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Hindi News भारत राष्ट्रीय NPR और जनगणना नहीं हैं एक समान, जानिए इनके बीच का अंतर

NPR और जनगणना नहीं हैं एक समान, जानिए इनके बीच का अंतर

केंद्रीय सरकार जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने जा रही है। आम तौर पर कई बार जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को एक जैसा ही मान लिया जाता है लेकिन ऐसा है नहीं। तो चलिए NPR और जनगणना के बीच का अंतर, इनके उद्देश्य और विशेषताओं के बारे में जानते हैं।

NPR और जनगणना में अंतर और इनके लक्ष्य?- India TV Hindi NPR और जनगणना में अंतर और इनके लक्ष्य?

नई दिल्ली: सरकार दो बड़े कदम उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। केंद्रीय सरकार जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने जा रही है। कई बार जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का मतलब एक जैसा नजर आता है लेकिन ऐसा है नहीं। तो चलिए NPR और जनगणना के बीच का अंतर, इनके उद्देश्य और विशेषताओं के बारे में जानते हैं।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर)

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के उद्देश्यों में कहा गया है कि एनपीआर देश के स्वाभाविक निवासियों का रजिस्टर है। यह नागरिकता संशोधन कानून 1955 और नागरिकता (नागरिकों के पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करने) के नियम 2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय स्तर पर (गांव/उप शहर), उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जायेगा। एनपीआर का मकसद देश के स्वभाविक निवासियों की समग्र पहचान का डाटाबेस तैयार करना है। 

इसमें भौगोलिक और बायोमेट्रिक जानकारी उपलब्ध होगी। एनपीआर में व्यक्ति का नाम, पिता का नाम, माता का नाम, पत्नी या पति का नाम (यदि विवाहित हैं), परिवार के मुखिया से संबंध, जन्मतिथि, मौजूदा पता, स्थायी पता, लिंग, राष्ट्रीयता, व्यवसाय की जानकारी भी देनी होगी। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, एनपीआर अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच असम को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। 

विज्ञप्ति के मुताबिक, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) जनगणना कार्य के साथ होगा।  एनपीआर के आंकड़े पिछली बार 2010 में घर की सूची तैयार करते समय लिये गये थे, जो 2011 की जनगणना से जुड़े थे। 2015 में घर-घर जाकर इन आंकड़ों का उन्नयन किया गया था। असम को इससे अलग इसलिये रखा गया है क्योंकि वहां पहले ही राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण का कार्य हो गया है।  

जनगणना

जनगणना को सेंसस एक्ट ऑफ 1948 के तहत किया जाता है। इसमें इसमें कृषक और खेतिहर मजदूरों से संबंधित आंकड़े, उनके लिंग, गैर-घरेलू उद्योग में श्रमिकों के व्यावसायिक वर्गीकरण, श्रमिक और लिंग के वर्ग द्वारा व्यापार, व्यवसाय या सेवा से संबंधित आंकड़े भी एकत्र करते हैं। इतना ही नहीं इसमें लिंग और साक्षरता दर, कस्बों की संख्या, स्लम घरों और उनकी आबादी पर विस्तृत सर्वेक्षण होता है। पीने योग्य पानी, ऊर्जा, सिंचाई, खेती करने की विधि आदी की जानकारी भी जनगणना में ली जाती है।

जनगणना हमें जनसांख्यिकी, आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, आवास और घरेलू सुविधाओं, शहरीकरण, प्रजनन और मृत्यु दर, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों, भाषा, धर्म, प्रवास, विकलांगता और कई अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक एवं जनसांख्यिकीय के संबंध में आंकड़ों के माध्यम से विस्तृत और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती है। यह जानकारी केंद्र और राज्य सरकारों को विभिन्न नीतियों और योजनाओं के निर्धारण में सहायता करती है। इसके अलावा, निर्वाचन क्षेत्रों- संसदीय/विधायी/पंचायती और अन्य स्थानीय निकायों के परिसीमन या आरक्षण भी जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत महा पंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय हर दस साल के बाद देश में जनगणना कराने के लिए एक नोडल प्राधिकरण है। आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी, जो देश की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना थी और स्वतंत्रता के बाद 7वीं थी। अब 2021 में 16वीं जनगणना होगी, जिसे दो चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण में घर की सूची या घर संबंधी गणना होगी, जो अप्रैल से सितंबर 2020 तक होगी। इसका दूसरा चरण नौ फरवरी से 28 फरवरी 2021 में होगा। इसकी संबद्धता तिथि 1 मार्च 2021 होगी। बर्फ से प्रभावित जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में संबद्धता तिथि 1 अक्तूबर 2020 होगी। 

(इनपुट- भाषा और कुछ सरकारी वेबसाइट्स)

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