नई दिल्ली: आप की किसान रैली को लेकर एक नया खुलासा हुआ है, अगर 'आप' ने दिल्ली पुलिस की बात मानी होती तो बुधवार को जंतर मंतर पर ना तो आम आदमी पार्टी की रैली होती और ना ही गजेंन्द्र की मौत। दिल्ली पुलिस ने एक बार नहीं दो-दो बार आम आदमी पार्टी को चिट्ठी लिखकर जंतर मंतर की बजाय रामलीला मैदान में रैली करने की सलाह दी थी।
पुलिस की दो बार की चिट्ठियों को नजरअंदाज करते हुए आप ने जंतर मंतर पर रैली की।
सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को जंतर मंतर पर रैली करने के लिए पुलिस ने कोई लिखित अनुमति नहीं दी थी। यही नहीं दिल्ली पुलिस ने दो-दो बार लिखित रूप में आम आदमी पार्टी को ना केवल जंतर मंतर पर रैली करने से मना किया बल्कि उन्हें रामलीला मैदान में रैली करने की सलाह दी और गड़बड़ी होने की आशंका भी जताई।
पुलिस ने पहली चिट्ठी 17 अप्रैल को औऱ दूसरी रैली से ठीक एक दिल पहले 21 अप्रैल को लिखी थी। आम आदमी पार्टी के नीरज कुमार को लिखी इन चिट्ठीयों में पुलिस ने कहा है कि 22 अप्रैल को होने वाली मार्च को लेकर खुफिया इनपुट हैं कि उसमें कम से कम 20 हजार लोग जंतर मंतर पर इकट्ठा होंगे।
चूकि संसद का सत्र चल रहा है लिहाजा कई सारे संगठन जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जंतर मंतर पर जगह की कमी है लिहाजा किसी एक पार्टी को वहां जगह उपलब्ध कराने के बजाए सभी संगठनों में जगह का बंटवारा होगा। डीसीपी नीरज कुमार ने आम आदमी पार्टी के आयोजक से इस पत्र में कहा कि दिल्ली पुलिस के अनुभव के मुताबिक जंतर मंतर पर अत्यधिक लोगों के जुट जाने की वजह से वहां भगदड़ होने और लोगों की जान जाने का खतरा है।
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