पटना: छठ पर्व पर बिहार में लाखों व्रतियों ने रविवार की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। यह पहला अर्घ्य था। सोमवार सुबह दूसरा अघ्र्य उगते सूर्य को दिया जाएगा। चार दिनों का छठ पर्व शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। शनिवार को 'खरना' अनुष्ठान हुआ, जिसमें उपवास शुरू करने से पहले व्रतियों ने गुड़-चावल की खीर सूर्य को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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व्रती पुरुष व महिलाएं शुक्रवार से ही 36 घंटे के उपवास पर हैं। परंपरा के अनुरूप श्रद्धालु भगवान सूर्य को गेहूं के आटे से बने पकवान, गन्ना, केले और नारियल प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं। राज्य के सभी भागों में छठ पर्व उमंग और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
राजधानी पटना समेत अन्य शहरों में नदी तटों की ओर जाने वाली सड़कें दुल्हन की तरह सजी हुई हैं और श्रद्धालुओं के गुजरने और प्रसाद ले जाने के लिए उसकी समुचित सफाई की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने पूरा दिन अपने-अपने परिवारों के साथ बिताया।
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के घर में इस साल छठ नहीं मनाया जा रहा है, क्योंकि उनकी पत्नी और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने घोषणा की कि है कि वह दोनों बेटों का विवाह होने के बाद ही छठ पर्व मनाएंगी। उनके दोनों बेटे सरकार में शामिल हैं।
पटना में छठ के लिए गंगा नदी के 50 घाटों को जिला प्रशासन और स्वयंसेवियों ने अंतिम क्षण में संवारा। अधिकारियों ने पटना में दो दर्जन घाटों को असुरक्षित और खतरनाक घोषित किया था। प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने गंगा नदी और अन्य जलाशयों की ओर जाने वाली सड़कों की सफाई के लिए दिन-रात काम किया।
उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ सोमवार की सुबह छठ पर्व का समापन होगा। हर साल दिवाली के छह दिनों बाद छठ पर्व मनाया जाता है।
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