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'आप की अदालत’ में अमर सिंह ने की पीएम मोदी की तारीफ, बीजेपी में जाने की संभावना को नहीं किया खारिज

समाजवादी पार्टी के निष्कासित नेता अमर सिंह ने नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। साथ ही उन्होंने निकट भविष्य में बीजेपी जॉइन करने की संभावना को भी खारिज नहीं किया।

Amar Singh- India TV Hindi
Amar Singh

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के निष्कासित नेता अमर सिंह ने नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। साथ ही उन्होंने निकट भविष्य में बीजेपी जॉइन करने की संभावना को भी खारिज नहीं किया।

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इंडिया टीवी पर आज रात 10 बजे प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा के सवालों के जवाब देते हुए अमर सिंह ने कहा, ‘बीजेपी में जाने के बारे में अभी तक कोई विचार नहीं किया है। मैं नहीं कह रहा हूं कि प्लान नहीं है।’

पीएम मोदी की तारीफ

फायरब्रांड एमपी, जो कि मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी में कुनबे के बीच हुई लड़ाई में काफी अहम किरदार थे, ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा, ‘मोदीजी आर.एस.एस. के प्रचारक रहे होंगे, लेकिन क्या वह भारी बहुमत से देश के प्रधानमंत्री नहीं बने, मोदीजी क्या सिर्फ बीजेपी के प्रधानमंत्री हैं, हमारे भी प्रधानमंत्री हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मोदीजी के बारे में एक चीज मैं जरूर कहूंगा, उनका कोई परिवार नहीं है, कोई पुत्र नहीं है, उनकी कोई विरासत की सियासत नहीं है। यहां तक कि मुलायम सिंह की भी कोई राजनीतिक ‘विरासत’ नहीं थी, मुलायम सिंह और मोदीजी इस मामले में एक जैसे हैं। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, श्रृंखला चली जा रही है पुरखों की, विरासत, सियासत और तिजारत की, लेकिन मोदीजी के बारे में ऐसी कोई बात नहीं है।’

‘यही नरेश अग्रवाल ने सबसे पहले कहा था चायवाला मोदी, उसको दोहराया मणिशंकर अय्यर ने, उसको मुद्दा बना लिया मोदीजी ने कि चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है या नहीं। अब्राहम लिंकन तो जूते की पॉलिश करते थे, मरम्मत करते थे, (अमेरिका के) राष्ट्रपति बन गए, हम भी एक गरीब परिवार से आए हैं।’

अब ‘मुलायमवाद’ के दिन लद गए

जब रजत शर्मा ने अमर सिंह से यह पूछा कि वह ‘चायवाला’ मोदी के साथ थे या अब दरकिनार कर दिए गए नेता मुलायम सिंह के साथ, उन्होंने कहा, ‘मैं सारी जिंदगी साइडलाइन्ड किए गए मुलायम सिंह के साथ ही रहूंगा।’ ‘मैं ‘मुलायमवादी’ रहा हूं, लेकिन अब ‘मुलायमवाद’ के दिन लद गए, मुलायम जी को दरकिनार किया जा चुका है, उन्होंने ‘अखिलेशवाद’ या ‘पुत्रवाद’ स्वीकार कर लिया है। फिर भी, मुलायम सिंह मेरे और अखिलेश मेरे भतीजे बने रहेंगे। अखिलेश समर्थक मेरे पोस्टर पर पिशाब कर सकते हैं, मुझे गालियां बक सकते हैं, लेकिन मैं अपना स्तर नहीं गिराऊंगा।’

‘मैं अपनी पार्टी (सपा) से दो बार निकाला गया, पहले मुलायम सिंह के द्वारा और दूसरी बार अखिलेश यादव के द्वारा। अंग्रेजी में एक कहावत है, ‘वन्स बिटेन, ट्वाइस शाई’ (दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है)। अब तो यह ‘ट्वाइस बिटेन, फोर टाइम्स शाई’ हो गया है। जहां तक बीजेपी की बात है, मैंने अभी तक इससे जुड़ने का फैसला नहीं किया है, लेकिन मैं यह भी नहीं कह रहा कि ऐसी मेरी कोई योजना (बीजेपी जॉइन करने की) नहीं है।’

अमर सिंह ने मोदी के नोटबंदी के कदम की तुलना 60 के दशक में प्रधानमंत्री के खाद्यान्न संकट के दौरान किए गए आवाह्न से की। ‘मुझे याद है कि मेरे बचपन के दौरान 1960 के दशक में शास्त्री जी ने लोगों को खाद्यान्न संकट के दौरान एक दिन का भोजन छोड़ने का आवाह्न किया था। हम सोमवार को भोजन नहीं करते थे। इसी तरह क्या पीएम मोदी के कहने पर लोगों ने 50 दिन तक परेशानियां नहीं झेल लीं?’

नोटबंदी की तुलना खाद्यान्न संकट से की

‘नोटबंदी के कदम की खिलाफत उन लोगों ने कि जिनके पास बड़ी मात्रा में अघोषित धन था। मैं तो प्लास्टिक मनी से ही काम चलाता हूं। हां, कई गरीब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, और हमारे प्रधानमंत्री उन लोगों के लिए रोए भी। उन्होंने उन लोगों से 50 दिन का वक्त मांगा था।’

मुलायम सिंह ने चुनाव आयोग से 'साइकिल' अखिलेश को देने को कहा

अमर सिंह ने पहली बार खुलासा किया कि वो मुलायम सिंह यादव ही थे जिन्होंने अंतिम बार मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा कि वो साइकिल चुनाव चिन्ह उनके बेटे अखिलेश को दे दें।

