दूसरी बात
जवानी भी हो सकती परेशानी की जड़
आचार्य चाणक्य ने जवानी को भी परेशानी का जड़ बताया है। जवानी परेशानी से भरी हो सकती है, क्योंकि जवानी में व्यक्ति में अत्यधिक जोश और क्रोध से भरपूर होता है। अगर कोई व्यक्ति जवानी के इस जोश को सही दिशा में लगाता है, तब तो वह अपने लक्ष्यों तक अवश्य ही पहुंच जाएगा। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति जवानी के जोश और क्रोध के वश में होकर गलत कार्य करने लगता है तो वह बड़ी परेशानियों में घिर सकता है। अत: जवानी के जोश को गलत दिशा में नहीं, बल्कि सही दिशा में लगाना चाहिए।
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