नई दिल्ली: मोदी सरकार तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है जिसमें अब बेरोजगार युवाओं के सपने पूरे होने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि कैबिनेट को भेजे जाने वाले सभी प्रस्तावों में यह जानकारी जरूर दी जाए कि उन प्रस्तावों पर अमल करने से रोजगार के कितने मौके बनेंगे। सरकार को चिंता सता रही है कि अगर इस वादे को पूरा नहीं कर पाए तो आनेवाले चुनावों में पार्टी को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ('मेरे आंसुओं को कमज़ोरी ना समझना', MLA की फटकार के बाद लेडी IPS का जवाब)
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने घोषणा पत्र में एक करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन मई में तीन साल पूरा करने जा रही केन्द्र सरकार इस वादे पर खरा नहीं उतर पाई है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जिस भी प्रस्ताव के साथ कुछ खर्च जुड़ा होगा, उससे देश में रोजगार निर्माण होना ही चाहिए और ऐसे प्रस्ताव के साथ रोजगार के कितने मौके हैं दिया जाना चाहिए। सीतारमण ने बताया, 'जब भी कोई प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है तो प्रधानमंत्री कैबिनेट बैठक में पूछते हैं कि रोजगार के कितने मौके बनेंगे?'
सरकार अपनी विनिर्माण नीति की समीक्षा भी कर रही है ताकि उसे रोजगार पैदा करने के उद्देश्य के मुताबिक बदला जा सके। वहीं, कौशल बढ़ाने के कार्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नौकरियों की तलाश में निकलने वाले लोग नए रोजगार के लिए पहले से तैयार होंगे।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने न्यू इंडिया के विचार को धरातल पर उतारने के लिए भी मुख्यमंत्रियों का सहयोग मांगा था। वहीं रोजगार के नए मौके पैदा करने के लिए नीति आयोग ने एक्शन प्लान बनाया है। आयोग ने बैठक में इस प्लान को पेश भी किया था। सीआईआई ने एक आंकड़े में बताया था कि 2012 से 2016 के बीच भारत में रोजगार के 1।46 करोड़ मौके बने थे।
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