नयी दिल्ली: बढ़ते लंबित मामलों से निपटने के लिए सरकार और न्यायपालिका के बीच सहमति बन गई है। कोर्ट में जजों की कमी के मद्देनजर अब रिटायर्ड जजों का सहारा लिया जाएगा। अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले रिटायर्ड जजों को हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए अब संविधान के एक असाधारण प्रावधान का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों की अप्रैल में हुई बैठक के विवरण के अनुसार यह संकल्प लिया गया है कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुके व्यक्ति की सत्यनिष्ठा, उपयुक्तता और प्रदर्शन की शर्त पर उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित दीवानी और फौजदारी मामलों की असाधारण स्थिति से निपटने के लिए अनुच्छेद 224 ए के प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रावधान के अनुसार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी भी व्यक्ति से जो उस अदालत या किसी अन्य अदालत का न्यायाधीश रह चुका है उससे उस राज्य के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर बैठने और कार्य करने का अनुरोध कर सकता है।
बैठक का ब्योरा उच्चतम न्यायालय ने तैयार किया था लेकिन विधि मंत्रालय ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा तैयार किए गए कुछ बिंदु अंतिम प्रकृति के थे, जबकि बैठक में उन मुद्दों पर बातचीत अधूरी रही।
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