूरा होचा है। और उस काम से जो संतुष्टि और खुशी मिलती है। उसकी बात ही दूसरी होती है। और इसी आशा में हम जब किसी की सहायता करते है। जो उसके चेहरे की मुस्काहट हमें वही काम बार-बार करने के लिए मजबूर करती है।
यह यही मजबूरी एक दिन मुकाम बन जाता है। इसी खुशी को चाहा ऐसे लोगों ने जो नाम से कुछ नही लेकिन काम से बहुत कुछ है। जो लोगों कि दुआ से आगे बढते है और धीरे-धीरे हर मुकाम को पाते है। उनकी छोटी सी आशा ने गरीब लोगों को एक बड़ी सी आशा दे दी। जो उनके लिए किसी फरिस्ते से कम नहीं है।
यह आशा की पूरा किया प्रशांत मिश्रा और उनके दोस्त अमित सिसौदिया ने। जो कि आशा नाम से एक एनजीओ चलाते है। जोकि अभी रजिस्टर्ड नही है। लेकिन ये काम ऐसे करते है जिससे लोगों को जीवन जीने का सहारा मिल जाता है।
दिल्ली एनसीआर की हाड़ कपा देने वाली ठंड पर अमित और प्रशांत का एक विचार कई गरीब लोगों के लिए छोटी सी आशा बनकर आया है दोनों दोस्त अब तक 600 से अधिक लोगों की मदद कर चुके हैं। नोएडा के सेक्टर 62 में एआरटेकइंफो में एक्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट के पद पर कार्यरत प्रशांत ने खबरइंडिया टीवी से बात करते हुए बताया कि दो साल पहले एक छोटे से विचार ने हमें यह कार्य करने की प्रेरणा दी जिसे हम दोनों दोस्त पिछले दो साल से कर रहे हैं।
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