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Hindi News भारत राष्ट्रीय रेगिस्तान में बाढ़ ने मचाया कहर, पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी

रेगिस्तान में बाढ़ ने मचाया कहर, पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी

पहाड़ से लेकर मैदान तक सैलाब ने जान आफत में डाल रखी है। वहीं अब पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अगले 48 से 72 घंटे तक पंजाब के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

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नई दिल्ली: पहाड़ से लेकर मैदान तक सैलाब ने जान आफत में डाल रखी है। वहीं अब पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अगले 48 से 72 घंटे तक पंजाब के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के सभी अफसरों को हालात पर नज़र बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। ज़िले के अफसरों से कहा गया है कि जो प्रभावित इलाके हो सकते हैं वहां पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का इंतज़ाम किये जाएं। इस बीच उत्तराखंड से लेकर राजस्थान सब सैलाब के आगे बेबस हो गए हैं।

राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ के हालात हो गए हैं। बीते चौबीस घंटों में वर्षा जनित हादसों में पांच लोगों की मौत हो गई है और कोटा के जलमग्न कैथून कस्बे में राहत एवं बचाव कार्य के लिये सेना की मदद ली जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण हाड़ौती क्षेत्र के बारां, भीलवाड़ा, झालावाड़ और बूंदी में भी हालात गंभीर है और प्रशासन ने सेना को सर्तक रहने को कहा है। 

मौसम विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के पूर्वी हिस्सों के एक दो स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश, पूर्वी राजस्थान के कुछ स्थानों व पश्चिमी राजस्थान में कहीं कहीं भारी से अति भारी, वहीं पूर्व राजस्थान के अधिकांश हिस्सों व पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई। 

उत्तराखंड में भी बाढ़ का कहर देखने को मिला है। रूद्रप्रयाग का नमामि गंगे घाट पूरी तरह डूब गया है। यहां इंसानों को तो छोड़िये भगावान भी सैलाब के पानी में डूब गए हैं। यहां भगवान शिव की विशालकाय मूर्ती करीब करीब पूरी डूब चुकी है। रूद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी के तट पर नमामि गंगे घाट पर बनी भगवान शिव के मूर्ती 25 फीट ऊंची है। यानी तीन मंजिल इमारत के बराबर लेकिन सैलाब में डूबी इसी मूर्ती का अब सिर्फ 3 फीट का ऊपर का हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।

वैसे बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित केरल के कई हिस्सों में पानी घटने लगा है। आंध्र प्रदेश में गुंटूर और कृष्णा जिलों में 4,000 से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। राज्य में कृष्णा नदी उफान पर है जिससे बाढ़ आ गयी है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाढ़ प्रभावित पश्चिमी महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में मौसम में सुधार हुआ जिससे प्रशासन ने बचाव एवं राहत कार्य तेज कर दिया। केरल में वर्षाजनित घटनाओं में अब तक 111 लोगों, मध्य प्रदेश में 70, महाराष्ट्र में 54, राजस्थान में पांच लोगों और आंध्र प्रदेश में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। 

मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में जोधपुर, नागौर और पाली के लिए अगले 24 घंटे के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि सेना को चौकस रहने को कहा गया है क्योंकि कोटा, बारन, भीलवाड़ा, झालावाड और बूंदी जिलों में बृहस्पतिवार से 160 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गयी है। जिला आपदा, सहयोग और नागरिक सुरक्षा विभाग के सचिव आशुतोष ए टी पेढेणकर ने बताया कि तीन जिलों में वर्षा जनित घटनाओं में पांच लोगों की जान चली गयी। 

मौसम विभाग ने इस सप्ताहांत को भारी बारिश को लेकर हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए लाल चेतावनी और पूरे राज्य के लिए नारंगी चेतावनी जारी की। शिमला मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि राज्य में 17 और 18 अगस्त को ज्यादातर स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। उन्होंने कहा कि 17 और 18 अगस्त को मध्यम से भारी वर्षा के चलते खासकर चंबा, कुल्लू, लाहौल स्पीति, कांगड़ा, मंडी और शिमला जिलों में रास्ते बाधित हो सकते हैं। इस बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हल्की वर्षा से दिल्लीवासियों को उमस से राहत मिली। मौसम विज्ञानी ने शनिवार को आसमान में बादल छाये रहने तथा हल्की से भारी बारिश होने , गरज के साथ बौछारे पड़ने एवं तेज बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है। 

आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा में कृष्णा नदी पर प्रकाशम बैराज पर दूसरी चेतावनी जारी की गयी है। बैराज में सात लाख क्यूसेक से अधिक पानी है। डोवालेश्वरम के सर आर्थर कॉटन बैराज से सात लाख क्यूसेक से अधिक पानी प्रवाहित होने के कारण गोदावरी नदी में शुक्रवार को फिर उफान आ गया। केरल में वर्षा से थोड़ी राहत मिली। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि 31 लोग अब भी लापता है और 1.47 लाख से अधिक लोग राहत शिविरों में हैं। महाराष्ट्र के सांगली और कोल्हापुर जिलों में बाढ़ के दौरान सात लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जनजीवन सामान्य होने लगा है क्योंकि कृष्णा और पंचगंगा नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।

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