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17 साल से गोडसे की 'किलर कार' संभाल रहे हैं दिल्ली के जावेद रहमान

नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे ने हत्या में जिस कार का इस्तेमाल किया था वह 1930 में बनी अमेरिकी कार स्टड बेकर थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार

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नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे ने हत्या में जिस कार का इस्तेमाल किया था वह 1930 में बनी अमेरिकी कार स्टड बेकर थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गोडसे के पकड़े जाने के बाद इस कार को जब्त कर लिया गया और बाद में 1978 में इसे नीलाम कर दिया गया था। अब यह कार दिल्ली के ही जावेद रहमान गैराज में अपना ठिकाना बनाए हुए है।

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जावेद रहमान ने यहां भाषा से विशेष बातचीत में कहा, गांधी जी की हत्या के दौरान गोडसे ने इसी कार का उपयोग किया था। गोडसे को बाद में पकड़ लिया गया था और उनकी कार जब्त कर ली गई थी। मेरी जानकारी के मुताबिक बाद में इस कार की 1978 में नीलामी कर दी गई थी।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी 32 वर्षीय रहमान ने बताया कि इसे उनके भाई परवेज सिद्दीकी ने बरेली के कमाल साहब से सन् 2000 में खरीदा था। उन्हें विंटेज कारों का शौक था। 1930 की इस स्टड बेकर कार को आम तौर पर द किलर कार के रूप में जानते हैं। इस कार की नंबर प्लेट पर यूएसएफ 73 के साथ ही किलर भी लिखा हुआ है।

रहमान ने कहा, 17 साल पहले ही हमने इस कार का पुनरूद्धार कराया था। जब यह उन्हें मिली थी तो बिलकुल कबाड़ की स्थिति में थी। हालांकि तब से इस कार में कोई बड़ी खराबी नहीं आई है। इसे सिद्दीकी ने खुद अपने हाथों से ठीक किया था। रहमान के मुताबिक जब उन्होंने यह कार खरीदी थी तब इसका रंग क्रीम और डार्क ब्राउन था। अभी इस कार का रंग गहरा हरा और काला है।

उन्होंने कहा कि यह अभी 35 बीएचपी की शक्ति देती है और 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार तक दौड़ सकती है। यह एक लीटर पेट्रोल में चार किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसके किरमिच को हटाकर खुली कार के तौर पर भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसको चालू हालत में रखने के लिए वह इसे सप्ताह में एक बार अवश्य चलाते हैं और देश की कई विंटेज कार रैलियों में भी ले जाते हैं।

पेशे से हीरों के कारोबारी रहमान ने बताया कि इस कार का निर्माण विशेष ऑर्डर पर किया गया था। इस प्रकार यह अपने तरह की पूरे विश्व में इकलौती कार है।

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