हिंगलाज माता मंदिर, बलूचिस्तान:
हिंगलाज माता मंदिर, माता सती का सबसे प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। गुफा मंदिर बलूचिस्तान में हिंगोल नदी पर स्थित है और यह 'हिंगलाज देवी' के रूप में भी जाना जाता है। इस मंदिर के साथ कुछ पौराणिक कथाएं जपुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि सती के पिता प्रजापति दक्ष को सती और शिव की शादी मंजूर नहीं थी। जिस वजह से उन्होंने एक बड़े यज्ञ में सती और शिव को आमंत्रित नहीं किया। आमंत्रित न किए जाने के बावजूद भी सती अपने पति शिव के साथ वहां गई जिस पर प्रजापति दक्ष ने उनका बहुत अपमान किया। अपमान न सहन कर पाने पर पर सती ने यज्ञ में कूद कर आत्महत्या कर ली। परंतु उनका शरीर नहीं जला।
सती के शरीर को लेकर शिव ने संसार के तब तक चक्कर लगाए जब तक उन्हें भगवान विष्णु नहीं मिले। भगवान विष्णु से मिलने पर विष्णु ने सती के शरीर के 52 टुकड़े किए जिसे संसार के 52 जगहों पर गिराया गया। सती के शरीर के ये टुकड़े जिस भी जगह पर गिरे उन जगह को शक्ति पीठ के नाम से जाने जाता है। सती का सिर बलूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर में गिरा था जिसे शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर को हिन्दुओं और मुसलमानो द्वारा उच्च सम्मान दिया गया है। एक ओर जहां हिंदु इस मंदिर को 'शक्ति पीठ' या 'देवी मंदिर' कहते है, वहीं दूसरी ओर मुसलमान इसे 'नानी' या 'बीबी नानी' का मंदिर कहते हैं।
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