'मैं आपको यह तथ्य बताना चाहता हूं जिसे लोग नहीं जानते हैं। प्रत्येक पिता अपने बेटे के हाथों हारना पसंद करता है। जो कुछ भी यह झगड़ा था वो सब बनावटी था। यह मेरा दृढ़ विश्वास है साथ ही ऐसी सूचनाएं भी हैं कि मुलायम सिंह ने गुप्त रूप से साइकिल चुनाव चिन्ह अपने बेटे अखिलेश को सौंपने का फैसला कर लिया था, और जिस दिन इसपर अंतिम फैसला होना था उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा कि चुनाव चिन्ह उनके बेटे को दे दिया जाए। ये पक्की बात है।'

जब रजत शर्मा ने यह बताया कि वह बड़े रहस्य का उद्घाटन कर रहे हैं, अमर सिंह का जवाब था, ' मैं यह खुलासा इसलिए कर रहा हूं क्योंकि जब मुलायम सिंह दूसरी बार चुनाव आयोग के दफ्तर गए थे, उन्होंने स्पष्ट तौर मुझे साथ नहीं जाने को कहा था। मैं नहीं गया.... मुलायम जी यह महसूस करते होंगे कि अगर वे अपने रुख पर अडिग रहते हैं तो साइकिल चुनाव चिन्ह को खो सकते हैं। यह पहला केस है जिसमें चुनाव चिन्ह फ्रीज नहीं किया गया, यह असंभव है।'

'सामान्य तौर पर सभी हलफनामे (अखिलेश समर्थक विधायक) की जांच में कम से कम तीन महीने का वक्त लगता। अखिलेश को तीन महीने बाद ही पार्टी चुनाव चिन्ह मिल सकता था क्योंकि उनके पास संख्याबल था... मुलायम सिंह ने पार्टी बनाई थी और साइकिल चुनाव चिन्ह उन्हें प्यारा है, उन्होंने यह सोचा होगा कि वे चुनाव चिन्ह खो सकते हैं, यह कम से कम उनके बेटे के पास तो रहना चाहिए।'

ये पूरा एक ड्रामा था: अमर सिंह

रजत शर्मा ने जब पूछा कि नेताओं को पार्टी से बाहर करना फिर फैसला वापस लेना, ये पूरा एक ड्रामा था, अमर सिंह ने जवाब दिया. ' आपने अंत में क्या देखा? शिवपाल सिंह अंगूठा चाट रहे हैं, अमर सिंह को निकाल बाहर किया, छुटभैये नेता कह रहे हैं कि मैं बाहरी व्यक्ति हूं। वो मैं था जिसने शादी (अखिलेश और डिम्पल) की सारी व्यवस्था की, केक किसने काटा, और किसने केक का टुकड़ा मेरे मुंह में डाला था, मैं आउटसाइडर हो गया और वो छुटभैये लोग इनसाइडर हो गए।'

अमर सिंह ने शिकायत की कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने, पार्टी अध्यक्ष के तौर पर अभी तक उनके निष्कासन की चिट्ठी राज्यसभा के सभापति को नहीं भेजी है।

'समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के सत्र में तीन प्रस्ताव पास किए गए, मुलायम सिंह को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया, शिवापल सिंह यादव को उनके पद से हटा दिया गया और मुझे निष्कासित कर दिया गया। और अभी तक अखिलेश ने पार्टी के मुखिया के तौर पर राज्यसभा को मेरे निष्कासन की चिट्ठी नहीं भेजी। मैंने हामिद अंसारी (राज्यसभा के सभापति) को चिट्ठी भेजकर अपने निष्कासन की जानकारी दी और उनसे असंबद्ध सदस्य के तौर पर बैठने के लिए जगह मांगी।'

'मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी को अपने निष्कासन के बारे में लिखा और उनसे आग्रह किया कि वे राज्यसभा को इस बारे में अवगत कराएं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो मैं सुप्रीम कोर्ट जाउंगा। मैं अपनी सीट से इस्तीफा नहीं देने जा रहा हूं।'

कांग्रेस सहयोगियों से धोखा करती रही है: अमर सिंह

समाजवादी पार्टी से निष्कासित सांसद कांग्रेस पर भी जमकर बरसे और कहा कि कांग्रेस के पास अपने राजनीतिक सहयोगियों को धोखा देने का लंबा इतिहास रहा है।

'कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेकर की सरकार 4 महीने में गिरा दी, इसने एचडी देवेगौड़ा की सरकार 15 महीने में गिरा दी, इसने आईके गुजराल की सरकार को भी गिरा दिया, इसने पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह से भी समर्थन वापस लिया था। इसने हेमवती नंदन बहुगुणा को भी धोखा दिया और अब इसने अखिलेश के साथ हाथ मिलाया है।'

‘ये दोनों नौजवान नेता (राहुल और अखिलेश), युवा और खूबसूरत हैं और वे अपनी-अपनी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, मैंने इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील को पार्लियामेंट में आगे बढ़ाया, और जब शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं तो मुझे तिहाड़ जेल में फर्श पर सोना पड़ा। उनके पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने अदालत में कहा था कि मैं ‘लोकतंत्र का हत्यारा’ था।’

आजम खान देशद्रोही: अमर सिंह

अमर सिंह ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी आजम खान को ‘गंदा, दो कौड़ी का, और देशद्रोही’ कहा। उन्होंने कहा, आजम खान ने एक बार ‘भारत माता’ को ‘डायन’ कहा था, और खुले तौर पर कहा था कि कश्मीर भारत का अंग नहीं है।

रजत शर्मा के शो ‘आप की अदालत’ में अमर सिंह का प्रसारण  (11 फरवरी) को 10 बजे इंडिया टीवी पर हुआ। यह शो रविवार को सुबह 10 बजे और रात 10 बजे दोबारा प्रसारित किया जाएगा।

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