नई दिल्ली: चुनाव आयोग को 1962 से अमिट स्याही देने के बाद मैसूर पेंट्स और वार्निश लिमेटिड के हाथ में अब नया काम आया है। सरकार ने इससे कहा है कि वह अमिट स्याही का भंडार तैयार रखे ताकि बैंक बंद हो चुके नोटों को को बदलने आ रहे उपभोक्ताओं की निशानदेही के लिए उनका इस्तेमाल कर सके, जिससे संदिग्ध जमा को रोका जा सके।
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मैसूर इंक मैनेजर (सामान्य एवं कार्पोरेट मामले) सी एच कुमार ने फोन पर को बताया, हमें (स्याही की बोतलों का) भंडार तैयार रखने के बारे में बोला गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को कितनी बोतलों की जरूरत है यह नहीं बताया गया है।
बैंकों में खत्म नहीं होती कतारें और झगड़ालू होते स्वाभाव को और काले धन को सफेद करने वाले सिंडिकेटों को रोकने के लिए सरकार ने बंद हो चुकी मुद्रा की अदला बदली करने वाले उपभोक्ताओं पर अमिट स्याही से निशान लगाने की व्यवस्था शुरू करने का आज फैसला किया।
मैसूर पेंट्स और वार्निश लिमेटिड कर्नाटक सरकार का उपक्रम है और भारत के सभी राज्यों और यहां तक कि विदेशों में प्रसिद्ध अमिट स्याही की आपूर्ति करता है।
चुनाव आयोग ने 1962 में कानून मंत्रालय और राष्ट्रीय भौतिक प्रायोगशाला और राष्ट्रीय अनुसंसाधन विकास निगम के सहयोग से मैसूर पेंट्स से लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए अमिट स्याही की आपूर्ति करने का समझौता किया था। यह तब से भारत में चुनावों के लिए स्याही की आपूर्ति करती है।
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